केरल के बाढ़ पीड़ितों को कैसे मिल रहा पीने का पानी

  • 24 अगस्त 2018
केरल बाढ़, बाढ़ में पीने का पानी, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, पेयजल इमेज कॉपीरइट Getty Images

बाढ़ से प्रभावित इलाक़ों से कुछ अलग नहीं है केरल का दर्द. चारों ओर पानी ही पानी है, लेकिन इसे पी नहीं सकते. लेकिन तेलंगाना के करुणाकर रेड्डी बाढ़ के पानी को फिल्टर करके प्रभावित लोगों को पीने का पानी मुहैया कराने का काम कर रहे हैं.

तेलंगाना सरकार ने दो दिन पहले केरल में 50 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भेजे हैं. इन मशीनों की मदद से करीब 10 लाख लीटर पीने का पानी रोज़ाना तैयार किया जा रहा है. ये मशीन सभी तरह के गंदे पानी को साफ़ करने में देती हैं.

वैसे तो ये मशीन तेलंगाना सरकार ने भेजी हैं, लेकिन इन्हें बनाया है हैदराबाद स्थित कंपनी 'स्माट' ने. इसी कंपनी के सीएमडी हैं करुणाकर.

करुणाकर ने बीबीसी को बताया, "पांच दिन पहले केरल के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोक निर्माण विभाग के मुख्य सचिव ने मुझसे बात की थी. उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के दौरान हमारी टीम के राहत कार्यों की उन्हें जानकारी थी."

उन्होंने कहा कि 13 ज़िलों में पीने के पानी की समस्या हो रही है, और मुझसे राहत शिविरों में लोगों को साफ़ पानी मुहैया कराने की समस्या को हल करने के उपायों को लेकर सुझाव मांगा.

वो कहते हैं, "मैं फौरन त्रिवेंद्रम गया और कहा कि 10 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट मैं मुफ़्त दे सकता हूं. उनकी मदद से हम रोजाना एक लाख लीटर साफ़ पानी निकाल सकते हैं. लेकिन अगर सरकार को इससे अधिक संयंत्र चाहिए है तो उसके लिए वित्तीय सहायता करनी होगी."

साढ़े छह हज़ार सामुदायिक जल केंद्र

उन्होंने कहा, "केरल के अधिकारियों ने तेलंगाना के अधिकारियों से बात की तो तेलंगाना के अधिकारियों ने सकारात्मक जवाब दिया और 50 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को प्रायोजित करने पर सहमति जताई."

"तेलंगाना सरकार के मुख्य सचिव ने मुझे बुलाया और इस काम की ज़िम्मेदारी सौंप दी गई. इसके बाद मैंने 50 प्लांट की व्यवस्था की."

उन्हें सेना की मदद से फौरन केरल भेजकर प्रभावित इलाकों में लगाया गया. करुणाकर की टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में साफ़ पानी मुहैया कराने में जुटी है. ये प्लांट केरल के पथानामथिट्टा, अलपुड़ा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर, मल्लापुरम और वायनाड जैसे बाढ़ से अत्यधिक प्रभावित ज़िले में लगाए गए हैं.

आगे की चुनौती

तेलंगाना सरकार के मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार जोशी ने बीबीसी से कहा, "हम बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के वक्त साफ़ पानी की ज़रूरत के महत्व को समझते हैं इसलिए हमने केरल में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भेजने का फ़ैसला किया."

तेलंगाना सरकार ने 2014 में आई जम्मू-कश्मीर की बाढ़ के दौरान भी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भेजे थे.

मुख्य सचिव ने बताया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट अब सुचारू रूप से बाढ़ प्रभावित केरल के ज़िलों में काम कर रहे हैं.

करुणाकर कहते हैं, "अब केरल के लिए अगली बड़ी समस्या यहां की कॉलोनियों में पीने के पानी की आपूर्ति करना है. वो सभी छोटे-छोटे मशीन, जो इन कॉलोनियों को पानी मुहैया कराते हैं, वो बाढ़ की पानी में डूबे हुए हैं. सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण कई जगहों पर पाइप लाइनें कट गई हैं."

"जल निकासी व्यवस्था को नुकसान पहुंचने के कारण भूजल भी प्रदूषित हो गया है. इसलिए पूरे पेयजल आपूर्ति नेटवर्क को बहाल करना पड़ेगा और हमें केरल सरकार की ओर से इस पर काम करने को कहा गया था. अभी हमारी टीम आपूर्ति लाइनों को बहाल करने में जुटी है."

वो कहते हैं, "पीने के पानी की आपूर्ति को बहाल करने के लिए 10 से 20 मजदूरों की ज़रूरत है. लेकिन मजदूरों में करंट लगने का डर है क्योंकि बाढ़ के पानी में बिजली के कई खंभे गिरे हुए हैं. इसके अलावा, केरल का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है. इसलिए यहां हर कुछ मीटर पर पानी का दबाव बदलता रहता है. इसलिए ऐसी स्थिति में काम करना मुश्किल होता है."

स्माट इंडिया ने देश के विभिन्न राज्यों में 6,500 से अधिक सामुदायिक जल केंद्र स्थापित किए हैं, जो ग्रामीण इलाकों में मामूली क़ीमत पर फिल्टर पानी की सुविधा मुहैया कराता है.

राष्ट्रपति कलाम का वो सुझाव

करुणाकर याद करते हैं, "एक बार हम राष्ट्रपति भवन में गंदे पानी को पीने के पानी में बदलने की परियोजना पर काम कर रहे थे. तब हमारे काम को उस समय के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने पसंद किया था. उन्होंने मुझे बुलाया और ग़रीबों के लाभ के लिए हमारी तकनीक का उपयोग करने का सुझाव दिया. इस प्रकार सामुदायिक जल केंद्र पहल की शुरुआत हुई."

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