प्रेस रिव्यू: अकबर रोड को अटल मार्ग बनाने की कोशिश

  • 3 सितंबर 2018
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नवभारत टाइम्स के मुताबिक केसरिया ड्रेस में कुछ लोगों ने रविवार को राजधानी में अकबर रोड का नाम बदलकर 'अटल मार्ग' करने की कोशिश की.

लगभग 15-20 लोगों ने अकबर रोड साइनेज के ऊपर अटल मार्ग के पोस्टर चिपका दिए. इन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने वाले पोस्टर भी लगाए. समूह में शामिल महिलाएं रोड का नाम बदलने का मांगपत्र भी साथ लाई थीं.

बाद में पुलिस ने इन लोगों को हिरासत में लेकर छोड़ दिया.

राजधानी दिल्ली में इससे पहले भी मुगल शासकों के नाम पर रखी गई सड़कों जैसे शाहजहाँ रोड, तुगलक रोड आदि के नाम बदलने की कोशिश हो चुकी है.

तलाक के बाद दहेज का मुकदमा नहीं

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हिंदुस्तान के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फ़ैसले में कहा है कि तलाक के बाद पूर्व पति पर दहेज प्रताड़ना का मुकदमा नहीं किया जा सकता. जस्टिस एएस बोबडे की पीठ ने कहा, शिकायतकर्ता ने खुद माना है कि उनका चार वर्ष पहले तलाक हो चुका है, ऐसे में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.

पीठ ने कहा, धारा 498ए के शुरुआती शब्द यही हैं कि जो भी महिला का पति और उसके रिश्तेदार हैं. इसलिए जब शिकायतकर्ता यह कहकर शिकायत करती है कि तलाक काफी पहले हो चुका है, तो धारा 498ए का मामला नहीं बनेगा. लेकिन पीठ ने कहा कि मारपीट और धमकाने का मुकदमा चल सकता है.

शरिया अदालत को चुनौती

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक निकाह, तलाक और अन्य मामलों पर फैसले के लिए शरिया अदालतों के गठन को असंवैधानिक घोषित करने की मांग करने वाली एक मुस्लिम महिला की नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार किया है.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने याचिका दायर करने वाली जिकरा से कहा कि मुसलमानों में व्याप्त बहुविवाह और निकाह-हलाला के मामले में चल रही सुनवाई में पक्षकार बनने के लिए वह नए सिरे से अर्जी दायर करे.

पिछले साल सुन्नी मुसलमानों में व्याप्त फौरी तीन-तलाक की पुरानी परंपरा को खत्म करने का फैसला सुनाने वाले न्यायालय ने समुदाय में व्याप्त बहु-विवाह और निकाह हलाला को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 26 मार्च को 5 सदस्यीय संविधान पीठ का गठन किया था. मुसलमानों में व्याप्त बहु-विवाह की प्रथा एक पुरुष को 4 महिलाओं के साथ विवाह का हक देती है.

अर्थव्यवस्था की सर्जरी थी नोटबंदी

जनसत्ता के मुताबिक नेशनल काउंसिल ऑफ़ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च के सीनियर फेलो डॉक्टर कन्हैया सिंह ने कहा है कि देश में चल रही नकदी और कालेधन की अर्थव्यवस्था की ज़रूरी सर्जरी नोटबंदी से की गई. उन्होंने कहा कि इससे रियल एस्टेट क्षेत्र के दाम आसमान से ज़मीन पर आए हैं.

नोटबंदी के बाद एक-दो तिमाही में इसका असर अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर देखने को मिला, लेकिन फिर स्थिति सुधरने लगी. उन्होंने कहा, "आप जानते हैं कि जब भी कोई सर्जरी होती है तो कुछ समय तक उसका असर तो शरीर पर रहता ही है."

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