जस्टिस इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में, पहली बार तीन महिला जज

  • 7 अगस्त 2018
सुप्रीम कोर्ट

लंबे इंतज़ार के बाद मंगलवार को देश की सर्वोच्च अदालत में तीन नए जजों की एंट्री हो गई. जस्टिस केएम जोसेफ, जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस इंदिरा बनर्जी अब सुप्रीम कोर्ट का हिस्सा हैं.

जजों की नियुक्ति के दौरान लगभग लंबे समय तक जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति का मामला सुर्खियों में बना रहा लेकिन इनके बीच एक नाम और है जो भारतीय न्यायव्यवस्था के इतिहास में दर्ज हो गया. यह नाम है जस्टिस इंदिरा बनर्जी का.

देश के इतिहास में ये पहला मौक़ा है जब सुप्रीम कोर्ट में तीन-तीन महिला जज एक साथ हैं. जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी.

पिछले शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मद्रास हाई कोर्ट की चीफ़ जस्टिस इंदिरा बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई.

Image caption जस्टिस इंदिरा बनर्जी

जस्टिस इंदिरा बनर्जी का सफ़र

इंदिरा बनर्जी का जन्म 24 सितंबर 1957 को हुआ.

उनकी शुरुआती पढ़ाई कोलकाता के लोरेटो हाउस में हुई. उसके बाद उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसिडेंसी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. फिर कानून की पढ़ाई के लिए उन्होंने कोलकाता लॉ यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया.

5 जुलाई 1985 को इंदिरा वकील बनीं और कोलकाता में निचली अदालत और हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की. क्रिमिनल लॉ के अलावा उन्होंने दूसरे सभी तरह के केस लड़े हैं.

इसके बाद 5 फरवरी 2002 को इंदिरा कोलकाता हाईकोर्ट की स्थायी जज बन गईं.

फिर 2016 में वो दिल्ली हाई कोर्ट में आई और 5 अप्रैल 2017 को उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट की चीफ़ जस्टिस के तौर पर कार्यभार संभाला.

जस्टिस इंदिरा बनर्जी सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली आठवीं महिला हैं.

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सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल 4 साल और एक महीने का रहेगा.

मद्रास हाई कोर्ट की मुख्य न्यायधीश रहते हुए वो सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनायी गई इन-हाउस कमेटी की अध्यक्ष थी.

ये कमेटी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा ने ओडिशा हाई कोर्ट के एक जज के ख़िलाफ़ लगे आरोपों की जांच के लिए बनाई थी.

इसके अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन शुक्ला पर जब मेडिकल एडमिशन घोटाले के आरोप लगे थे, तो उसकी जांच कमेटी में भी इंदिरा बनर्जी ही थीं. वो कमेटी भी सुप्रीम कोर्ट ने ही बनाई थी.

दरअसल, देश के सभी हाई कोर्ट के जो चीफ़ जस्टिस मौजूद हैं उनमें वो दूसरी सबसे सीनियर चीफ़ जस्टिस थीं, जिसकी वजह से उन्हें ये पदोन्नति मिली है.

सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा जजों में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के हिसाब से देखें तो बंगाल का कोटा काफी समय से खाली था. इंदिरा बनर्जी के आने के बाद बंगाल का प्रतिनिधित्व मिल जाएगा.

Image caption जस्टिस इंदु मल्होत्रा

जस्टिस इंदु मल्होत्रा

इससे पहले, इसी साल अप्रैल में इंदु मल्होत्रा ने भी वरिष्ठ वकील से सुप्रीम कोर्ट के जज तक का सफ़र तय किया था.

सीधे बार काउंसिल से जज बनने वाली वो पहली महिला हैं.

वकील पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मी इंदु मल्होत्रा के पिता ओम प्रकाश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के वकील रह चुके हैं.

इंदु मल्होत्रा का जन्म 14 मार्च 1956 में बेंगलुरू में हुआ था.

दिल्ली में पली-बढ़ी, इंदू ने कार्मेल कॉन्वेंट स्कूल, दिल्ली से शुरुआती पढ़ाई की. इसके बाद स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए डीयू के लेडी श्रीराम कॉलेज में पॉलिटिकल साइंस में दाखिला लिया. वहां से निकलने के बाद, उन्होंने क़ानून की पढ़ाई की. वो पिछले 30 सालों से सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही थी. और अब वो वहीं जज बन गई हैं.

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Image caption जस्टिस आर भानुमति

जस्टिस आर भानुमति

वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में तीसरी महिला जस्टिस हैं आर भानुमति. 2014 में वो सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बनी थी. 20 जुलाई 1955 को इनका जन्म हुआ था. तमिलनाडु हाई कोर्ट में 2003 में बनी. फिर 2013 में झारखंड के चीफ़ जस्टिस के तौर पर पद्दोन्नति हुई.

उन्होंने " हैंडबुक ऑफ़ सिविल एंड क्रिमिनल कोर्ट्स मैनेजमेंट एंड यूज़ ऑफ़ कंप्यूटर्स" नाम की किताब भी लिखी है.

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पाकिस्तान का दृष्टिहीन जज

सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा बनर्जी और इंदु मल्होत्रा आज जिस जगह पर पहुंची हैं उस जगह पर पहुंचने वाली जस्टिस फातिमा बीवी पहली महिला थीं.

उनके बाद जस्टिस सुजाता मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, जस्टिस रंजना देसाई भी सुप्रीम कोर्ट में जज रह चुकी हैं.

वर्तमान में जस्टिस आर भानुमति और इंदु मल्होत्रा के साथ अब इंदिरा बनर्जी भी सुप्रीम कोर्ट में जज हो गई हैं.

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