प्रेस रिव्यू : प्रमोशन में आरक्षण के समर्थन में केंद्र सरकार

  • 4 अगस्त 2018
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जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक़ शुक्रवार को प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर शुरू हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखा कि एससी-एसटी वर्ग हज़ार साल से उत्पीड़न झेल रहा है. उनके पिछड़ेपन के अलग से आंकड़े जुटाने की ज़रूरत नहीं है.

केंद्र की तरफ़ से एटार्नी जनरल वेणुगोपाल ने ये जवाब दिया जब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि अगर आंकड़े नहीं होंगे तो सरकार ये कैसे पता करेगी कि एससी-एसटी वर्ग का नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है कि नहीं.

वेणुगोपाल ने ये भी कहा कि राज्य में एससी-एसटी की जनसंख्या के आधार पर आरक्षण तय होता है जिसके मुताबिक पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए एससी-एसटी को कुल साढ़े 22 फ़ीसदी आरक्षण मिलना चाहिए.

दरअसल, ये सुनवाई 2006 के एम नागराज के फ़ैसले पर पुनर्विचार को लेकर शुरू हुई है.

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एनआरसी ड्राफ्ट में पूर्व मुख्यमंत्री का भी नाम नहीं

नवभारत टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) के फाइनल ड्राफ्ट में असम की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री रहीं सैयदा अनवरा तैमूर का नाम भी नहीं हैं.

अभी ऑस्ट्रेलिया में रह रही हैं अनवरा तैमूर इस रजिस्टर में अपने और अपने परिवार का नाम दर्ज कराने के लिए वापस भारत आने वाली हैं.

अनवरा तैमूर ने कहा कि उन्होंने अपने एक रिश्तेदार को एनआरसी में उनके परिवार को शामिल करने के लिए आवेदन जमा करने को कहा था लेकिन यह किसी कारण से हो नहीं सका.

इस मामले पर एनआरसी अधिकारियों का कहना है कि उनके पास पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों का डेटा मौजूद नहीं है, जिसके कारण यह पता लगाना संभव नहीं है कि उनके परिवार के सदस्यों ने एनआरसी ड्राफ्ट में नाम शामिल करने के लिए आवेदन किया था या नहीं.

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ईसाई धर्म अपनाने पर 12 परिवारों का बहिष्कार

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ मुरादाबाद में एक पंचायत ने 12 परिवारों का ईसाई धर्म अपनाने की वजह से बहिष्कार कर दिया.

दो दिन पहले ही नवाबपुरा इलाक़े के सैनी समुदाय ने फ़ैसला सुनाया था कि इन परिवारों से संबंध रखने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा.

इन परिवारों का कहना है कि वे बीमारी की वजह से चर्च की मदद ले रहे थे और उन्होंने कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया है.

पुलिस जांच में भी ये बात सामने आई है कि धर्म परिवर्तन नहीं हुआ और ग़लतफ़हमी की वजह से पंचायत ने ये फ़रमान सुना दिया.

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मेहुल चौकसी को एंटीगुआ की नागरिकता भारत की सहमति से

दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक़ एंटीगुआ सरकार ने कहा है कि हीरा कारोबारी मेहुल चौकसी को नागरिकता देने के लिए भारत की पुलिस ने क्लीयरेंस सर्टिफ़िकेट दिया था.

इसके अलावा विदेश मंत्रालय के मुंबई स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट ऑफ़िस ने भी मंजूरी दी थी और चौकसी के ख़िलाफ़ ऐसी कोई भी सूचना नहीं दी गई थी जो उसे वीजा या नागरिकता देने के ख़िलाफ़ हो.

13,500 करोड़ के पीएनबी घोटाले में आरोपी चौकसी ने मई 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता हासिल करने के लिए अर्जी दी थी.

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