84 की दंगा पीड़िता ने कहा, राहुल गांधी हमें बेवकूफ़ बना रहे हैं

  • 26 अगस्त 2018
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"सब कुछ याद है. मेरे फ़ादर को जलाया गया था, किन-किन ने जलाया... ये सब मुझे याद है. कैसे हमारे घर पर अटैक किया, गुरुद्वारा साहब पर अटैक किया... ये सब मुझे मालूम है."

1984 के सिख विरोधी दंगों में अपने पिता को खोने वाली 50 साल की निरप्रीत कौर अतीत को याद करते-करते ठहर-सी जाती हैं.

थोड़ी देर रुकने के बाद वो फिर अपनी बात शुरू करती हैं, "84 के क़त्लेआम में मेरे फ़ादर की डेथ हुई थी. हमारा घर-बार और बिज़नस जला दिया था. ये बात तो 'वो' बिल्कुल ग़लत बोल रहे हैं वो. कांग्रेस पार्टी ने ही कराया. हम कैसे मान जाएं कि कांग्रेस पार्टी के लोग नहीं थे?"

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'वो' से निरप्रीत का मतलब, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से है.

राहुल ने लंदन में आयोजित इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में सिख दंगों को एक 'बहुत दर्दनाक त्रासदी' बताया था और कहा था कि किसी भी शख़्स के साथ हिंसा करने वाले दोषी को सज़ा दिलाने पर 100 फ़ीसदी सहमत हैं. हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ा कि वो इस बात से असहमत हैं कि इन दंगों में कांग्रेस की कोई भूमिका थी.

निरप्रीत राहुल गांधी के इस बयान से बेहद ख़फ़ा हैं.

वो कहती हैं, "उन्हें कहना चाहिए था कि दंगे के दोषियों को सज़ा मिलेगी चाहे वो किसी भी पार्टी के हों. अगर राहुल ऐसा कहते तो हमें ख़ुशी होती."

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राहुल गांधी ने जो कुछ कहा, वो कितना तथ्यपूर्ण है?

वरिष्ठ पत्रकार राशिद क़िदवई के अनुसार, "उस समय, दंगों के वक़्त तमाम आपराधिक और असामाजिक तत्व सक्रिय हो गए थे और उन्होंने बड़े पैमाने पर हिंसा और लूटपाट को अंजाम दिया था. इन सबके बावजूद सरकार अपनी आंखें मूंदे रहीं. इसलिए कांग्रेस दोषी है, इसमें कोई दो राय नहीं है."

हालांकि क़िदवई दंगों में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को 'बेनिफ़िट ऑफ़ डाउट' देते हैं.

वो कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि राजीव गांधी की ऐसी कोई मंशा थी. इसलिए अगर राहुल अपनी पार्टी की बजाय अपने पिता को क्लीन चिट देते तो ज़्यादा क़ामयाब रहते."

क़िदवई के मुताबिक़ "राहुल गांधी को सिर्फ़ एक बात का क्रेडिट दिया जा सकता है कि उन्होंने इस विषय पर बात की. हालांकि उन्होंने संतोषप्रद बात की, इसमें मुझे संदेह है."

किदवई का मानना है कि राहुल गांधी के इस बयान से न तो उन्हें कोई फ़ायदा होगा और न ही कांग्रेस को.

बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली ने कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "राहुल गांधी का ये बयान दंगा पीड़ितों के साथ एक क्रूर मज़ाक है. उनके बयानों में परिपक्वता कहीं नज़र नहीं आती. उनकी बातों से साफ़ पता चल रहा है कि वो बिना तैयारी के और तथ्यों को नज़रअंदाज़ करके बोल रहे हैं."

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लेकिन क्या बीजेपी को इस बात की सराहना नहीं करनी चाहिए कि राहुल गांधी ने एक वैश्विक मंच पर दोषियों को सज़ा दिलाने की बात कही?

इसके जवाब में कोहली ने कहा, "ये तो क़ानून का पहला प्रावधान है. इसकी क्या सराहना करना? जो भी दोषी है, उस पर तो कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन इसके लिए उनकी पार्टी ने किया क्या?"

नलिन कोहली कहते हैं, "ये सिर्फ़ एक बयान है. इसके पीछे न तो कोई सोच है और न कोई मंशा है कि दोषियों को सज़ा मिले. अगर ऐसा होता तो जिन कांग्रेस नेताओं पर सवाल उठते हैं, उन पर उन्होंने एक वाक्य क्यों नहीं बोला?"

इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम राहुल गांधी के बचाव में उतर आए हैं.

उन्होंने कहा, "1984 में कांग्रेस सत्ता में थी. उस वक़्त बहुत भयंकर घटना हुई थी. इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में माफ़ी मांगी थी. आप इसके लिए राहुल गांधी को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते. उस वक़्त वो सिर्फ़ 13-14 साल के थे. "

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राहुल गांधी ने क्या कहा था?

राहुल गांधी ने कार्यक्रम में अपने पिता राजीव गांधी की हत्या का ज़िक्र करते हुए कहा, "मैं ख़ुद हिंसा का पीड़ित हूं. मैंने उन लोगों की हत्या होते देखा है जो मेरे बहुत प्रिय थे. मैंने अपने पिता की हत्या करने वाले प्रभाकरन को देखा है."

1984 के सिख विरोधी दंगों के बारे में पूछे जाने पर राहुल का कहना था कि उस दौरान हुई हिंसा के लिए ज़िम्मेदार किसी भी शख़्स को सज़ा मिलनी चाहिए लेकिन उन्होंने इस बात से अहसमति जताई कि इसमें कांग्रेस पार्टी की कोई भूमिका थी.

साल 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सिख बॉडीगार्ड ने उनकी हत्या कर दी थी जिसके बाद देश भर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे.

इन दंगों में तक़रीबन 3,000 सिखों की हत्या कर दी गई थी.

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