BBC EXCLUSIVE: मेरे बिना गठबंधन बनता है तो बना लें: शिवपाल यादव

  • 3 सितंबर 2018
अखिलेश, शिवपाल इमेज कॉपीरइट PTI

उत्तर प्रदेश को 2019 के आम चुनाव के लिहाज से सबसे अहम राज्य माना जा रहा है.

केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी को चुनौती देने के लिए बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की अगुवाई में गठबंधन की आधिकारिक घोषणा होने से पहले मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव ने अपना अलग समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनाने की घोषणा कर दी है.

इतना ही नहीं, शिवपाल यादव आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 80 सीटों पर इस मोर्चे के उम्मीदवार भी उतारने जा रहे हैं.

बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में उन्होंने बीएसपी-एसपी गठबंधन के भविष्य पर भी सवाल उठाए और ये भी दावा किया कि उनकी बीजेपी से कोई बातचीत नहीं हुई है.

पूरी बातचीत पढ़िए.

सवाल- आपका समाजवादी मोर्चा उत्तर प्रदेश के सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगा, तो पहला सवाल यही है कि इस मोर्चे को बनाने की नौबत क्यों आई और आप चुनावी मैदान में जीतने के इरादे से उतर रहे हैं या फिर समाजवादी पार्टी- बहुजन समाज पार्टी के बनने वाले गठबंधन को हराने के उद्देश्य से?

जवाब- देखिए समाजवादी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी थी. राजनीति ने सभी तरह के परिवेश बदल दिए हैं. बेईमानी और भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है, लगातार किसानों की उपेक्षा हो रही है, ग़रीबी बढ़ती जा रही है, देश में केवल 10-15 फ़ीसदी लोगों को लाभ मिलता है. इन वजहों से मुझे ये फ़ैसला लेना पड़ा.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

समाजवादी पार्टी से लोगों को बहुत उम्मीद थी, लेकिन बीते डेढ़ साल में उसने इन मुद्दों पर कोई प्रदर्शन भी नहीं किया है. हम रहना चाहते थे पार्टी में लेकिन बहुत से लोगों को सम्मान नहीं मिल रहा था, उनकी उपेक्षा हो रही थी. बहुत इंतज़ार भी किया, प्रयास भी किया कि पार्टी में सब एक साथ रहे.

सवाल- आपने प्रयास किया, इंतज़ार भी किया लेकिन अब आप जो अलग हुए हैं, उसका दोष किसे देंगे?

जवाब- मैं इसका दोष किसी को नहीं देना चाहूंगा, अब जनता को फ़ैसला लेना है. समाजवादी पार्टी संघर्ष के दम पर बनी थी, उसमें तीन दशक तक मैं भी नेताजी ( मुलायम सिंह यादव) के साथ संघर्ष करता रहा.

अब जो समान विचारधारा वाले दल हैं, गांधीवादी लोग हैं, लोहियावादी लोग हैं, चरण सिंह वादी लोग हैं, उन सबसे बात करके, उन्हें एकजुट करके, मज़बूत संगठन बनाकर, हम चुनाव मैदान में उतरेंगे.

सवाल- एक तरफ आप कह रहे हैं किसान उपेक्षित हैं, ग़रीब तबके के लि कुछ नहीं हो रहा है, दूसरी तरफ आप कह रहे हैं कि समाजवादियों की उपेक्षा हो रही थी, तो उत्तर प्रदेश में आप किसके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे. सत्तारूढ़ बीजेपी के ख़िलाफ़ या विपक्षी दलों के ख़िलाफ़?

जवाब- जो भी दल मेरे सामने आएगा. हम 80 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करेंगे. तो हमारे सामने जो भी दल-गठबंधन आएगा, चाहे जो भी हो उसके ख़िलाफ़ हम लड़ेंगे.

सवाल- अब इस नई भूमिका में आप क्या देख रहे हैं कि 2019 के चुनाव में क्या होगा?

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
BBC EXCLUSIVE: सेक्युलर मोर्चा बनाकर क्या करेंगे शिवपाल

जवाब- 2019 में वही होगा जो जनता फ़ैसला लेगी. ऐसे बहुत से मौके आए हैं जब लोगों ने जिनके बारे में सोचा भी नहीं था, उनकी सरकार बनी है.

तो सब जनता के ऊपर है. मैं तो जनता के पास जाकर समर्थन मागूंगा. मैं लोगों से कहूंगा कि आपसे जो भी वादे करूंगा, उसे पूरा करूंगा, हमारा साथ दीजिए. हमें सबसे ज़्यादा सीटें दीजिए.

सवाल- अगर मान लीजिए कि ऐसा हो जाए, आपका मोर्चा सबसे बड़े दल के तौर पर उभरता है तो आप किसके साथ जाएंगे?

जवाब- वह तो समय पर देखेंगे. अभी तो काल्पनिक स्थिति है, उस पर क्या कहें. उस वक्त फ़ैसला लेंगे.

सवाल- ये सवाल बार बार इसलिए उठ रहा है शिवपाल जी, क्योंकि जिस दिन आपने अपना मोर्चा बनाने की बात कही, उसी दिन अखिलेश यादव की एक प्रतिक्रिया आयी कि इसके पीछे बीजेपी हो सकती है?

जवाब- बीजेपी से मेरी कभी बातचीत हुई नहीं है. उन्होंने भी नहीं की और मैंने भी कभी बातचीत नहीं की. जिन लोगों से मैं बात करता रहा हूं, इंतज़ार करता रहा हूं वहां इतना अपमान और इतनी उपेक्षा. अब करें बातचीत, जो लोग ये बात कर रहे हैं.

सवाल- अगर अखिलेश अब आपसे बातचीत करने की कोशिश करें तब क्या होगा?

इमेज कॉपीरइट @yadavakhilesh

जवाब- तो फिर डर क्यों लगता है, क्यों डर लगता है. अब तक गठबंधन क्यों नहीं बन पाया, वो तो बन जाना चाहिए था ना. नहीं बना.

सवाल- कहीं ना कहीं आप विपक्ष की जो योजना है, वो गठबंधन नहीं बन पाएगा, इस ओर शारा कर रहे हैं?

जवाब- बना लो, बनाते क्यों नहीं. मेरे बिना बना रहे थे, तो अब तक क्यों नहीं बनाया. अब क्यों चिंता हो गई. अब तक कोई चिंता नहीं थी किसीको, अब क्यों हो गई.

सवाल- अगर अखिलेश, इसके बाद भी आपसे बात करें, तो क्या कोई सुलह का रास्ता बचा है, वापसी की गुंजाइश है या फिर आपके रास्ते अलग हो गए हैं?

जवाब- जो क़दम मैंने आगे बढ़ा लिया है, वो बढ़ गया है. जो भी काम किया है वो डंके की चोट पर किया है. राष्ट्रपति के चुनाव में ना तो समाजवादी पार्टी ने ना कांग्रेस ने मुझसे वोट मांगा. मैंने 30 साल तक लगातार संघर्ष किया है. खून पसीने से समाजवादी पार्टी बनाई. लेकिन वहां कोई पूछ नहीं रहा था.

राज्यसभा उम्मीदवार के चुनाव में जिस दिन दावत थी, उस दिन मैं इटावा जा रहा था, तो दिन में एक बजे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने फ़ोन करके निमंत्रण दिया है, मैंने कहा कि मुझे निमंत्रण नहीं है, क्या मैं समाजवादी पार्टी में नहीं हूं तो उन्होंने कहा आ जाओ. मैंने जाकर खुलकर साथ दिया लेकिन क्या मुझे किसी ने धन्यवाद भी दिया? पार्टी की किसी बैठक में भी बुलाया? किसी मीटिंग में भी बुलाया?

इमेज कॉपीरइट @shivpalsinghyadav

सवाल- आप लोग कहते रहे कि परिवार के लोग बैठ जाएंगे तो सुलझ जाएगा मसला. अब ये सुलझा नहीं तो एक सवाल ये बनता है कि मुलायम सिंह यादव कहां होंगे, उनका समर्थन किसे मिलेगा?

जवाब- मैंने हमेशा नेताजी का सम्मान किया है, जिन्होंने सम्मान नहीं किया है, उन्हें करना चाहिए. जितने भी लोग समाजावादी पार्टी में हैं, सब उनकी वजह से हैं. ऐसे में जब उन्हीं का अपमान करोगे तो ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं.

मैंने नेताजी से आशीर्वाद लेकर, उनसे बात करके ही ये फ़ैसला लिया है.

सवाल- तो उनका साथ आपको मिलेगा?

जवाब- एकदम मिलेगा, जब मैंने बात करके ही ये फ़ैसला लिया है तो मिलेगा.

सवाल- आख़िर में, आपको क्या लग रहा, आप 80 सीटों पर लड़ेंगे तो कितनी सीटें आएंगी?

जवाब- राज्य में सबसे बड़े दल के तौर पर हमारा मोर्चा उभरेगा, सबसे बड़े दल के तौर पर.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए