तमिलनाडु: किसानों से मिलने की कोशिश पर दिन भर हिरासत में रखे गए योगेंद्र यादव

  • 9 सितंबर 2018
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स्वराज पार्टी के नेता और जाने-माने चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव को शनिवार को तमिलनाडु पुलिस ने पूरा दिन हिरासत में रखा. वह उन किसानों से मिलने जा रहे थे जिनकी ज़मीन चेन्नई-सलेम 8 लेन एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए ली जा रही है.

हालांकि, आधी रात से पहले पुलिस ने बिना कोई कारण बताते हुए उन्हें रिहा कर दिया.

पुलिस ने उन्हें तिरुवनमलाई के एक मैरिज हॉल में क़रीब पांच घंटे तक हिरासत में रखा था. बाद में उन्हें गिरफ़्तार किया गया जब उन्होंने पुलिस से पूछा कि उन्हें किन नियमों के तहत किसानों से मिलने से रोका जा रहा है.

अपनी गिरफ़्तारी से ठीक से योगेंद्र यादव ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''जिस कानून के तहत वो मुझे किसानों से मिलने से रोकना चाहते हैं वो विरोध प्रदर्शन पर लागू होता है. मैं वहां कोई प्रदर्शन करने नहीं जा रहा हूं. मैं किसानों से उनके घर में मिलने और बात करने जा रहा हूं.''

जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के जवाब में योगेंद्र यादव ने लिखा, ''आप जानते हैं कि यह भारतीय कानूनों का पूरी तरह उल्लंघन और आप इसके लिए जवाबदेह रहेंगे. आपका आदेश स्पष्ट रूप से ग़ैर कानूनी है क्योंकि यह किसी के घर में जाकर मिलने पर लागू नहीं होता है.''

क्या है मामला

तमिलनाडु में बनाया जा रहा आठ लेन हाइवे 272 किलोमीटर में फैला होगा और पांच ज़िलों सलेम, धर्मपुरी, कृष्णानगर, तिरुवनमलाई और कांचीपुरम से होकर गुज़रेगा.

योगेंद्र यादव की गिरफ़्तारी के बाद यादव के किसी सहकर्मी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उन्हें किस धारा में गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस से इस बात का भी कोई जवाब नहीं मिल रहा था कि उन्हें कब तक हिरासत में रखा जाएगा.

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सांसद को मिलने से रोका

तमिलनाडु में रहने वाले कुछ लोग तमिलनाडु पुलिस की कार्रवाई और योगेंद्र यादव की गिरफ़्तारी से बिल्कुल भी हैरान नहीं थी.

जल्लीकट ट्रस्ट के सदस्य हिमाकरन अवागुला ने कहा, ''इस हाइवे का विरोध कर रहे किसानों से किसी को मिलने नहीं दिया जा रहा है. अगर कोई उनसे मिलने की कोशिश करता है तो पुलिस उसे तुरंत गिरफ़्तार कर लेती है. सामान्य तौर पर उन्हें शाम के 5 या 6 बजे तक हिरासत में रखा जाता है और अगर वो निर्देशों को नहीं मानते हैं तो उन्हें ज़िला छोड़ने के लिए कहा जाता है. अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें गिरफ़्तार करके मजिस्ट्रेट के सामने ले जाते हैं.''

हिमाकरन ने बताया कि पुलिस ने धर्मपुरी से लोकसभा सांसद और पीएमके नेता अंबुमणि रामदॉस तक को उनके ​ही संसदीय क्षेत्र में जाने और लोगों से मिलने से रोक दिया.

अंबुमणि रामदॉस ने भी इस बात की पुष्टि की और बताया, ''जब मैं मद्रास हाइकोर्ट गया तो कोर्ट को भी इस बात की हैरानी हुई कि मुझे मेरे संसदीय क्षेत्र में जाने नहीं दिया गया. ये बहुत अजीब है कि चेन्नई और सलेम के बीच पहले से ही तीन हाइवे हैं और किसी ने भी चौथे हाइवे की मांग नहीं की थी. मुख्यमंत्री पलानीसामी ने सिर्फ एक दिन में ये परियोजना केंद्र सरकार से मंज़ूर करा ली थी.''

रामदॉस ने कहा, ''इस हाइवे के लिए तीन पहाड़ियां काटी जाएंगी. तिरुवनमलाई में गौती और वेरिअप्पन पहाड़ी और सलेम जिले में गंजम पहाड़ी. तीनों ही लौह अयस्क से भरपूर हैं. यहां लौह अयस्क की लूट होगी.''

उन्होंने बताया कि योगेंद्र यादव तिरुवनमलाई में इसलिए आए थे क्योंकि किसानों ने उन्हें बुलाया था. इन पांच जिलों में एक तरह से 'लघु आपातकाल' लगा दिया गया है.

गिरफ़्तारी की आलोचना

रात को पुलिस ने योगेंद्र यादव को रिहा कर दिया. इसकी जानकारी योगेंद्र यादव ने फेसबुक पोस्ट करके भी दी. उन्होंने लिखा कि आखिरकार तमिलनाडु सरकार नरम पड़ी. हमारे साथ हिरासत में लिए गए सभी किसानों (करीब 40) को रिहा कर दिया गया है. मैं किसानों से मिलने जा रहा हूं.

मगर उनकी गिरफ़्तारी का नेता​ओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी विरोध किया. अभिनेता और नेता कमल हासन ने भी ट्वीट करके योगेंद्र यादव की गिरफ़्तारी की आलोचना की.

डीएमके नेता एमके स्टालिन ने ट्वीट किया, ''डीएमके स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव की जबरन हिरासत की सख्ती से निंदा करती है जो चेन्नई—सलेम एक्सप्रेस वे परियोजना से प्रभावित होने वाले किसानों का समर्थन करने आए थे. असहिष्णु एआईएडीएमके सरकार को लोगों के अलग मत रखने और विरोध करने का लोकतांत्रितक अधिकारी छिनने की क़ीमत चुकानी होगी.''

जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने भी योगेंद्र यादव की गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए ट्वीट किया, ''तमिलनाडु में पूरी तरह पुलिस राज है जिसे दिल्ली से नियंत्रित किया जा रहा है. आख़िर किस क़ानून के तहत पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किया. सिर्फ़ ज़मीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों से मिलने के लिए. अघोषित आपातकाल!''

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