ग्राउंड रिपोर्टः देहरादून के मॉडल ब्लाइंड स्कूल में 'यौन उत्पीड़न' के आरोप

  • वर्षा सिंह
  • देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
देहरादून का ब्लाइंड स्कूल

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मॉडल ब्लाइंड स्कूल का छात्राएं

"शिक्षक लड़कियों से क्लास में अश्लील बातें करते हैं, ग़लत तरीके से छूते हैं. उन्हें पीटने के बहाने उनके शरीर को छूते हैं."

ये कहते हुए उस मां की आवाज़ कांपने लगती है, जिनकी नेत्रहीन बच्ची देहरादून स्थित 'मॉडल स्कूल फ़ॉर द विज़ुअली हैंडीकैप्ड' में पढ़ती है.

नेत्रहीन बच्चों का ये आदर्श विद्यालय पिछले पांच-छह दिनों से विवादों में है. नेत्रहीन छात्र-छात्राएं 17 अगस्त से संस्थान के बाहर आंदोलन कर रहे हैं.

हालात यहां तक आ गए कि संस्थान की निदेशक अनुराधा डालमिया ने छात्र-छात्राओं के दबाव में सोमवार देर शाम इस्तीफ़ा दे दिया.

गुरुवार को भी दृष्टिहीन बच्चों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा. स्थिति संभलती न देख केंद्र से भी दो सदस्यीय जांच टीम देहरादून पहुंच गई है.

इस विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब यहां पढ़ने वाली छात्राओं ने संस्थान के ही एक शिक्षक पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए.

विकलांग अधिकार मंच से जुड़ीं एक महिला ने बताया कि लड़कियों ने प्रिंसिपल से इसकी शिकायत की, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया.

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क्या है पूरा मामला?

वो कहती हैं, "बात पुलिस और प्रशासन तक भी पहुंची लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. जब बच्चियों के पास कोई उपाय नहीं बचा तो वे सोशल मीडिया पर शिकायत लेकर चली गईं."

इस महिला की बेटी इसी संस्थान में 11वीं क्लास में पढ़ती हैं.

हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस संस्थान के एक टीचर पहले से यौन शोषण के आरोपों में जेल में हैं.

लेकिन संस्थान की डायरेक्टर अनुराधा डालमिया का कहना है कि बच्चों की शिकायतें कभी उन तक पहुंचीं ही नहीं. न ही बच्चों ने उनसे इन मुद्दों को लेकर सीधे बातचीत की.

अपनी ख़राब सेहत का हवाला देते हुए वह प्रिंसिपल समेत दूसरे अधिकारियों को लापरवाही के लिए दोषी ठहराती हैं.

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संस्थान की निदेशक अनुराधा डालमिया ने इस्तीफ़ा दे दिया है

मॉडल स्कूल पर सवाल

संस्थान का नाम भले ही मॉडल स्कूल है, लेकिन यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों की शिकायतें इसके आदर्श होने पर सवाल खड़े करती है.

छात्रा की मां ने बताया, "मेरी बेटी ने कई बार संस्थान में चल रही अनियमितताओं की शिकायत की. दो शिक्षकों द्वारा छात्राओं के साथ लगातार किए जा रहे छेड़छाड़ की जानकारी भी बेटी ने उन्हें दी."

"लेकिन एक शिक्षक की गिरफ़्तारी हुई और दूसरे को बचा लिया गया. उसे बचाने के लिए दो छात्रों से ज़बरन ग़लत बयान दिलवाया गया."

"मेरी बेटी ने संस्थान में पढ़ने वाली एक अनाथ बच्ची के साथ शिक्षक के बेहद ग़लत बर्ताव की बात भी कही. दूसरी-तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली लड़कियों के साथ भी छेड़खानी की शिकायतें की गई थीं."

अभिवावकों ने हॉस्टल की भी समस्याएं रखीं. गर्ल्स हॉस्टल में सफाई कर्मी, चौकीदार से लेकर रसोइया तक सभी पुरुष स्टाफ़ रखे गए हैं. जिनके बारे में लड़कियों ने शिकायतें कीं.

यहां तक कि उनके कमरों और बाथरूम तक में पुरुष कर्मचारी बिना दरवाज़ा खटखटाए दाखिल हो जाते हैं.

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शिकायतें और भी हैं...

अभिवावकों का कहना है कि शिकायत करने पर उल्टे बच्चों को ही डांट पड़ती है. लड़कियों को चुन्नी लेने को कहा जाता है. "लड़कियां स्पोर्ट्स के लिए जाएंगी तो क्या चुन्नी ओढ़ कर जाएंगी?"

"बच्चों ने उनसे प्रिंसिपल के हाथ उठाने की शिकायत भी की है. सवाल करने पर प्रिंसिपल बच्चों पर हाथ उठा देते हैं."

ये तब है जब संस्थान की डायरेक्टर भी दृष्टिबाधित हैं और जिस शिक्षक पर यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं, वे भी दृष्टिबाधित हैं.

प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राएं डायरेक्टर अनुराधा डालमिया पर आरोपों के घेरे में आए शिक्षक को संरक्षण देने का आरोप भी लगा रहे हैं.

मंगलवार को प्रदेश की महिला और बाल विकास मंत्री रेखा आर्या भी आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से मिलने पहुंची और उनकी समस्याएं जानीं.

बच्चों ने 30 मुद्दों का मांगपत्र भी मंत्री को सौंपा. रेखा आर्या ने बच्चों को आश्वासन दिया है कि उनकी सभी मांगें जल्द पूरी की जाएंगी.

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महिला और बाल विकास मंत्री रेखा आर्या छात्र-छात्राओं से मिलने पहुंची.

चर्चा में कब आया मामला...

राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्थान का ये मामला तब चर्चा में आया, जब एक छात्र ने फेसबुक पर विरोध प्रदर्शन की वीडियो अपलोड कर दी.

ये वीडियो वायरल हो गया. जिसके बाद बाल संरक्षण आयोग और अपर पुलिस महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने मामले का संज्ञान लिया.

मामले की जांच कर रही डीएसपी जया बलूनी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि उन्होंने सोमवार को चार छात्राओं के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए हैं.

"आरोपों के घेरे में आए शिक्षक पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. मैंने संस्थान की लड़कियों से अलग-अलग बात की है. जल्द ही उस शिक्षक की गिरफ़्तारी की जाएगी."

बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने भी राष्ट्रीय दृष्टिबाधित संस्थान के छात्र-छात्राओं से बात कर आंदोलन ख़त्म कराने की कोशिश की.

हालांकि छात्र-छात्राएं उनकी बातचीत से संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने नेगी पर मामले को दबाने का आरोप लगाया.

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सुरक्षा को लेकर चिंता

बच्चों का कहना है कि उषा नेगी बच्चों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही थीं.

जबकि उषा नेगी आशंका जाहिर करती हैं कि बच्चों को भड़काया गया है. उनका कहना है कि वॉर्डन और प्रिंसिपल ने बच्चों की शिकायतों को दबा दिया और डायरेक्टर तक पहुंचने ही नहीं दिया.

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में रहने वाले मोहम्मद सिदिक का बेटा एमएसवीएच में 11वीं का छात्र है.

उन्होंने बताया कि बिना उनकी इजाज़त के उनके बेटे को पुलिस थाने ले जाकर गवाही दिलाई गई. बेटे ने उनसे शिक्षकों के छेड़छाड़ का मसला भी बताया.

"फोन पर जब उन्होंने प्रिंसिपल से बात की तो प्रिंसिपल ने उन्हें देहरादून आने से मना कर दिया और डायरेक्टर ने उलटा बेटे को ही दोषी ठहरा दिया और कहा कि वो दूसरों के बहकावे में आकर शिक्षक पर ग़लत आरोप लगा रहा है."

मोहम्मद सिदिक का कहना है कि इस घटना के बाद से वे काफ़ी परेशान हैं और अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

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पॉक्सो ऐक्ट के तहत केस

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बात सरहद पार

दो देश,दो शख़्सियतें और ढेर सारी बातें. आज़ादी और बँटवारे के 75 साल. सीमा पार संवाद.

बात सरहद पार

समाप्त

छात्राओं के साथ लगातार यौन शोषण के आरोपों को गंभीरता से न लेते हुए, उलटा छात्राओं को ही दोषी ठहराने के खिलाफ दृष्टिबाधित संस्थान के बच्चों का गुस्सा सड़क पर प्रदर्शन के रूप में दिखाई दिया.

संस्थान के एक शिक्षक यौन शोषण के आरोप में पहले से जेल में हैं. दूसरे शिक्षक पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

डायरेक्टर पर शिक्षकों को शह देने का आरोप है. इससे पहले भी यहां छात्र-छात्राएं विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं. ज़ाहिर है कि राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.

प्रिंसीपल कमलवीर सिंह जग्गी का कहना है कि बच्चों के साथ यदि शारीरिक शोषण हुआ है और उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई है तो मैं इसकी प्रशंसा करता हूं. लेकिन उन्होंने कभी सीधे मुझसे इस तरह की कोई शिकायत नहीं की. अगर उन्होंने मुझसे इस तरह की शिकायत की होती तो मैं जरूर कार्रवाई करता.

उनका कहना है कि इस तरह की अफवाहें उन्होंने संस्थान में सुनी हैं कि बच्चों को कुछ लोग भड़का रहे हैं. बच्चों ने प्रिंसीपल पर पिटाई के भी आरोप लगाए हैं, जिसका उन्होंने खंडन किया है.

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