हैदराबाद धमाके: दोषियों को फाँसी देने की मांग

  • 4 सितंबर 2018
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हैदराबाद में एनआईए की एक अदालत ने वर्ष 2007 में हुए धमाकों के मामले में दो लोगों को दोषी ठहराया है, जबकि दो लोगों को बरी कर दिया गया है.

जिन दो लोगों को इस मामले में दोषी ठहराया गया है, वे हैं अनीक़ शफ़ीक़ सईद और मोहम्मद अकबर इस्माइल चौधरी.

फ़ारूक़ सैफ़ुद्दीन तरकश और मोहम्मद सादिक़ इशरत को बरी कर दिया गया है. पाँचवें अभियुक्त मोहम्मद तारिक़ अंजुम एहसान के मामले में फ़ैसला सोमवार को सुनाया जाएगा.

इन सभी लोगों के मामले में सज़ा का ऐलान सोमवार को होगा. इस मामले में सरकारी वकील सेशु रेड्डी का कहना है कि वे अदालत से दोषियों को फाँसी देने की मांग करेंगे.

पुलिस का कहना है कि इन धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन नाम के चरमपंथी संगठन का हाथ है.

वर्ष 2007 में हैदराबाद के गोकुल चाट और लुम्बिनी पार्क में हुए धमाकों में 44 लोग मारे गए थे और 68 घायल हुए थे.

गिरफ़्तारी

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तेलंगाना पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस इकाई ने इस मामले की जाँच की थी. इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.

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सभी लोग कथित रूप में इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य थे. इस मामले में दो अन्य अभियुक्त रियाज़ भटकल और इक़बाल भटकल फ़रार हैं.

25 अगस्त 2007 को ये धमाके हुए थे. पहला धमाका हैदराबाद के लोकप्रिय गोकुल चाट के पास हुआ. यहाँ 32 लोग मारे गए जबकि 47 लोग घायल हुए.

दूसरा धमाका लुम्बिनी पार्क के ओपन थियेटर में हुआ. यहाँ 12 लोगों की मौत हुई. इसके बाद शहर भर में अलर्ट जारी कर दिया गया और 19 बम भी बरामद हुए.

फ़ैसले से नाराज़गी

इस धमाके में घायल चंदर नायक ने कहा कि वे इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं हैं.

उन्होंने कहा, "गोकुल चाट धमाके में मेरी बाईं आँख चली गई. मैं इस फ़ैसले से ख़ुश नहीं हूँ. अगर दो लोगों को छोड़ दिया गया है, तो उन्हें इतने लंबे समय तक जेल में क्यों रखा गया था. इतने लंबे इंतज़ार के बाद भी हमें न्याय नहीं मिला है. मुझे मुआवज़े के रूप में सिर्फ़ 20 हज़ार रुपए मिले. मैं अब विकलांग हूँ. मुझे अपनी समस्याओं का स्थायी समाधान चाहिए."

इस मामले में पुलिस ने 1125 पन्नों की तीन चार्जशीट फ़ाइल की और सात लोगों को अभियुक्त बनाया.

पुलिस ने 286 लोगों को गवाह बनाया. पुलिस ने दावा किया कि जाँच से ये पता चला है कि मक्का मस्जिद धमाके के बाद हुई पुलिस फ़ायरिंग के कारण ये धमाके किए गए थे.

जाँच से ये भी पता चला कि धमाकों में आईईडी का इस्तेमाल किया गया और इन्हें टिफ़िन बॉक्स में रखा गया.

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