चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा: 1 महीना, 19 कार्यदिवस और कई अहम मामले

  • टीम बीबीसी हिंदी
  • दिल्ली
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दीपक मिश्रा

चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर होने जा रहे हैं. उनके कार्यकाल में अब क़रीब 20 दिन बचे हैं और उनके सामने कई ऐसे मामले हैं जो देश की दशा और दिशा बदलने का दमखम रखते हैं.

कम से कम दस ऐसे मुकदमे हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से व्यवस्था या फ़ैसला आना है. इनमें राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाने वाला राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला भी है, जो अगले कुछ हफ़्ते में सामने होगा.

इसके अलावा चीफ़ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच के सामने आधार कार्ड का भविष्य भी तय होगा.

2 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पीठों ने कई अहम मामलों में फ़ैसला सुरक्षित रखा है और उम्मीद जताई जा रही है कि रिटायरमेंट से पहले इनमें से कुछ पर फ़ैसला आ सकता है.

इनमें प्रमुख मामले हैं:

आधार: कई याचिकाओं में 2016 आधार एक्ट की वैधानिकता को चुनौती दी गई है. इसके अलावा सरकार की तरफ़ से जारी अधिसूचनाओं को भी चैलेंज किया गया है.

एडल्टरी: कुछ लोग चाहते हैं कि आईपीसी के सेक्शन 497 में बदलाव किया जाए. इसके मुताबिक एडल्टरी (व्यभिचार) के अपराध की सज़ा केवल पुरुष को दी जाती है, लेकिन याचिकाकर्ता चाहते हैं कि इसे जेंडर न्यूट्रल बनाया जाए.

राजनीति का अपराधीकरण: सुप्रीम कोर्ट इस बात का फ़ैसला भी करेगी कि जिन नेताओं के ख़िलाफ़ आपराधिक मामलों में चार्जशीट दाख़िल की गई है, क्या उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए.

सांसद या वकील: सुप्रीम कोर्ट इस बात का फ़ैसला भी करेगी कि वकालत की पढ़ाई कर चुके सांसद क्या किसी मामले की पैरवी कर सकते हैं?

अयोध्या: शीर्ष अदालत इस बात का निर्णय करेगी कि क्या एम इस्मायल फ़ारुक़ी बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया में पांच जजों की संवैधानिक पीठ के आदेश को दोबारा परखेगी या नहीं.

सबरीमला: याचिकाकर्ताओं ने केरल के सबरीमला मंदिर में प्रवेश को लेकर लगी उम्र संबंधी पाबंदियों पर भी सवाल उठाए हैं.

प्रमोशन में आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर भी निर्णय लेना है कि क्या 12 साल पुराने मामले में बदलाव की ज़रूरत है या नहीं? 2006 में सर्वोच्च अदालत ने सार्वजनिक क्षेत्र में एससी/एसटी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण के फ़ायदों को लेकर नियम बनाए थे.

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