तेलंगाना: हार्मोन देकर जवान की जा रहीं थीं बच्चियां

  • 4 अगस्त 2018

तेलंगाना के यदागिरी गुट्टा कस्बे में पुलिस ने एक सेक्स रैकेट का पर्दाफ़ाश किया और 11 नाबालिग बच्चों को वेश्यालय से निकाला. ऐसा कहा जा रहा है कि छोटी बच्चियों को हॉर्मोन इंजेक्शन दिए जाते थे ताकि वो जल्दी बड़ी हो जाएं और फिर उनका वेश्यावृति के लिए इस्तेमाल किया जा सके.

बीबीसी संवाददाता बाला सतीश यदागिरी गुट्टा पहुंचे और पुलिस से पूरा मामला जानने की कोशिश की.

एफ़आईआर के मुताबिक एक स्थानीय निवासी ने एक महिला को एक बच्ची को बुरी तरह पीटते हुए देखने के बाद पुलिस से शिकायत की थी. उसे महिला और बच्ची के रिश्ते को लेकर शक़ था. जब पुलिस ने महिला को हिरासत में लिया तो महिला ने बताया कि और भी बच्चे दूसरे लोगों के चंगुल में फंसे हुए हैं.

महिला के बयान के बाद पुलिस ने छापे मारने शुरू किए और 11 लड़कियों को वेश्यालय से निकाला. चार और बच्चियों को तेलंगाना के भुवनगरी ने बचाया गया.

इन 15 लड़कियों में से सिर्फ़ एक लड़की 14 साल की है और बाकी सभी लड़कियों की उम्र 10 साल से कम है. पुलिस ने बताया कि इस मामले में गिरफ़्तार 15 लोगों में से 12 महिलाएं हैं. दो महिलाएं और एक आदमी अभी फ़रार हैं.

पुलिस ने बीबीसी को बताया कि बचाए गए बच्चों को हैदराबाद के एक शेल्टर होम भेज दिया गया है. पुलिस ने इन अभियुक्तों पर 366 A, 371(1)(v), 376, 372, 373 और 120(b) धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है.

एफ़आईआर के मुताबिक अभियुक्तों ने ये माना है कि लड़कियों को हॉर्मोन के इंजेक्शन दिए जाते थे.

पुलिस ने नरसिम्हम नाम के डॉक्टर को भी हिरासत में लिया है जो इन लड़कियों के इंजेक्शन लगाता था. पुलिस ने उसके क्लिनिक से ऑक्सीटोसीन इंजेक्शन भी बरामद किए हैं. ये इंजेक्शन गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के वक़्त लगाए जाते हैं. पुलिस ने बताया है कि इन इंजेक्शनों की कीमत 25 हज़ार रूपए है.

बीबीसी से बात करते हुए यदागिरी के एसीपी श्रीनिवासचरयुलु ने कहा, "ये बच्चियां तेलुगु भाषा बोल रही हैं, हम अभी ये पुष्टि नहीं कर पाए हैं कि इन बच्चियों का अपहरण किया गया था या इन्हें ख़रीद कर लाया गया था."

"जिस समय इन बच्चियों को लाया गया वो 6-7 साल की थीं और अब इनके परिजनों की पहचान करना मुश्किल हो गया है. शुरुआती जांच में पता चला है कि इन बच्चियों को ग़रीब परिवारों से 1-2 लाख रुपए में ख़रीदा भी गया हो सकता है. यहां कुछ यतीम बच्चियों को भी रखा गया है जिन्हें बाद में वेश्यावृत्ति में धकेला जाना था."

पुलिस के मुताबिक इस क्षेत्र में पहले भी कई छापे मारे जा चुके हैं और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया था.

एसीपी ने कहा, "हम इस पेशे में शामिल लोगों को रोज़गार के मौके भी देना चाहते हैं लेकिन ये लोग ये धंधा छोड़कर काम करना नहीं चाहते हैं. हमने इनके घर तक ज़ब्त किए हैं."

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कैसे रोका जा सकता है ये देह व्यापार?

पुलिस का कहना है कि सरकार के अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय से इस व्यापार पर नज़र रखी जा सकती है और इसे रोका जा सकता है.

राचाकोंडा के पुलिस कमिश्नर महेश भागवत ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि इस धंधे में शामिल लोग ऐश भरी ज़िंदगी जीने के आदी हो जाते हैं और वो इससे बाहर नहीं निकलना चाहते हैं.

महेश भागवत के मुताबिक सरकार के कई विभागों और ग़ैर सरकारी संगठनों के बीच समन्वय से पीड़ितों की मदद की जाती है और उन्हें बचाया जा सकता है.

राज्य सरकारें सेक्स व्यापार की पीड़ित बच्चियों के लिए कई तरह की योजनाएं भी चलाती हैं.

महेश भागवत कहते हैं कि कई पीड़ितों को प्रशिक्षण और नौकरियां दी गईं. उन्हें काम शुरू करने के लिए क़र्ज़ दिलवाए गए. वो दावा करते हैं कि पुलिस ने दो साल तक इस धंधे को बहुत हद तक रोक दिया था लेकिन पूरी तरह से ख़त्म नहीं किया जा सका था.

उन्होंने ये भी कहा कि ये पहली बार है कि वेश्यालयों से इस तरह बच्चियों को छुड़ाया गया है.

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वो कहते हैं, "ऐसे कई समुदाय हैं जो इस धंधे में लंबे समय से संलिप्त रहे हैं. पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करके जेल भेजती है और वो ज़मानत पर छूटकर फिर यही काम शुरू कर देते हैं."

वो कहते हैं कि इंटरनेट और तकनीक का असर इस धंधे पर भी हुआ है और अब पारंपरिक वेश्यालय कम हो रहे हैं और मांग पर लड़कियां मुहैया कराई जा रही हैं.

उन्होंने ये भी कहा कितनी लड़कियों को अपहरण करके इस धंधे में धकेला गया इसका सटीक डाटा नहीं है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरौ (एनसीआरबी) के मुताबिक भारत में साल 2016 में मानव तस्करी के कुल 8,132 मामले दर्ज़ किए गए थे. मानव तस्करी की 23,000 पीड़ितों में आधी की उम्र 18 साल से कम है.

एनसीआरबी के डाटा के मुताबिक 2014 से 2018 के बीच तेलंगाना राज्य में मानव तस्करी के कुल 1,397 मामले दर्ज किए गए थे. इनमें कुल 1,413 लोगों को गिरफ़्तार किया गया और 2,184 पीड़ितों को रिहा कराया गया. इनमें से 231 नाबालिग हैं जिनमें 10 लड़के और बाक़ी लड़कियां हैं.

यदागिरि गुट्टा से बचाई गई लड़कियों की पहचान के लिए पुलिस अब अपहरण किए गए बच्चों के डाटाबेस की मदद ले रही है.

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