मुल्लापेरियार बांध से पानी छोड़ने पर केरल में आई बाढ़?

  • 25 अगस्त 2018
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केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं. केरल सरकार ने अब एक नई वजह बताई है. गुरुवार को केरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि तमिलनाडु द्वारा मुल्लापेरियार बांध से अचानक पानी छोड़ा जाना भी बाढ़ की बड़ी वजहों में से एक है.

केरल की ओर से अदालत में कहा गया था कि 3.48 करोड़ आबादी वाले इस राज्य में तकरीबन 54 लाख लोग बाढ़ से सीधे प्रभावित हुए हैं.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी को एक चिट्ठी लिखकर मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर कम करने का आग्रह किया था.

इस सिलसिले में केरल के ही रहने वाले रसेल रॉय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी और तमिलनाडु सरकार द्वारा मुल्लापेरियार बांध के जलस्तर में एक निश्चित सीमा बनाए रखने की गुज़ारिश की थी.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए शुक्रवार को तमिलनाडु सरकार से कहा कि वो यह सुनिश्चित करे कि मुल्लापेरियार बांध में पानी का स्तर 139 फ़ीट पर बना रहे.

यह निर्देश चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की एक पीठ ने जारी किया.

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही एक फ़ैसले में तमिलनाडु के बांध की जलस्तर सीमा 142 फ़ीट तक तय की थी लेकिन केरल की बाढ़ को देखते हुए कोर्ट ने इसे 139 फ़ीट कर दिया है.

अदालत ने दोनों राज्यों को एक दूसरे का सहयोग करने और मुल्लापेरियार बांध के मसले पर दिए गए निर्देशों का पालन करने को कहा है.

बेंच ने यह साफ़ किया कि फ़िलहाल वो केरल की भयानक बाढ़ के मद्देनज़र निर्देश जारी कर रही है.

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हालांकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने शुक्रवार को केरल के आरोपों को 'ग़लत और बेबुनियाद' बताया था.

तमिलनाडु सरकार की तरफ़ से यह भी कहा गया था कि बांध में पानी का मौजूदा बहाव 20,000 क्यूसेक है और बारिश की वजह से पानी के स्तर को तुरंत कम करना मुमकिन नहीं है.

कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख़ छह सितंबर तय की है.

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बांध को लेकर क्यों झगड़ते हैं तमिलनाडु और केरल?

मुल्लापेरियार बांध केरल के इडुक्की जिले में थेकडी के पास पश्चिमी घाट में पेरियार नदी पर बना है.

समुद्र तल से लगभग 2,890 फ़ीट की ऊंचाई पर बना 119 साल पुराना यह बांध भौगोलिक रूप से तो केरल में है लेकिन इसका संचालन तमिलनाडु के हाथ में है.

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इसे लेकर तमिलनाडु और केरल में विवाद की एक प्रमुख वजह यह है कि तमिलनाडु खेती समेत बाकी बुनियादी ज़रूरतों के लिए पूरी तरह पेरियार नदी के पानी पर आश्रित है.

इसलिए वो हमेशा बांध में जलस्तर बढ़ाने की वकालत करता है. दूसरी तरफ़ केरल सुरक्षा वजहों से बांध में एक निश्चित सीमा के ऊपर जलस्तर बढ़ाने का विरोध करता है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

केरल फ़ॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (KFRI) के पूर्व निदेशक डॉक्टर पीएस. एसा इस बात को मानते हैं कि बांधों से अचानक पानी छोड़ा जाना बाढ़ की वजह बन सकता है.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "बांधों और कृत्रिम जलाशयों से पानी तभी छोड़ा जाता है जब यह ख़तरे के निशान से ऊपर पहुंच जाता है. जलस्तर ख़तरे के निशान पर अचानक पानी छोड़ने की बजाय ऐसी नौबत आने से पहले ही थोड़ा-थोड़ा करके पानी छोड़ना चाहिए."

केरल में बाढ़ की वजह से अब तक 350 से ज़्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं.

केंद्र सरकार ने राहत और बचाव कार्य के लिए केरल को 600 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है.

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