मुज़फ़्फ़रपुर कांड: 'तीन महीने बाद शर्मसार हुए नीतीश कुमार'

  • 4 अगस्त 2018
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लगातार ख़बरों में बने हुए मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह यौन-शोषण केस पर शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई.

उन्होंने पटना के अधिवेशन भवन में एक सरकारी कार्यक्रम में कहा, ''मुज़फ़्फ़रपुर में ऐसी घटना घट गई कि हम लोग शर्मसार हैं. इतनी तकलीफ़ है. हम लोग अब आत्मग्लानि के शिकार हो गए हैं.''

नीतीश कुमार ने ये बात शुक्रवार को समाज कल्याण विभाग के एक कार्यक्रम में भाषण के अंत में कही. इसी कार्यक्रम में उन्होंने 'मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना' की शुरुआत की.

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ग़ौरतलब है कि इसी विभाग की ओर से मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह का संचालन भी एक एनजीओ कर रहा था.

कार्यक्रम में नीतीश ने कहा, ''जानकारी मिल गई है तो कार्रवाई हो रही है. सीबीबाई जाँच कर रही है. हम लोग चाहेंगे कि हाई कोर्ट इसकी निगरानी करे. उप-मुख्यमंत्री (सुशील कुमार मोदी) ने इसकी घोषणा बिहार विधानमंडल में कर दी है ताकि कोई भी दोषी बचे नहीं.''

इतना ही नहीं नीतीश ने इस यौन शोषण मामले को पाप करार दिया है. उन्होंने कहा कि ऐसा सिस्टम बनाने की ज़रूरत है कि ऐसी घटनाएँ न हों.

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तेजस्वी ने दी थी चुनौती

दिलचस्प बात ये भी है कि नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की दो दिन पुरानी चुनौती के बाद आई है.

एक अगस्त की रात तेजस्वी ने अपने ट्वीट में लिखा था, ''मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुज़फ़्फ़रपुर बलात्कार कांड पर मुँह खुलवाकर रहूँगा. उनकी आपराधिक चुप्पी तुड़वा कर रहूँगा. उनकी कुंभकर्णी अंतरात्मा को जगाकर रहूँगा. उनकी फ़र्जी नैतिकता उजागर करके रहूँगा. उनका बनावटी मुखौटा उतारकर रहूँगा. चाहे जितना समय लगे.''

बालिका गृह यौन-शोषण केस पर बीबीसी विशेष:

इसके बाद तेजस्वी ने नीतीश कुमार के नाम एक खुला ख़त भी लिखा था.

लेकिन ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया तेजस्वी को संतुष्ट नहीं कर पाई. उन्होंने शुक्रवार को फिर से नीतीश कुमार से इस्तीफ़ा माँग लिया.

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मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बाद अपने ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा, ''नीतीश कुमार मेरे इतना ललकारने के बाद आप मुज़फ़्फ़रपुर की घटना पर कुटिल मुस्कान के साथ ऐसे खेद प्रकट कर रहे थे, मानो तीन महीने बाद इस घटना पर बोलने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ी है. आपकी नैतिकता और अंतरात्मा कहाँ गोते खा रही है. इस्तीफ़ा कब दें रहे हैं?''

आपके छद्म व्यक्तित्व से अब हर देशवासी परिचित हो गया है. अपनी अंतरात्मा से पूछिए, क्या उसे ब्रजेश के कृत्यों की जानकारी नहीं थी?

दूसरी ओर तेजस्वी शनिवार को इस मुद्दे पर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देंगे.

तेजस्वी के मुताबिक़, बाकी दलों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इस धरने में शामिल होंगे.

Image caption इस मामले के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर को बिहार सरकार से बालिका गृह के संचालन के लिए सालाना एक करोड़ रुपये की रक़म मिलती थी

क्या है पूरा मामला?

बिहार में समाज कल्याण विभाग की ओर से चलाए जा रहे एक बालिका गृह में कुछ नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण का संगीन मामला सामने आया था.

मुज़फ्फ़रपुर स्थित इस बालिका गृह के संचालन की ज़िम्मेदारी विभाग ने एक एनजीओ 'सेवा संकल्प और विकास समिति' को दे रखी थी.

इस मामले में इस समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

इस बालिका गृह में 44 लड़कियाँ रहती थीं. यौन शोषण की बात सामने आने के बाद उन्हें पटना, मोकामा और मधुबनी स्थित केंद्रों पर भेज दिया गया है.

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Image caption बालिका गृह में महिला आयोग की टीम

जुलाई, 2018 की शुरुआत में ये मामला तब सामने आया था जब ख़ुद समाज कल्याण विभाग की ओर से ये बताया गया कि मुज़फ्फ़रपुर सहित तीन केंद्रों में यौन शोषण और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर मामले सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है.

दरअसल, समाज कल्याण विभाग बालिका गृह, अल्पावास गृह और बाल गृह जैसे संस्थानों का संचालन करता है.

विभाग ने मुंबई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ (टिस) की एक इकाई 'कोशिश' को इस साल फ़रवरी में ऐसे ही 110 केंद्रों के सोशल ऑडिट की ज़िम्मेदारी सौंपी थी. इसी जाँच से ये मामला सामने आया.

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