मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह मामला: क्या रसूखवालों को बचा रही है सरकार?

  • 5 अगस्त 2018
मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह

बिहार में मुज़फ़्फ़रपुर के एक बालिका गृह में 34 बच्चियों के साथ यौन शोषण के मामले में शनिवार शाम 21 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया और दो के निलंबन के लिए सिफ़ारिश की गई है.

समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद ने निलंबन की पुष्टि की. उन्होंने बीबीसी से कहा कि यह शुरुआती कार्रवाई है और आने वाले वक़्त में ऐसे और क़दम उठाए जा सकते हैं.

निलंबित होने वालों में बाल संरक्षण विभाग के 6 सहायक निदेशक और अन्य जूनियर अधिकारी शामिल हैं. इनमें बाल संरक्षण यूनिट मुज़फ़्फ़रपुर के सहायक निदेशक देवेश कुमार शर्मा भी हैं.

देवेश कुमार शर्मा ने ही टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (टिस) के सोशल ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद के बाद 31 मई को एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

देवेश शर्मा के निलंबन आदेश में कहा गया है कि टिस की रिपोर्ट में बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार की बात आ चुकी थी फिर भी बालिका गृह के मालिक ब्रजेश ठाकुर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

"छोटी मछलियों को निशाना बनाया जा रहा है"

इसके साथ ही यह बात भी कही गई है देवेश शर्मा बालिका गृह की निगरानी करने भी जाते थे, लेकिन उन्होंने यह बात कभी नहीं बताई कि बच्चियों के साथ कुछ ग़लत हो रहा है.

हालांकि इन आरोपों के बारे में देवेश शर्मा का कहना है कि उनके पास जब टिस की रिपोर्ट तो उन्होंने तत्काल एफ़आईआर दर्ज की. शर्मा का कहना है कि उनके पास टिस की रिपोर्ट 29 मई को आई थी और 31 मई को एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

निरीक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी बालिका गृह में क्यों नहीं मिली? इस पर देवेश शर्मा का कहना है कि बच्चियों ने उन्हें कुछ नहीं बताया था. शर्मा का कहना है कि उनके अलावा वहां महिला आयोग के अधिकारी भी जाते थे, लेकिन महिला आयोग ने भी इस मामले में पहले कुछ नहीं कहा था.

जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है उनमें से एक ने बीबीसी से कहा कि "छोटी मछलियों को निशाना बनाया जा रहा है."

टिस की रिपोर्ट को आधार बनाकर 31 मई को एफ़आईआर दर्ज की गई थी और उसी दिन मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प को पटना में एक नया टेंडर दिया गया था. टेंडर लेटर पर समाज कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार के हस्ताक्षर हैं.

समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद से बीबीसी ने पूछा कि क्या सरकार छोटे अधिकारियों को निशाने पर ले रही है या उनकी भी जवाबदेही बनती है जो फ़ैसले लेते हैं? आख़िर समाज कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है जिन्होंने एफ़आईआर दर्ज होने के बाद ब्रजेश ठाकुर को टेंडर दिया था?

अतुल प्रसाद ने कहा, "कार्रवाई अभी शुरू हुई है. प्रशासनिक स्तर पर जो लापरवाही हुई है उसकी जवाबदेही तय की जाएगी. ब्रजेश ठाकुर के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ होने के दिन नया टेंडर जो मिला था वो बल्क में मिला था. जैसे ही इसकी पता चला उसे रद्द कर दिया गया."

लेकिन टिस की रिपोर्ट तो सरकार को 15 मार्च को ही मिल गई थी? इस रिपोर्ट में साफ़ लिखा हुआ है कि ब्रजेश ठाकुर के घर में जो बालिका गृह चल रहा है उसमें बच्चियों का यौन शोषण किया जा रहा है. तो फिर टिस की रिपोर्ट आने के बाद भी टेंडर क्यों दिया गया?

इस सवाल पर अतुल प्रसाद का कहना है कि टिस की रिपोर्ट 15 मार्च को नहीं बल्कि औपचारिक रूप से विभाग के पास 27 मई को आई थी. हालांकि बीबीसी के पास मौजूद दस्तावेज़ के अनुसार टिस की रिपोर्ट में सौंपने की तारीख़ 15 मार्च ही लिखी हुई है.

"बालिका गृह के घर को डीएम ने चुना था"

जिन अधिकारियों को निलंबित किया गया है उनमें से एक का कहना है कि बालिका गृह की निगरानी करने के लिए महिला आयोग की सदस्य और जज भी वहां जाते थे और उनकी रिपोर्ट भी बालिका गृह के ख़िलाफ़ नहीं थी.

उनका कहना है कि अगर उन्हें निलंबित किया गया है तो इन लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?

एक अन्य निलंबित अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि ब्रजेश ठाकुर के पास बालिका गृह का टेंडर पिछले पांच सालों से था और उनके घर का चयन मुज़फ़्फ़रपुर के तत्कालीन डीएम धर्मेंद्र कुमार सिंह ने किया था.

उनका कहना है कि डीएम को पता था कि ब्रजेश ठाकुर का घर बालिका गृह के लिए सही नहीं है फिर भी टेंडर पास कर दिया गया. अधिकारी सवाल करते हैं कि अब तक धर्मेंद्र सिंह के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वो कहते हैं, "हमें बलि का बकरा बनाया जा रहा है."

इस सवाल के जवाब में अतुल प्रसाद का कहना है कि प्रशासनिक नाकामी की जांच अभी ख़त्म नहीं हुई है और आगे भी कार्रवाई होगी.

उधर देवेश शर्मा ने मौजूदा डीएम को चिट्ठी लिख कर कहा है कि उन्हें जान का ख़तरा है. शर्मा ने चिट्ठी में कहा है कि उन्होंने ही एफ़आईआर दर्ज कराई थी, इसलिए उन्हें कई लोग धमकियां दे रहे हैं.

अब तक इस मामले में कुल 10 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है और बाल समिति के पूर्व अध्यक्ष दिलीप वर्मा को पुलिस अब भी तलाश रही है.

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Image caption मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह रेप मामले को लेकर शनिवार शाम दिल्ली के जंतर-मंतर में विपक्षी पार्टियों ने विरोध प्रदर्शन किया

बालिका गृह में यौन शोषण को लेकर नीतीश कुमार ने भी चुप्पी तोड़ते हुए शुक्रवार को कहा था कि उन्हें शर्मिंदगी हो रही है.

शनिवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पर विपक्षी पार्टियों ने साझा प्रदर्शन भी किया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इस प्रदर्शन में शरीक हुए थे और उन्होंने कहा कि अगर नीतीश को वाक़ई शर्म आ रही है तो वो कड़े कदम उठा कर दिखाएं.

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