बाढ़ का जायज़ा लेने इतनी देर से क्यों गए राहुल गांधी

  • 29 अगस्त 2018
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार से बाढ़ प्रभावित केरल के दो दिवसीय दौरे पर हैं. केरल में बाढ़ का पानी उतरे सप्ताह भर बीत चुका है.

सोशल मीडिया में इस बात की काफ़ी चर्चा हो रही है कि राहुल गांधी ने केरल जाकर बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने में देरी कर दी.

क्या राहुल गांधी इससे पहले केरल नहीं जा सकते थे?

इस सवाल पर कांग्रेस महासचिव शकील अहमद कहते हैं, "मैं समझता हूं कि यही सही वक्त है केरल जाने का क्योंकि लोग मना करते हैं."

"अगर कोई घटना हुई और वीआईपी तुरंत वहां पहुंचें तो लोग उनकी सुरक्षा व्यवस्था और अलग कामों में लग जाते हैं. ऐसे में ज़मीनी स्तर पर होने वाला काम प्रभावित होता है. यही सही तरीका है कि आप थोड़ा रुक जाएं और फिर जाएं. राहुल जी उन पहले नेताओं में थे जिन्होंने कहा था कि केरल में आई बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए."

शकील अहमद कहते हैं, "किसी नेता को अपने दौरे के कारण जो राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं उसे डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए. बहुत सही वक्त पर राहुल गांधी केरल गए हैं."

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बीते सप्ताह राहुल गांधी विदेश में थे

केरल जाने से पहले राहुल गांधी के जर्मनी और ब्रिटेन दौरे का ज़िक्र करते हुए वरिष्ठ पत्रकार टीआर रामचंद्रन कहते हैं कि राहुल गांधी हर समय बीजेपी के निशाने पर रहते हैं.

टीआर रामचंद्रन का मानना है कि राहुल गांधी की आलोचना में कोई नई बात नहीं है, "बीजेपी सत्ताधारी पार्टी है और राहुल गांधी हमेशा उनके निशाने पर रहेंगे. लेकिन प्रधानमंत्री को इस बात के लिए सराहा जाना चाहिए क्योंकि उनको समझ आ गया कि आम लोगों की बाढ़ के कारण क्या हालत हुई है और उन्होंने कोई देर नहीं की वहां जाने में."

"इसके मुक़ाबले लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के अध्यक्ष अगर सप्ताह भर बाद वहां जाते हैं क्योंकि उनका पहले से विदेश में कार्यक्रम है तो इसका संदेश अच्छा नहीं जाता."

उनका कहना है, "राहुल गांधी नहीं भी जाते तो कौन-सी आफ़त आ जाती? लोग आलोचना करते और कुछ दिन में भूल भी जाते."

दक्षिण में पैर पसारना चाहती है भाजपा

वहीं वरिष्ठ पत्रकार कल्याणी शंकर का मानना है कि राहुल गांधी अभी सही मायने में नेता नहीं बने हैं और यही वजह है कि वो प्रधानमंत्री मोदी की तरह जल्दी केरल जाकर ये जता नहीं पाए कि उन्हें और उनकी पार्टी को भी केरल के लोगों की चिंता है.

कल्याणी शंकर कहती हैं, "इसमें कोई शक़ नहीं है कि राहुल गांधी को सही मायनों में राजनीतिज्ञ बनना पड़ेगा. वो उस स्थिति में उस तरह से प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं जैसी उनसे उम्मीद है."

"वो हाल में यूरोप दौरे पर थे. हो सकता है कि उन्होंने सोचा हो कि लंदर स्कूल ऑफ़ इकनॉमिक्स और अन्य जगहों पर पहले से तय कार्यक्रम डिस्टर्ब ना हो. वो शायद इसे कैंसिल नहीं करना चाहते थे."

"आधे दिन के लिए भी केरल नहीं जा पाना अजीब था. लेकिन अब वो दो दिन के लिए वहां जाने वाले हैं. अब देखना होगा कि लोगों की क्या प्रतिक्रिया रहती है."

वो कहती हैं, "प्रधानमंत्री मोदी तुरंत वहां गए थे क्योंकि वो भी वहां अपनी पार्टी की स्थिति सुधारना चाहते थे."

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राहुल गांधी के दौरे पर विवाद के बीच तथ्य ये है कि केरल में बाढ़ की वजह से अब तक 350 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं.

केंद्र सरकार ने राहत और बचाव कार्य के लिए केरल को 600 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का एलान किया है.

केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे अलग-अलग वजहें बताई जा रही हैं.

पिछले दिनों केरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि तमिलनाडु ने मुल्लापेरियार बांध से अचानक पानी छोड़ा गया जिसने बाढ़ की स्थिति पैदा करने में अहम भूमिका अदा की थी.

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