ब्लॉग: विकलांग से रेप और चुभते सवाल भी उसी से

  • 29 अगस्त 2018
विकलांग के साथ बलात्कार, देहरादून मामला

बलात्कार का शिकार हुई एक विकलांग लड़की से जब मैंने पहली बार बात की तो उसने मुझे बताया कि उसके लिए उस हिंसा से भी ज़्यादा दर्दनाक था कि कोई ये मानने को तैयार नहीं था कि एक विकलांग लड़की का बलात्कार हो सकता है.

पुलिस, पड़ोसी और ख़ुद उसका परिवार उससे पूछ रहा था कि, "विकलांग लड़की के बलात्कार से किसी को क्या मिलेगा?"

उसका सामूहिक बलात्कार हुआ था. लड़की के मुताबिक उसके पड़ोसी और उसके दोस्त ने उसे कोल्ड ड्रिंक में कुछ मिलाकर दे दिया और जब उसे होश आया तो वो एक गली में अधनंगी अवस्था में पड़ी थी.

आख़िर पुलिस ने शिकायत दर्ज की और अब मुक़दमा चल रहा है.

विकलांग लड़कियों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के मामलों में ज़्यादातर उनके जाननेवाले ही उनका विश्वास तोड़ते हैं.

जैसा देहरादून के 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ विज़ुअली हैंडीकैप्ड' (एनआईवीएच) में हुआ. यहां के 'मॉडल स्कूल' में संगीत पढ़ा रहे एक अध्यापक पर छात्राओं ने यौन हिंसा के आरोप लगाए हैं.

अध्यापक फ़रार

उनकी बात पर भी पहले किसी ने यक़ीन नहीं किया. ना स्कूल के प्रिंसिपल और ना ही संस्थान की निदेशक ने.

उन्हें दस दिन तक हड़ताल करनी पड़ी, फिर सोशल मीडिया पर उसका वीडियो पोस्ट किया, स्थानीय मीडिया तक ख़बर पहुंचाई और आख़िरकार पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया.

छात्राओं ने मेजिस्ट्रेट के सामने बयान दिए जिसके बाद अध्यापक पर पॉक्सो ऐक्ट के तहत 'विकलांगता का फ़ायदा उठाकर यौन हिंसा' करने का मुक़दमा दर्ज हुआ.

वो अध्यापक अब भी फ़रार है. प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को हटा दिया गया है और संस्थान की निदेशक ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

रिपोर्ट क्या कहती है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व बैंक की रिपोर्ट, 'वर्ल्ड रिपोर्ट ऑन डिसएबिलिटी' (2011) के मुताबिक, आम औरतों और विकलांग मर्दों के मुकाबले विकलांग औरतों की शिक्षा और रोज़गार की दर कम और हिंसा का शिकार होने की दर ज़्यादा है.

रिपोर्ट के मुताबिक विकलांग औरतें बाहरी दुनिया के बीच ख़ुद को ज़्यादा असुरक्षित पाती हैं. यही उन्हें शिक्षा और रोज़गार से दूर रखता है.

उनकी पढ़ाई-लिखाई, रोज़गार वगैरह परिवारों के लिए कम अहमियत रखता है. ख़ास तौर पर जब सोच ये हो कि उन्हें बाहर भेजने का मतलब है हिंसा की संभावना और अपनी ज़िम्मेदारी बढ़ाना.

विकलांग औरतों से बात करें तो वो समझाती हैं कि यौन हिंसा का ख़तरा उनके लिए बेशक़ ज़्यादा है पर ऐसा भी नहीं कि पूरी दुनिया उन्हें वहशी नज़रों से देखती हो.

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही श्वेता मंडल ने बताया कि उनके अनुभव में ग़ैर-विकलांग लोग बहुत संवेदनशील होते हैं, जो विकलांग लोगों के लिए बहुत ज़रूरी भी है.

श्वेता ने कहा, "हमें मदद चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं, और वो मिलती भी है, ग़ैर-विकलांग लोगों पर ये विश्वास हमारी ज़िंदगी का बहुत अहम हिस्सा है."

एनआईवीएच में भी इसी विश्वास के चलते छात्रों को दरवाज़े और खिड़कियां खुली रखने की सलाह दी जाती है.

पहली बार नहीं उठा है मामला

पर यौन हिंसा के आरोप सामने आने के बाद 'नेशनल प्लेटफ़ॉर्म फ़ॉर द राइट्स ऑफ़ द डिसएबल्ड' (एनपीआरडी) की दो सदस्यीय टीम ने जब संस्थान का दौरा किया तो उन्हें छात्राओं ने बताया कि वो संस्थान में असुरक्षित महसूस करती हैं.

संस्थान के स्टाफ़ में काम कर रहे मर्द बिना बताए हॉस्टल में दाख़िल हो जाते हैं. बाथरूम के दरवाज़ों पर भी चिटकनियां नहीं लगाई गई हैं.

छात्राओं ने यहां तक कहा कि जब उन्होंने प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल को यौन हिंसा की शिकायत की तो उन्होंने पलटकर लड़कियों को ही तमीज़ के कपड़े पहनने की सलाह दे दी.

ये तब जब संस्थान में ये मुद्दा पहली बार नहीं उठा है. छात्र-छात्राओं ने अप्रैल में इस अध्यापक समेत संगीत सिखानेवाले एक दूसरे अध्यापक के ख़िलाफ़ यौन हिंसा के आरोप लगाए थे.

तब भी हड़ताल हुई थी जिसके बाद दूसरे अध्यापक तो गिरफ़्तार कर लिए गए पर ये अध्यापक अब तक पढ़ा रहे थे.

पॉक्सो ऐक्ट के तहत कोई नाबालिग अगर यौन हिंसा के बारे में किसी अधिकारी को बताए और वो व्यक्ति उसका संज्ञान ना ले तो ख़ुद उस पर कार्रवाई हो सकती है.

क्या संस्थान और स्कूल के बड़े पदों पर बैठे निदेशक, प्रिंसिपल इत्यादि के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी?

'राइट्स ऑफ़ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज़ ऐक्ट' के तहत, ओहदे और ताक़त का ग़लत इस्तेमाल कर किसी विकलांग व्यक्ति के साथ यौन हिंसा करना दंडनीय अपराध है.

तहक़ीक़ात शुरू हो गई है. परत-दर-परत पता चलेगा कि इस घटना में विश्वास किस-किस स्तर पर टूटा होगा.

मुझे फिर उस बलात्कार पीड़िता की बात याद आई. बलात्कार या यौन हिंसा तो दर्दनाक होती है, ख़ास तौर पर जो विश्वास के पात्र लोगों के हाथों हो.

पर उसके बाद की लड़ाई में भी विश्वास के पात्र लोगों का साथ ना मिलना, कुछ और गहरी चोट छोड़ देता है.

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