नीतीश कुमार बच्चियों को बदल भी सकते हैं: तेजस्वी यादव

  • 5 अगस्त 2018
जंतर-मंतर से विपक्ष की हुंकार इमेज कॉपीरइट INC @Twitter

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव की अपील पर शनिवार की शाम को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई नेता धरना प्रदर्शन में शामिल हुए.

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह में हुए यौन-शोषण के मामले को लेकर इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, लोकतांत्रिक जनता दल के प्रमुख शरद यादव, वामपंथी नेता सीताराम येचुरी और डी राजा समेत कई अन्य नेता इसमें शामिल होने के लिए जंतर-मंतर पहुँचे.

जंतर-मंतर में विरोध प्रदर्शन के बाद नेताओं ने लोगों से एक मिनट का मौन रखने की अपील की.

राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने 'भारत की बेटियों को बचाने के लिए जंतर-मंतर आकर' विरोध जताने की अपील की थी.

हालांकि, इस मंच पर विपक्षी नेताओं के एकजुट होने को 2019 चुनावों से पहले की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.

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'मुख्य अभियुक्त का नाम एफ़आईआर में क्यों नहीं?'

जंतर-मंतर के मंच से तेजस्वी यादव ने कहा, "जो दरिंदगी हम लोगों ने देखी है, उसे देख कर हमारा खून खौलता है. हम चाहते हैं कि गुनाहगारों को सज़ा मिले और भविष्य में ऐसा ना हो इसकी ज़िम्मेदारी होनी चाहिए."

उन्होंने कहा, "इतने लोगों का यहां आना ये बताता है कि कोई कितना भी ताक़तवर हो या दोषी हो उसे जेल भेजने का और फांसी पर चढ़ाने का काम करेंगे."

वो बोले, "सरकार की नाक के नीचे सारा काम होता होता रहा, और सरकार उन्हें फंडिंग देती रही क्योंकि वो सरकार के करीबी लोगों में से एक थे. मेरी सात बहनें हैं, उनके बेटियां हैं- हमारे रिश्तेदारों के लिए तो हम हैं लेकिन उन बेसहारा बच्चियों (बालिका गृह) के लिए कोई नहीं था. हम आवाज़ उठाते हैं तो कहा जाता है यह राजनीति से प्रेरित है लेकिन ऐसा नहीं है."

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "हमारे चाचा की अन्तर्रात्मा नहीं जागी. आपने चुप्पी तोड़ी और कहा कि आपको दुख हुआ, लेकिन मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर का नाम एफ़आईआर में क्यों नहीं है. ब्रजेश ठाकुर को अब तक रिमांड पर भी नहीं लिया गया है."

'बदली जा सकती हैं बच्चियाँ'

तेजस्वी यादव ने कहा "सरकार का खुद का दिशा-निर्देश है कि ऐसे इलाकों में शेल्टर होम नहीं होने चाहिए, लेकिन सरकारी अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया."

उन्होंने आरोप लगाया, "जो बच्ची सबसे ज़्यादा जानती थी, उसे मुज़फ़्फ़रपुर से ट्रांसफर कर दिया गया. उसका कुछ पता नहीं है. नीतीश जी बताएं कि जो बच्ची सब कुछ जानती थी, वो कहाँ है. बच्चियों का चेहरा किसी ने देखा नहीं. हो सकता है कि बच्चियां बदल दी जाएं ताकि केस कमज़ोर हो जाए."

उन्होंने मांग की कि बच्चियों के दिल्ली लाकर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और इसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट करे.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, "हम यहां दुख में आए हैं. मगर हम सिर्फ़ उन चालीस बच्चियों के लिए यहां नहीं आए हैं जिन पर आक्रमण हुआ, हम देश ही हर महिला के लिए यहां आए हैं."

"आज हर उस व्यक्ति (दलित, महिला, अल्पसंख्यक) पर हमला हो रहा है जो कमज़ोर है. हम सभी के साथ हैं."

राहुल गांधी ने कहा कि "अगर नीतीश कुमार वाकई इस पूरे मामले पर शर्मिंदा हैं तो उन्हें तुरंत हरकत में आना चाहिए था. जो लोग ज़िम्मेदार हैं उन्हें सज़ा देनी चाहिए."

बालिका गृह में क्या हुआ था?

बिहार के मुज़फ्फ़रपुर में समाज कल्याण विभाग की ओर से चलाए जा रहे एक बालिका गृह में नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया था.

बालिका गृह के संचालन की ज़िम्मेदारी विभाग ने एक एनजीओ सेवा संकल्प और विकास समिति को दे रखी थी.

इस मामले में अब तक सेवा संकल्प और विकास समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

इस बालिका गृह में 44 लड़कियां रहती थीं. बताया जा रहा है कि यौन शोषण की बात सामने आने के बाद उन्हें पटना, मोकामा और मधुबनी स्थित केंद्रों पर भेज दिया गया है.

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Image caption बालिका गृह में महिला आयोग की टीम

इसी साल जून में यह मामला तब सामने आया था जब ख़ुद समाज कल्याण विभाग द्वारा यह बताया गया कि मुज़फ्फ़रपुर सहित तीन केंद्रों में यौन शोषण और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर मामले सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है.

विभाग ने मुंबई स्थित टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़ (टिस) की एक इकाई 'कोशिश' को इस साल फ़रवरी में ऐसे ही 110 केंद्रों के सोशल ऑडिट की ज़िम्मेदारी सौंपी थी. इसी जांच से यह मामला सामने आया.

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