कैसे होती है सीमा पार से भारत में ड्रग्स की तस्करी

  • 26 अगस्त 2018

पंजाब के अमृतसर ज़िले में भारत-पाकिस्तान सीमा से दो किलोमीटर दूर धनोहा कलां गांव में गर्मी का मौसम है. वातावरण में उमस भी है.

ये हमेशा से एक संवेदनशील इलाका रहा है. ड्रग्स की वजह से हुई मौतों में वृद्धि के कारण हाल के दिनों में यहां सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और पंजाब पुलिस ने अपनी गश्त बढ़ा दी है.

पुलिस और बीएसएफ के वर्दीधारी जवानों को यहां की गलियों में गश्त करते देखा जा सकता है. आप यहां की छतों से सीमा पर लगे बाड़ों को देख सकते हैं. रात में इन कंटीले तारों में बिजली का करंट दौड़ता है.

लगभग 1,400 मतदाताओं वाले इस गांव के लोगों की ज़मीनें सीमा के दोनों तरफ हैं. सीमा पार जाने और वापस आने से पहले इन लोगों की सघन तलाशी ली जाती है.

बीते साल एक दिन, गांव में रहने वाले बख्शीश सिंह सीमा के पार अपनी ज़मीन सींचने गए. उस दिन को याद करते हुए पूर्व सरपंच सुखदेव सिंह कहते हैं, "उन्हें सफ़ेद पाउडर की तरह दिखने वाले कुछ पैकेट मिले. उन्होंने बीएसएफ को इसकी सूचना दी. बीएसएफ के लोग आए और पैकेट के साथ बख्शीश सिंह को भी ले गए. लेकिन जब पूरा गांव पीछे लग गया तो उन्होंने बख्शीश को छोड़ दिया."

वो कहते हैं कि एक-दो बार उनके खेतों में ऐसे पैकेट को छुपा कर रख दिया जाता है. सुखदेव कहते हैं, "हमें नहीं पता कि ये कौन और कैसे करता है."

आम है सीमा पार से ड्रग्स आना

बीएसएफ और ख़ुफ़िया अधिकारियों का कहना है कि किसानों की मदद और उनकी भागीदारी के बिना भी हेरोइन की तस्करी की जा रही है.

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पंजाब में कैसे आते हैं ड्रग्स?

अमृतसर और तरणतारण के कुछ किसानों का दावा है कि सीमा पार से ड्रग्स का आना बेहद आम हो गया है.

तरणतारण के एक किसान ने अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, "इसका बहुत अच्छे से संचालन किया जा रहा है क्योंकि जो लोग इससे जुड़े हुए हैं, उन्हें वो इलाके पता हैं जहां सीमा के उस पार से ड्रग्स को फेंकना है."

Image caption सुखदेव सिंह

'सरगना को पकड़ना आसान नहीं'

एक ख़ुफ़िया अधिकारी के मुताबिक किसानों या मजदूरों को बस उन पैकेटों को अपने घर ले जाना होता है. एक बार जब ये उनकी सीमा में पहुंच गए तो भारतीय कुरियर या 'पांधी', जैसा कि स्थानीय रूप से इन्हें जाना जाता है, इन्हें उनके घरों से ले जाते हैं.

वो कहते हैं कि ये 'पांधी' ड्रग्स के इन पैकेटों को पास के शहरों में पहले से तय जगहों पर ले जाते हैं जहां दूसरा कुरियर वाला आता है और इसे बेचने वालों तक ले जाया जाता है. फिर वो इसे वितरकों तक पहुंचाते हैं और वहां से यह ग्राहकों तक पहुंचता है.

सीमा पर गुप्तचरी में लगे एक अधिकारी ने कहा, "इस पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों को कमीशन दिया जाता है. इन्हें इसके सरगना या इस धंधे शामिल अन्य लोगों की कोई जानकारी नहीं होती और यही कारण है कि ड्रग्स के सरगना को पकड़ना आसान नहीं है."

भारतीय सीमा में ड्रग्स की तस्करी के कई तरीके हैं.

2016 में पंजाब में ड्रग्स के संकट पर संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री हरिभाई परथीभाई चौधरी ने कहा था, "पंजाब में ड्रग्स की तस्करी के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं, जैसे- सुरंग बनाकर पाइप के जरिए और सीमा के पार से भारतीय इलाके में फेंक कर इसकी सप्लाई की जा रही है."

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सीमा पर फ़ासला

पंजाब पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है. सीमा पर पहली सुरक्षा पंक्ति बीएसएफ की है जबकि दूसरी पंजाब पुलिस की, जिस पर सीमाई इलाके में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने की ज़िम्मेदारी है.

एक अधिकारी बताते हैं, "नाइट विज़न डिवाइस और अन्य नए उपकरणों से सुसज्जित बीएसएफ की 20 बटालियन यहां सीमा की रक्षा में तैनात हैं."

सीमा पर तैनात एक बीएसएफ अधिकारी ने बताया, "करीब करीब पूरी सीमा पर बाड़ और फ्लड लाइट लगी हैं. लेकिन नदी के अंतराल, धुंध, कुछ अंधेरे इलाके और मौसम इनकी मदद करते हैं."

Image caption पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म मोहिंदर

इस बीबीसी संवाददाता ने बीएसएफ का एक प्रज़ेन्टेशन देखा जिससे पता चला कि किसान किस तरह ड्रग्स को छुपाने के लिए खोह (छेद) बनाते हैं. बीएसएफ के एक अधिकारी बताते हैं, "यह भूसे में सुई तलाशने जैसा है क्योंकि ये छिपाने के तरीके बदलते रहते हैं."

ये अधिकारी कहते हैं, "पंजाब की सीमा पर तस्करी की बात करें तो इसमें 95 फ़ीसदी हेरोइन और अन्य ड्रग्स है जबकि पांच फ़ीसदी हथियार."

हाल के वर्षों में सीमा पर ड्रग्स पकड़े जाने की घटनाओं में इज़ाफ़ा हुआ है. साल 2016 में 30 किलो हेरोइन जब्त की गई जबकि 2017 में ये मात्रा 279 किलो तक पहुंच गई. वहीं इस साल के पहले सात महीनों का आंकड़ा लगभग 164 किलो है.

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सुरक्षित माहौल में ड्रग्स का सेवन

ठिकाने बदलते तस्कर

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म मोहिंदर कहते हैं, "पंजाब हेरोइन का उत्पादन नहीं करता है. ये सीमा पार से आ रहा है. हालांकि हम सप्लाई रोकने में सक्षम हैं."

पंजाब सरकार ने पिछले साल ड्रग्स तस्करी की जांच के लिए विशेष कार्य बल (स्पेशल टास्क फोर्स) का गठन किया है. इसके महानिरीक्षक राजेश कुमार जायसवाल कहते हैं, "पंजाब की सीमाओं पर अगर दबिश दी जाती है तो ड्रग्स तस्कर राजस्थान चले जाते हैं और अगर वहां भी दबिश होती है तो वहां से और कहीं चले जाते हैं."

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जालंधर ज़ोन के आईजी प्रमोद बान कहते हैं कि तस्कर अपनी जगह और रणनीति को बदलते रहते हैं.

वो कहते हैं, "पंजाब अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रग्स की तस्करी से बहुत प्रभावित हुआ है और तस्कर किसी एक जगह पर नहीं रहते. वो एक से दूसरी जगह बदलते रहते हैं, जैसे अमृतसर से फिरोज़पुर-फज़िलका और उससे आगे."

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पुलिस से सांठ-गांठ?

कई लोगों ने तस्करों से मिलीभगत को लेकर पुलिस और उन एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए जो सीमा की रखवाली में लगी हैं.

2016 में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ड्रग्स तस्करी पर एक आंकड़ा साझा किया. उन्होंने कहा कि 2014 से पंजाब पुलिस, राज्य जेल विभाग, पंजाब होम गार्ड्स, बीएसएफ, रेलवे सुरक्षा बल और चंडीगढ़ पुलिस के 68 कर्मचारियों को ड्रग्स तस्करी में उनकी संलिप्तता के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. इनमें से अकेले पंजाब पुलिस के 53 लोग हैं. इन आंकड़ों को जून 2016 में राज्यसभा में भी पेश किया गया.

सरकार और एजेंसियों के लिए एक चुनौती है कि वो ड्रग्स तस्करी में पुलिसकर्मियों की मिलीभगत पूरी तरह ख़त्म करने के लिए किस तरह कोशिश करते हैं.

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