भारतीय सिखों के लिए करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलेगा पाकिस्तान

  • 7 सितंबर 2018
करतारपुर साहिब गुरुद्वारा इमेज कॉपीरइट GURINDER BAJWA/BBC

पाकिस्तान के सूचना मंत्री फ़वाद चौधरी ने कहा है कि पाकिस्तान सरकार जल्द ही भारत से करतारपुर गुरुद्वारा साहिब आने वाले सिख श्रद्धालुओं के लिए कॉरिडोर खोलने जा रही है.

इस्लामाबाद में बीबीसी पत्रकार शुमाइला जाफ़री से बातचीत के दौरान चौधरी ने कहा, "करतारपुर सरहद खोली जा रही है. गुरुद्वारे तक आने के लिए वीज़ा की ज़रूरत नहीं होगी. वहां तक आने के लिए रास्ता बनाया जाएगा. दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु टिकट ख़रीद कर आएंगे और माथा टेककर वापस जाएंगे. इस तरह एक सिस्टम बनाने की कोशिश हो रही है."

गुरुद्वारा श्री करतापुर साहिब भारतीय सीमा से पाकिस्तान में करीब चार किलोमीटर की दूरी पर है. गुरुद्वारा के दर्शन को लेकर कॉरिडोर खोलने की मांग काफी पहले से उठाई जा रही है, लेकिन पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की ताजपोशी के कार्यक्रम में जाने के बाद से मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आया.

इमेज कॉपीरइट GURPREET CHAWLA/BBC

'भारत सरकार भी एक कदम उठाए'

फ़वाद चौधरी ने कहा कि गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के लिए जल्द ही ये कॉरिडोर तैयार हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इमरान सरकार भारत के साथ बातचीत करना चाहती है. उन्होंने कहा कि सरकार अमन, शांति के एजेंडे के साथ आगे बढ़ रही है.

नवजोत सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में मीडिया से रूबरू होते हुए कहा, "जो लोग सियासत करते हैं वो इसे असंभव कहा करते थे. अब यह हकीकत बनने जा रहा है."

'मैं ख़ान साहिब का धन्यवाद करता हूं. अब श्रद्धालु बिना वीजा के करतारपुर साहिब के दर्शन कर सकेंगे. मैं इसे कॉरिडोर से भी ऊपर देखता हूं. ये दो देशों के बीच फासले को कम कर सकता है.'

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
बीजेपी को वोटबैंक की फ़िक्र शायद इसलिए भारत नहीं दे रहा है अमन की पहल का जवाब.

सिद्धू ने कहा, "मैं सिर्फ़ मोहब्बत और अमन का पैगाम लेकर गया था और अमन हमें मिला है. धर्म आपको जोड़ सकता है. हिंदुस्तानी सरकार से विनती करता हूं कि आप भी एक कदम चलें. ये खुशियों से भरी बहार है. ये उसकी नेहमत है. नकारात्मक सोच वालों के मुंह पर ढक्कन लगा दिया गया है. यह करारा जवाब है.'

सिखों का धार्मिक स्थल करतापुर साहिब

पाकिस्तान में स्थित इस गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के लिए भारतीय सीमा पर बीएसएफ की तरफ से बनाए गए दर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. इसका संबंध सिखों के पहले गुरु श्री गुरुनानक देव से जुड़ा है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption इमरान के शपथग्रहण समारोह में गए थे सिद्धू

गुरुनानक ने रावी नदी के किनारे एक नगर बसाया और यहां खेती कर उन्होंने 'नाम जपो, किरत करो और वंड छको' (नाम जपें, मेहनत करें और बांट कर खाएं) का फलसफा दिया था. इतिहास के अनुसार गुरुनानक देव की तरफ से भाई लहणा जी को गुरु गद्दी भी इसी स्थान पर सौंपी गई थी. जिन्हें दूसरे गुरु अंगद देव के नाम से जाना जाता है और आखिर में गुरुनानक देव ने यहीं पर समाधि ली थी.

सुखदेव सिंह और अवतार सिंह बेदी जो गुरुनानक देव की सोलहवीं पीढ़ी के तौर पर गुरुद्वारा चोला साहिब डेरा बाबा नानक में सेवाएं निभा रहे हैं. उन्होंने बताया, 'करतारपुर साहिब एक ऐसा स्थान है जहां गुरुनानक देव ने अपने जीवन के सत्रह साल, पांच महीने और नौ दिन बिताए हैं और गुरु साहिब का पूरा परिवार का भी करतारपुर साहिब में आकर बस गया था. गुरु साहिब के माता-पिता का देहांत भी यहीं हुआ था.'

इमेज कॉपीरइट GURPREET CHAWLA/BBC

'कॉरिडोर के लिए अरदास'

करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलने की मांग को लेकर अलग-अलग सिख संगठनों की तरफ से यहां खास दिनों पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं और करतारपुर साहिब दर्शन स्थल पर पहुंच कर अरदास की जाती है.

अकाली दल के नेता कुलदीप सिंह वडाला के तरफ से 2001 में 'करतारपुर रावी दर्शन अभिलाखी संस्था' की शुरुआत की गई थी और 13 अप्रैल 2001 के दिन बैसाखी के दिन अरदास की शुरुआत हुई.

खारिज कर दी गई थी कॉरिडोर की मांग

जुलाई 2012 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की प्रमुख अवतार सिंह मक्कड़ ने कॉरिडोर खोलने की वकालत करते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने 1999 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पाकिस्तान यात्री के वक्त इसे खोलने की पेशकश की थी. लेकिन भारत की तरफ से बात आगे नहीं बढ़ी.

स्थायी कॉरिडोर की मांग करने वालों की मांग उस समय टूट गई जब 2 जुलाई 2017 को शशि थरूर की अध्यक्षता वाले विदेश मामलों की सात सदस्यीय संसदीय समिति के सदस्यों ने इस कॉरिडोर की मांग को रद्द कर दिया था जिसमें यह कहा गया था कि मौजूदा राजनीतिक माहौल इस कॉरिडोर को बनाने के अनुकूल नहीं है.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
सिद्धू के बाजवा से गले मिलने पर पाकिस्तान में प्रतिक्रिया

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे