प्रेस रिव्यू: केरल चर्च यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता बयान से पलटी

  • 3 अगस्त 2018
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इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक चर्चित केरल चर्च यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता अपने बयान से पलट गई है.

पीड़िता का कहना है कि उसने सहमति से चर्च के पुजारी के साथ यौन संबंध बनाए थे.

पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि वो मुख्य आरोपी रॉबिन वादककुमचेरी से शादी करना चाहती है.

पीड़िता की मां इस केस में दूसरी गवाह हैं और वो भी अपने बयान से पलट गई हैं. बुधवार को पोक्सो कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कहा कि जब उन्होंने पुजारी के साथ सहमति से यौन संबंध बनाए थे तब वह नाबालिग नहीं थी.

दलित अधिकारी को पानी ना पिलाने पर मामला दर्ज

पंजाब केसरी की ख़बर के मुताबिक उत्तर प्रदेश के कौशांबी ज़िले में एक अधिकारी को दलित होने के कारण पानी ना पिलाने के मामले में छह लोगों पर मामला दर्ज हुआ है.

पशु विभाग की पीड़ित अधिकारी डॉक्टर सीमा ने बताया कि 31 जुलाई को विकास कार्यों की समीक्षा के लिए अंबावा पूरब गांव गईं थीं.

उन्होंने वहां मौजूद पदाधिकारियों से पानी मांगा तो उन्हें पानी देने से इनकार कर दिया. जब उन्होंने ग्रामीणों से पानी मांगा तो पदाधिकारियों ने इशारे से उन्हें भी मना कर दिया.

डॉक्टर सीमा ने इस मामले में डीएम से शिकायत की कि उनके दलित होने के कारण ऐसा बर्ताव किया गया.

इस मामले में तीन ग्राम प्रधान, एक ग्राम पंचायत अधिकारी, पंचायत सदस्य और एक कोटेदार पर मामला दर्ज हुआ है.

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किकी चैलेंज में मृत बताया गया युवक तो ज़िंदा है

दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक किकी चैलेंज के ख़िलाफ़ चेतावनी देने के लिए जयपुर पुलिस ने जिस युवक के मृत बताया था, वो ज़िंदा निकला.

जयपुर पुलिस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक युवक को मृत बताकर उसकी तस्वीर पोस्ट की थी. जवाहर नाम का ये युवक कोच्चि का रहने वाला है.

युवक के परिजनों ने जयपुर पुलिस को भी इस बारे में अवगत करवाया है.

जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल का कहना है कि ये सच है कि युवक ज़िंदा है लेकिन पुलिस की सोशल मीडिया टीम ने ये फ़ोटो एक वेबसाइट से ख़रीदा है और ये पूरी तरह वैध है.

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ओबीसी कमीशन पर लोकसभा में बिल पास

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का विधेयक गुरुवार को लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित हो गया.

कुछ आरोप-प्रत्यारोप के साथ सभी दलों ने माना कि आयोग को संवैधानिक दर्ज़ा देने की ज़रूरत है ताकि पिछड़े वर्गो का विकास हो सके.

एक दिन पहले ही एससी/एसटी कानून को लेकर भी कैबिनेट ने विधेयक पारित किया गया है जिसमें इस क़ानून के प्रावधानों को ज्यों का त्यों रखने की बात है.

इन दोनों विधेयकों को भाजपा सरकार को आने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है.

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