क्या खुद से कम उम्र लड़कों के साथ खुश रहती हैं महिलाएं

  • 1 अगस्त 2018
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''ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन...

जब प्यार करे कोई, तो देखे केवल मन...''

प्यार के आगे उम्र की सीमा और जन्म के बंधनों को तोड़ने की बात करती जगजीत सिंह की गाई यह ग़ज़ल सालों से कई महफ़िलों को गुलज़ार करती रही है.

प्यार में उम्र की सीमाएं तोड़ती ऐसी ही एक तस्वीर कुछ दिन पहले देखने को मिली, जब ख़बरें आईं कि बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने खुद से 10 साल छोटे अमरीकी गायक और अपने दोस्त निक जोनास के साथ सगाई कर ली है.

इस ख़बर के सामने आने के बाद दोनों सेलिब्रिटियों को तमाम जगहों से बधाई संदेश मिलने लगे. हालांकि प्रियंका और निक ने खुद अपनी सगाई की पुष्टि नहीं की लेकिन उन्होंने सगाई की ख़बरों पर मिल रहे बधाई संदेशों को नकारा भी नहीं.

इन बधाई संदेशों के साथ-साथ एक और मुद्दे पर बहस होने लगी कि किसी संबंध में उम्र का फ़ासला कितना मायने रखता है. साथ ही शादी के लिए लड़की का लड़के से उम्र में बड़ा होना सामाजिक ताने-बाने के विपरीत तो नहीं है.

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Image caption प्रियंका चोपड़ा और निक जोनास

जब बड़ी होती है लड़की

एक साल पहले जब इमैनुएल मैक्रों फ़्रांस के राष्ट्रपति चुने गए तो उनके राष्ट्रपति की गद्दी तक पहुंचने के अलावा एक और ख़बर सुर्खियों में आई, यह ख़बर थी उनके रिलेशनशिप स्टेटस के बारे में.

मैक्रों की पत्नी और फ़्रांस की फर्स्ट लेडी ब्रिजेट मैक्रों उनसे 24 साल बड़ी हैं. जिस वक़्त इमैनुएल स्कूल में थे तब ब्रेजिट उनकी टीचर थीं, और दोनों के बीच उसी समय प्रेम परवान चढ़ा था.

समाज में एक आम धारणा है कि शादी के वक्त महिला की उम्र पुरुष से कम होनी चाहिए. भारत में सरकार की तरफ से शादी की क़ानूनन उम्र लड़के के लिए 21 साल है तो लड़की के लिए 18 साल.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जब किसी शादी में लड़की की उम्र लड़के से ज़्यादा हो जाती है तो क्या वे समाज के बनाए नियम के विपरीत जा रहे होते हैं?

फोर्टिस और आईबीएस हॉस्पिटल में मैरिज काउंसिलर के तौर पर काम करने वाली मनोवैज्ञानिक शिवानी मिसरी साढू ने इस बारे में बीबीसी से विस्तार से बात की.

वो कहती हैं कि बड़ी उम्र की महिलाओं का कम उम्र के युवकों के साथ संबंध बनाना या शादी करना, उनके पुराने अनुभवों के आधार पर होता है.

शिवानी इन संबंधों को समझाते हुए कहती हैं, ''कोई बड़ी उम्र की महिला अपने पुराने अनुभवों से सबक लेते हुए आगे बढ़ती है, वह अपने जीवन में काफी कुछ सीख चुकी होती है और उम्र के एक पड़ाव पर आने के बाद उसे लगता है कि अब उसके जीवन में जुड़ने वाला व्यक्ति उस पर अपना प्रभुत्व ना जमाए, ऐसे में वो कम उम्र के लड़कों के साथ सहज होती हैं.''

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Image caption ब्रिजेट के साथ मैक्रां

समाज का नज़रिया

फ़िल्म 'दिल चाहता है' में अक्षय खन्ना ने जिस लड़के का किरदार निभाया है, उसे खुद से उम्र में बड़ी महिला से प्यार हो जाता है. यह बात वह अपने सबसे जिगरी दो दोस्तों को बताते हैं, लेकिन उनके दोस्त उनके प्यार की गहराई को समझने की जगह उनका मज़ाक बनाने लगते हैं.

इस फ़िल्म में दिखाए गए मज़ाकिया सीन दरअसल इस तरह के रिश्तों की हक़ीकत बयान करते हैं.

दिल्ली के उत्तम नगर में रहने वाली मानसी भी अपने पति से पांच साल बड़ी हैं, उनकी शादी साल 2012 में हुई थी. पति-पत्नी के बीच आपसी समझ बेहद अच्छी है लेकिन कभी-कभी मानसी की सहेलियां उन्हें ये कहते हुए ज़रूर चिढाती हैं कि तुमने बच्चे से शादी कर ली.

मानसी यह बात भले ही हसंते हुए बताती हैं लेकिन इस तरह के मज़ाक कई दफ़ा गंभीर परिणामों में बदल जाते हैं.

मैरिज काउंसिलर शिवानी इन परिणामों के बारे में बताती हैं, ''मेरे पास बहुत से ऐसे क्लाइंट आते हैं जिनके बीच अनबन की वजह दोस्तों का मज़ाक या रिश्तेदारों के ताने होते हैं. उम्र में फ़ासला होने की वजह से ये अनबन और ज़्यादा हो सकती है.''

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Image caption दिल चाहता है फ़िल्म का दृश्य

उम्र में फ़ासले के परिणाम

अगर दो लोगों के बीच उम्र में बहुत अधिक फ़ासला है तो उसके अलग-अलग तरह के परिणाम देखने को मिलते हैं. जैसे अगर लड़की की उम्र 40 से अधिक हो जाए और तब वह रिश्ते में आती है तो प्रेगनेंसी से जुड़ी समस्याएं हो सकती है. इसी तरह मानसिक रोग भी अधिक उम्र के साथ बढ़ने लगते हैं.

अगर दो लोग एक उम्र के नहीं हैं तो उन्हें आपस में तालमेल बैठाने की समस्या का सामना करना पड़ता है. बीबीसी रेडियो 1 की एक रिपोर्ट के अनुसार कम उम्र के व्यक्ति के सोचने का तरीक़ा अलग होता है जबकि अधिक उम्र वाले व्यक्ति की सोच अलग. ऐसे में कई बार सोच-समझ में मतभेद हो जाते हैं.

हालांकि आपसी तालमेल की ये बातें उम्र के अलग-अलग पड़ाव के अनुसार बदल जाती हैं. इस बात को शिवानी विस्तार से समझाती हैं, ''मान लीजिए एक जोड़ा 20 साल और 30 साल का है तो उनके बीच आपसी मतभेद दिख सकते हैं लेकिन दूसरा जोड़ा 50 साल और 60 साल का है तो उनके बीच उन्हीं समान मुद्दों पर सहमति देखने को मिलती हैं. हालांकि दोनों ही उदाहरण में उम्र का फ़ासला तो 10 साल का ही है लेकिन कई बार ऐसे रिश्तों में उम्र का पड़ाव ज़्यादा अहम हो जाता है.''

शिवानी कहती हैं कि जब हम जवान होते हैं तो हमारी उम्मीदें, महत्वाकांक्षाएं अलग होती हैं, उस समय उम्र में पांच साल का फ़ासला भी ज़्यादा नज़र आता है जबकि उम्र दराज होने पर यही फ़ासला अनुभव में बदलकर सहमति की ओर ले जाता है.

अमरीका की इमोरी यूनिवर्सिटी की एक स्टडी बताती है कि अगर उम्र का फ़ासला बहुत अधिक होता है तो उनके बीच तलाक़ के आंकड़े बढ़ जाते हैं. रैंडल ओल्सन ने इमोरी यूनिवर्सिटी की इस स्टडी पर What makes for a stable marriage? नाम से दो हिस्सों में रिपोर्ट जारी की थी, इन दोनों हिस्सों में बताया गया था कि किसी कपल के बीच उम्र का फ़ासला जितना बढ़ता जाता है तलाक़ की संभावनाएं उतनी अधिक बढ़ जाती हैं. हालांकि ये रिपोर्ट अमरीकी जोड़ो पर आधारित है.

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क्या रहती है सोच?

एक सवाल यह भी उठता है कि खुद से कम उम्र के लड़के के साथ संबंध में आने से पहले कोई लड़की के दिमाग में क्या विचार चल रहे होते हैं?

इस सवाल के जवाब में शिवानी कहती हैं, ''वैसे तो कोई भी रिश्ता आम सहमति और पसंद के साथ ही शुरू होता है. खुद से कम उम्र के लड़कों को पसंद करते समय लड़कियों के दिमाग में एक ही बात चलती है - पुराने रिश्तों को भुलाना. दरअसल युवा लड़कों के साथ रिश्ता बनाने पर लड़कियां खुद भी युवा महसूस करने लगती हैं. उन्हें महसूस होता है कि वो अभी भी खुद से युवा लड़कों को आकर्षित कर सकती हैं.''

इसके विपरीत एक लड़का खुद से बड़ी उम्र की लड़की के साथ रिश्ता कायम करते वक्त किन बातों का ख्याल रखता है? इसके बारे में शिवानी कहती हैं कि लड़कों के लिए ये रिश्ते एक तरह से कम ज़िम्मेदारी भरे होते हैं, वो एक अनुभवी साथी का साथ पाकर बहुत सी ज़िम्मेदारियों से बच जाते हैं.

शिवानी कहती हैं, ''ये रिश्ते दोनों के लिए ही WIN-WIN स्थिति हैं, अगर दोनों की आपसी समझ बेहतर है तो लड़का और लड़की एक दूसरे की ज़रूरतों को पूरा कर देते हैं. बड़ी उम्र की लड़कियां आत्मनिर्भर होती हैं, ऐसी लड़कियों के साथ लड़कों को बहुत अधिक चिंता करने की ज़रूरत नहीं पड़ती.''

शिवानी यह भी कहती हैं कि इस तरह के रिश्तों में आमतौर पर पहले से ही बच्चों के होने या न होने की संभावनाओं पर विचार कर लिया जाता है. अगर एक 20 साल का लड़का 30 साल की लड़की को डेट कर रहा है तो शायद वे फ़ैमिली प्लानिंग के संबंध में बहुत स्पष्ट ना हों लेकिन अगर एक 30 साल का लड़का और 40 साल की लड़की डेट कर रहे हैं तो उनके बीच फ़ैमिली प्लानिंग की सहमतियां बन जाती हैं.

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उम्र में फ़ासलों के सफल असफल दोनों ही तरह के ढेरों उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहां सैफ़ अली ख़ान और उनकी पहली पत्नी अमृता सिंह के बीच उम्र का बड़ा फ़ासला था और उनकी शादी कामयाब नहीं रही. बाद में सैफ़ ने खुद से उम्र में काफी छोटी करीना कपूर से शादी की.

वहीं दूसरी तरफ ऐसे भी कई उदाहरण हैं जहां पत्नी के बड़ी उम्र के होने के बाद शादियां कामयाब रहीं, जैसे क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और अंजली तेंदुलकर की जोड़ी.

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