मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह रेप: रस्म अदायगी से कितनी अलग थी बलात्कार पर विपक्ष की गोलबंदी

  • 5 अगस्त 2018
राहुल गांधी

मुज़फ़्फ़रपुर के बालिका गृह में बच्चियों से बलात्कार की घटना के ख़िलाफ शनिवार को जंतर मंतर पर ग़ैर-भाजपाई दलों के नेता मंचासीन थे.

और एक पत्रकार बिना पूछे मुझे यह बतला रहा था कि इस दृश्य को 'सामूहिक विपक्ष' का शक्ति प्रदर्शन लिखना क्यों सही नहीं है.

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बुलाए इस प्रदर्शन में ग़ैर-भाजपाई दलों के नेता एक मंच पर दिखे, नीतीश कुमार से इस्तीफ़े की मांग की, कुछ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए, लेकिन 2019 के चुनावों का ज़िक्र करने का जोख़िम किसी ने नहीं लिया.

इस आयोजन की राजनीतिक प्रासंगिकता के संबंध में सबसे स्पष्ट बात अंत में राहुल गांधी ने ही कही, जब उन्होंने कहा कि अब स्पष्ट है कि एक तरफ़ भाजपा और संघ की सोच है और दूसरी तरफ़ हिंदुस्तान है.

टोपियां, बैनर और तख़्तियां

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के अलावा यहां दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, माकपा नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा, सपा सांसद तेज प्रताप यादव, नेशनल लोक दल के दुष्यंत चौटाला, टीएमसी के दिनेश त्रिवेदी, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हम पार्टी के जीतनराम मांझी इत्यादि पहुंचे थे.

मैं वहां पहुंचा तो तेजस्वी नहीं आए थे. मंच से राजद सांसद मनोज झा और दो-तीन नेता कार्यकर्ताओं से अपील कर रहे थे कि वे ठीक सामने और बाईं ओर की जगह ख़ाली कर दें, ताकि मीडिया को जगह मिल सके.

राजद के कार्यकर्ता हरी टोपी लगाए, हाथों में बलात्कार विरोधी संदेशों की तख़्तियां लिए हुए खड़े थे. कुछ उन तख़्तियों के साथ एक दूसरे की तस्वीरें भी ले रहे थे. महिलाओं की संख्या ज़ाहिरन बहुत कम थी.

अधेड़ उम्र का एक व्यक्ति फ़ोन पर किसी को इस बात के लिए मां की गाली दे रहा था कि उसने इससे पहले उसका फ़ोन क्यों नहीं उठाया. कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा कि बलात्कार क्यों होते हैं तो उसने कहा, 'सुशासन बाबू दुशासन बाबू बन जाएंगे तो बलात्कार ही ना होगा.'

एक आदमी जो किसी कार्यकर्ता से 'नीतीश इस्तीफ़ा दो' की तख़्ती उधार मांगकर लाया था, उसने मुझे ही फ़ोन पकड़ाकर कहा कि मैं तख़्ती के साथ उसकी फोटो खींच लूं. तस्वीर खिंचवाकर उसने तख़्ती कार्यकर्ताओं के समूह को लौटा दी.

बालिका गृह रेप कांड: सरकार ब्रजेश ठाकुर को हर साल देती थी एक करोड़

ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार में बच्चियों का घरौंदा किसने बनाया शोषण का केंद्र

'पुरुष साथियों का धन्यवाद'

लेकिन जब तेजस्वी यादव मंच पर आ गए और नेताओं के भाषणों का सिलसिला शुरू हो गया तो बाक़ी गतिविधियां शांत हो गईं.

ज़्यादातर नेताओं ने मंच से जो कहा, उसका सार यह था कि ब्रजेश ठाकुर को राजनीतिक संरक्षण की बात सामने आने के बाद और प्रदेश सरकार में मंत्री मंजू वर्मा के पति का नाम इस मामले से जुड़ने के बाद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बने रहने का हक़ नहीं है.

जेएनयू की छात्र राजनीति से उभरे दो वक्ताओं को ख़ूब तालियां मिलीं. शहला राशिद और कन्हैया कुमार.

शहला राशिद ने अपने भाषण में कहा, "हमारे पुरुष साथी एक महिला मुद्दे पर हमारे साथ खड़े हैं, ये बहुत बड़ी बात है. तेजस्वी भाई को मैं मुबारकबाद देना चाहती हूं. कभी-कभी ही ऐसा होता है कि महिलाओं का मुद्दा मुख्य मुद्दा बनकर सामने आता है."

कन्हैया ने कहा, "आप देखेंगे कि इस तरह के कार्यक्रम में मंच पर जगह कम पड़ जाती है, लेकिन ज़रूरत इस बात की है इस देश की सड़कों पर जगह कम पड़ जानी चाहिए, इस जघन्य अपराध के ख़िलाफ, इस बलात्कार के ख़िलाफ़."

इमेज कॉपीरइट @AmritaDhawan1

सब नेता अलग-अलग समय पर यहां पहुंचे, कुछ अंत तक रहे और कुछ अपना भाषण देकर निकल गए. छोटू छलिया नाम के एक गायक ने बच्चियों से बलात्कार की इस घटना पर एक मार्मिक गीत मंच से गाया, जिसके बोल थे, "कुंहकत हई हमरी भारत मां के छतिया, लुटाई गई ना. हमार सोना जा बिटिया लुटाई गइल ना."

भावुकता के माहौल में बलात्कार के लिए 'लुटना' के इस्तेमाल पर किसी ने उन्हें नहीं टोका.

उस मंच पर मुझे चार महिलाएं दिखीं, शहला राशिद, कांति सिंह, रंजीता रंजन और मीसा भारती. पुरुषों की संख्या कम से कम 50 रही होगी.

नीतीश कुमार बच्चियों को बदल भी सकते हैं: तेजस्वी

मुज़फ़्फ़रपुर कांड: 'तीन महीने बाद शर्मसार हुए नीतीश कुमार'

हाथों में हथकड़ी, चेहरे पर हँसी, इतनी हिम्मत आती कहाँ से है?

'तस्वीरें लेने आए हो?'

जब बड़े नेता आते तो उनकी तस्वीरों के लिए कार्यकर्ताओं के फोन चमकने लगते. मंच संभाल रहे मनोज झा ने कई बार कहा, "आज तस्वीरें लेने का समय नहीं है. नेताओं की तस्वीरें लेने के बहुत मौक़े आएंगे. आज कोई झंडा आगे मत लाइए. बैनर की ज़रूरत भी नहीं है. हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि लोग अपनी पार्टी के ज़िंदाबाद का नारा न लगाएं. यह सब करने से पहले आप उन बच्चियों के बारे में सोचिएगा, जिनके लिए आप यहां आए हैं."

मनोज झा ने यह कहा तो भीड़ में मेरे आगे खड़ा पीली कमीज़ वाला एक वाचाल लड़का तस्वीरें लेते कार्यकर्ताओं पर बरस पड़ा, "फ़ोन नीचे रखो यार. यहां फ़ोटो लेने आए हो?"

तीन महीने में फांसी हो: केजरीवाल

आम आदमी पार्टी की ओर से यहां अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और सोमनाथ भारती मंच पर पहुंचे. भीड़ में कार्यकर्ताओं के साथ आप नेता दिलीप पांडे भी मिले पर आधिकारिक तौर पर उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया.

जब केजरीवाल पहुंचे तो तेजस्वी यादव ने खड़े होकर उनका स्वागत किया. केजरीवाल ने अपने भाषण की शुरुआत 'हम बहुत दुख की घड़ी में यहां इकट्ठा हुए हैं' से की और फिर यह मांग की कि तीन महीने के अंदर इस मामले के अभियुक्तों को फांसी होनी चाहिए, चाहे किसी भी पार्टी के कितने भी बड़े नेता इसमें शामिल क्यों न हों.

पीली कमीज़ वाले लड़के ने फिर उद्घोष किया, "भारत माता की...जय."

विपक्षी एकता?

शाम 7.20 के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहां पहुंचे और सब नेताओं ने खड़े होकर उनका स्वागत किया. राहुल ने एक तरफ़ शरद यादव और दूसरी तरफ़ डी राजा का हाथ पकड़कर ऊपर उठा लिया तो बाक़ी नेताओं ने भी एक-दूसरे का हाथ पकड़ ऊपर उठाने की एक श्रृंखला बना ली.

फिर भारतीय राजनीति का वह चिर परिचित दृश्य बन गया जिसका अर्थ हाल के दिनों में 'हम साथ साथ हैं' समझा गया है.

राहुल जब मंच पर आए तो केजरीवाल जा चुके थे और उनके जाने के साथ ही आम आदमी पार्टी के आठ-दस कार्यकर्ता भी मेरे सामने ही वहां से निकल गए.

मनोज झा ने पहले राहुल गांधी को बोलने के लिए बुला लिया, जबकि तेजस्वी का भाषण अभी नहीं हुआ था. तेजस्वी ने मंच से ही उनसे कहा कि वह पहले बोलना चाहते हैं और फिर वह खड़े हो गए.

यह कोई छिपी बात नहीं है कि मंचों पर सबसे बड़ा नेता, सबसे बाद में बोलता है. तेजस्वी ने अपने आयोजन में स्वयं का क़द राहुल से 'छोटा' रखना तय किया.

'ब्रजेश ठाकुर आपकी पार्टी में हैं या नहीं?'

तेजस्वी ने कहा, "बिहार में अब जंगलराज नहीं, राक्षसराज है. दुर्योधन रोज़ द्रौपदी का चीरहरण कर रहा है. रावण सीता का अपहरण कर रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ये सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है. नीतीश जी हम आपसे पूछना चाहते हैं कि क्या 2013 में ब्रजेश ठाकुर आपकी पार्टी जॉइन किया था या नहीं? वो अब भी आपकी पार्टी में है या नहीं है? क्या 2014 के लोकसभा चुनाव में ब्रजेश ठाकुर ने आपका मंच संचालित किया था या नहीं? क्या ब्रजेश ठाकुर के घर आप खाने पर गए थे या नहीं? "

तेजस्वी ने कहा, "हम उनके इस्तीफ़े की मांग नहीं करेंगे, हम यह जनता पर छोड़ते हैं कि ऐसी निकम्मी सरकार जो दरिंदो को संरक्षण दे रही है, क्या आप ऐसा मुख्यमंत्री चाहते हैं जो बिहार को बर्बाद कर दे? "

पीली कमीज़ वाला लड़का दोनों हाथ ऊपर उठाकर चिल्लाया, "नय चाहिए. नय चाहिए."

इस भीड़ में सबसे पीछे एक बड़ा बैनर और कुछ तख़्तियां लेकर सफेद टोपी लगाए कुछ लोग खड़े थे. ये जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के कार्यकर्ता थे.

मैंने उनसे पूछा कि आप लोग नीतीश कुमार का इस्तीफ़ा चाहते हैं तो प्रदर्शन दिल्ली में क्यों, बिहार में उनके दफ़्तर के आगे क्यों नहीं करते?

हाजीपुर, वैशाली से आए प्रेमकिशोर सिंह ने कहा, "बिहार में बहुत सारे प्रदर्शन हो रहे हैं. लेकिन वहां तक मीडिया नहीं पहुंच रहा है. दिल्ली सरकार उनके साथ बैठी हुई है, वो इस पर कुछ बोल नहीं रही है."

मैंने राजद कार्यकर्ताओं के एक समूह से कहा कि आप लोग असर चाहते हैं तो कुछ समय दिल्ली में ही रुककर रोज़ प्रदर्शन क्यों नहीं करते. जवाब मिला कि हमारे नेता ने आज का ही दिन तय किया है. बिहार में भी माहौल बनाना है.

'एक तरफ़ वो, एक तरफ़ हम'

राहुल ने इस मंच पर कहा, "वह देश की हर महिला के पक्ष में खड़े हैं और एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे. नीतीश जी को तुरंत दोषियों को कार्रवाई करनी चाहिए, अगर उन्हें सचमुच में शर्म आ रही है तो एक्शन लेकर दिखाएं. "

फिर उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया के लोग सच्चाई दिखाना चाहते हैं, सभी लोग 'बीजेपी माइंडेड' नहीं हैं, लेकिन उन्हें उनका काम नहीं करने दिया जा रहा और उनकी नौकरियां छीन ली जा रही हैं.

अंत में राहुल ने इस आयोजन को उपसंहार मुहैया कराते हुए कहा, "एक तरफ बीजेपी-आरएसएस की सोच, दूसरी तरफ़ पूरा हिंदुस्तान. यह सच्चाई आने वाले समय में प्रधानमंत्री जी और पूरे हिंदुस्तान को दिखाई देगी. हिंदुस्तान कह रहा है कि जो बीते चार सालों में हुआ, वह हमें अच्छा नहीं लगा. जब हिंदुस्तान अपना मन बना लेता है तो उसके सामने कोई खड़ा नहीं हो सकता है."

इसके बाद राहुल गांधी की अपील पर सभी ने एक मिनट का मौन रखा और मंच पर मोमबत्तियां जला ली गईं. शरद यादव राहुल को माइक से दोबारा मंच के बीचोंबीच ले आए और सब नेताओं ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर मौन रखा.

पीली कमीज़ वाले लड़के ने बगल वाले के कंधे पर हाथ रखकर कहा, "अब ये सरकार नहीं बचेगी."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)