अटल विकास यात्रा से अटल की तस्वीर ही ग़ायब

  • 6 सितंबर 2018
छत्तीसगढ़ बीजेपी इमेज कॉपीरइट Alok Putul/BBC

छत्तीसगढ़ में बुधवार का दिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम रहा.

राज्य की भाजपा सरकार द्वारा अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर शुरू की गई 'अटल विकास यात्रा' के कई-कई पन्नों के विज्ञापन अख़बारों में छाए हुए थे.

भाजपा के इन विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह और राज्य भाजपा के अध्यक्ष धरमलाल कौशिक की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी हुई थीं.

रायपुर से लेकर बिलासपुर और राजनांदगांव तक इस विकास यात्रा की धूम थी. इस 'अटल विकास यात्रा' के आकर्षक कार्ड छपवाए गए थे जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर छपी हुई थी.

रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव की सड़कों पर पोस्टर थे, भाजपा नेताओं के कटआउट्स थे, मंचों पर नेताओं की बड़ी-बड़ी तस्वीरों वाले बैकड्रॉप थे. स्थानीय समाचार चैनलों पर कई-कई घंटों के सीधे प्रसारण चल रहे थे.

इस विकास यात्रा की शुरुआत करने के लिए ख़ुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी छत्तीसगढ़ पहुंचे थे. जिस मंच से उन्होंने भाषण दिया, उस विशालकाय मंच के बैकड्रॉप में एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर थी, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री रमन सिंह और अमित शाह की तस्वीर लगी थी.

बिलासपुर और राजनांदगांव के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के हज़ारों लोग इकट्ठे हुए हुए.

लेकिन इन सबके बीच अटल बिहारी वाजपेयी कहीं नहीं थे. अख़बार, पोस्टर, कटआउट्स, सभाओं के लिए बनाए गए बैकड्रॉप में अटल बिहारी वाजपेयी की एक पासपोर्ट आकार की भी तस्वीर नहीं थी.

कांग्रेस की नाराज़गी

अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर शुरु की गई इस 'अटल विकास यात्रा' से अटल बिहारी वाजपेयी को ही 'ग़ायब' कर दिये जाने से अब कांग्रेस पार्टी नाराज़ है.

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव कहते हैं-"अटल जी की तस्वीर ज़रूरी नहीं है, अटल जी तो लोगों के दिल में बसे हैं."

लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी डॉक्टर करुणा शुक्ला ऐसा नहीं मानतीं.

इमेज कॉपीरइट BJP Chhattisgarh

कभी भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा की सांसद रहीं करुणा शुक्ला अब कांग्रेस पार्टी में हैं.

डॉक्टर करुणा शुक्ला कहती हैं-"अटल जी को भाजपा ने उस दिन ही भुला दिया था जिस दिन अटल जी प्रधानमंत्री नहीं रहे, सांसद नहीं रहे और बीमार पड़ गए थे. कभी किसी ने उनका हाल-चाल लेने की ज़रूरत नहीं समझी. उन्हें सभी जगहों से ग़ायब कर दिया गया. अब चुनावी साल में भाजपा उनके सहारे अपनी नाव पार कराना चाहती है."

वाजपेयी से तुलना पर झुँझलाते होंगे नरेंद्र मोदी?

अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के रिश्ते कैसे रहे

करुणा शुक्ला का कहना है कि छत्तीसगढ़ और देश में लगातार अटल बिहारी वाजपेयी का अपमान किया गया और अब उनकी यात्रा के नाम पर भी ढोंग किया जा रहा है.

मंत्रियों के ठहाके

डॉक्टर करुणा शुक्ला इस बात को याद दिलाना नहीं भूलतीं कि जब देश भर में अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा निकली हुई थी, तब छत्तीसगढ़ में क्या हुआ था.

वे कहती हैं-"रायपुर के भाजपा कार्यालय में अटल जी का अस्थि कलश रखा था, आयोजन चल रहा था और मंच पर राज्य के दो मंत्री टेबल पर हाथ मार-मार कर ठहाके लगा रहे थे जिसे पूरे देश ने देखा. रमन सिंह की मुस्कुराती हुई तस्वीर मीडिया में भी आई. मध्यप्रदेश में अस्थि कलश के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की हंसती हुई तस्वीर भी बताती है कि इन सबके मन में अटल जी के प्रति कितनी श्रद्धा है."

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का भी दावा है कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ के लिए यह सब कर रही है. अस्थि कलश यात्रा, फिर गांव-गांव से मिट्टी एकत्र कर उनकी समाधि बनाने की कोशिश को जोगी महज़ चुनावी पैंतरा मानते हैं.

जोगी कहते हैं, "अब ये चाहे जो भी कर लें, अटल जी की विरासत का लाभ इन्हें नहीं मिलने वाला है. इनके मन में अटल जी के लिए कोई सम्मान का भाव नहीं है."

इमेज कॉपीरइट BJP Chhattisgarh

वाजपेयी के 10 फ़ैसले जिनके आईने में इतिहास उन्हें तौलेगा

कैसी थी अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी की दोस्ती

लेकिन मुख्यमंत्री रमन सिंह के सांसद बेटे अभिषेक सिंह इससे इंकार करते हैं.

अटल विकास यात्रा के पूरे-पूरे पन्ने के विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तस्वीर लगाए जाने और अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर को जगह नहीं दिए जाने को लेकर उनके पास अपने तर्क हैं.

वे कहते हैं, "विज्ञापन देते समय अलग-अलग कार्यकर्ता रहते हैं, अलग-अलग लोग रहते हैं. लेकिन मुझे लगता है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पूरा छत्तीसगढ़ अटल जी के आशीर्वाद से निर्मित हुआ है."

भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव भी अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति सम्मान दर्शाने के छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं की लंबी फ़ेहरिस्त गिनाते हैं.

नया रायपुर नहीं अटल नगर

इमेज कॉपीरइट BJP Chhattisgarh

असल में जब अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ तो मुख्यमंत्री रमन सिंह समेत उनके मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्य उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए. उसके बाद जब लौट कर मंत्रिमंडल की बैठक की तो मंत्रिमंडल ने राज्य के बिलासपुर विश्वविद्यालय का नाम बदल कर अटल विश्वविद्यालय कर दिया. राजनांदगांव के मेडिकल कॉलेज का नाम बदल कर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर दिया गया.

सेंट्रल पार्क, पावर प्लांट और एक्सप्रेस-वे का नाम भी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रख दिया गया.

सरकार ने हर साल एक कवि को अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का पुरस्कार देने, छत्तीसगढ़ के हर ज़िले में अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्ति लगाने, रायपुर में एक स्मारक बनाने, पाठ्य पुस्तकों में अटल बिहारी वाजपेयी की कहानी शामिल करने, त्रि-स्तरीय पंचायतों और नगरीय निकायों के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन पुरस्कार देने के फ़ैसले पर भी मुहर लगाई.

सरकार ने सप्ताह भर के भीतर नया रायपुर का नाम भी बदल दिया. एनआरडीए यानी नया रायपुर डिवेलपमेंट अथॉरिटी का नाम बदल कर अंडा यानी अटल नगर डिवेलपमेंट अथॉरिटी कर दिया गया.

इमेज कॉपीरइट BJP Chhattisgarh

लेकिन अस्थि कलश यात्रा के दौरान मंत्रियों के ठहाके और अब अटल विकास यात्रा के दौरान सभी जगहों से अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीरों की अनुपस्थिति को कांग्रेस चुनावी मुद्दा बना ले तो आश्चर्य नहीं होगा.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भूपेश बघेल कहते हैं, "भाजपा अटल जी का सम्मान नहीं, अपमान कर रही है. यह सब दो महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हो रहा है और जनता भी इनकी असलियत को जान चुकी है."

ये भी पढ़ें -

कौन हैं वाजपेयी को मुखाग्नि देने वाली नमिता

अटल बिहारी वाजपेयी के पसंदीदा भोजन कौन से

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, इंस्टाग्रामऔर ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए