बिहार में तीन की मौत मॉब लिंचिंग या बदले की कार्रवाई

  • मनीष शांडिल्य
  • बीबीसी हिंदी के लिए

बिहार के बेगूसराय ज़िले में शुक्रवार को भीड़ की पिटाई से तीन लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज कर ली है.

शुक्रवार को हुई मॉब लींचिंग की यह घटना छौड़ाही ओपी क्षेत्र की है. यहां के एएसआई आमोद कुमार के बयान पर शनिवार देर शाम प्राथमिकी दर्ज हुई है.

पुलिस ने इस मामले में छह लोगों को नामजद किया और 150 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है. हालांकि मामले में अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

इसके साथ ही छौड़ाही ओपी के थानाध्यक्ष सिंटू कुमार झा को सस्पेंड कर दिया गया है. उन्हें घटना की सूचना मिलने के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप में सस्पेंड किया गया है. बेगूसराय एसपी के मुताबिक एसएचओ अगर समय पर वारदात की जगह पर पहुंचते तो इस बड़ी घटना को टाला जा सकता था.

क्या है मामला?

पुलिस के मुताबिक मुकेश महतो, श्याम सिंह और हीरा सिंह एक बच्ची के अपहरण की नीयत से ज़िले के नारायण पीपड़ गांव के एक सरकारी स्कूल पहुंचे थे. इस छात्रा की माँ अपनी एक दूसरी बेटी के साथ अपने मायके चली गई हैं.

पुलिस के मुताबिक छात्रा पहले से ही अपने ननिहाल में थी जबकि उसके पिता बाहर मज़दूरी करते हैं.

इसके बाद भीड़ ने इन तीनों की पिटाई की जिसके बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई.

ज़िला पुलिस के मुताबिक इस मामले में मारे गए लोगों में से किसी के परिजन की ओर से अब तक कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया है. पुलिस ने तीनों मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए हैं.

तनाव नहीं मगर लोग आशंकित

मृतकों में से दो लोगों के गांव कुंभी और वारदात की जगह के बीच क़रीब दो किलोमीटर की दूरी है.

इस पर बीबीसी ने एसपी से पूछा कि घटना के बाद इलाके में क्या कोई तनाव है? जवाब में एसपी ने कहा, ''मैंने नारायण पीपड़ में तत्काल एक पुलिस पिकेट खोलने का आदेश दिया है. वैसे इलाके में कोई तनाव नहीं है. मारे गए लोग अपराधी थे. इनमें से एक चार दिन पहले ही छूट कर आया था. इनसे इलाके के लोग पहले से ही आहत थे क्योंकि ये सभी इसी इलाके में अपराध किया करते थे.''

स्थानीय लोगों ने भी फ़ोन पर बताया कि इलाके में तनाव नहीं है, लेकिन नारायण पीपड़ गांव के लोग एफ़आईआर में नाम आने की आशंका से दहशत में हैं. साथ ही शनिवार को वो सरकारी स्कूल भी बंद रहा जिसके अहाते में शुक्रवार को यह वारदात हुई थी.

अब पुलिस ने गांव में गश्ती के लिए 2 अफ़सरों सहित 10 पुलिसकर्मी तैनात कर दिए हैं.

अपराधियों ने प्रिंसिपल पर ताने थे बंदूक

बेगूसराय ज़िले के छौड़ाही पुलिस आउट पोस्ट क्षेत्र में हुई शुक्रवार की इस घटना का विवरण देते हुए एसपी आदित्य कुमार ने ये बातें बताईं, ''स्कूल की प्रिंसिपल नीमा कुमारी ने बताया कि तीन अपराधियों ने आकर उन पर बंदूक तान दी. बंदूक तानकर उन्होंने एक बच्ची के बारे में पूछा. इसके जवाब में प्रिसिंपल ने कहा कि वह बच्ची स्कूल नहीं आई है, आप उनके घर चले जाइए. इस पर अपराधियों ने प्रिसिंपल से ही बच्ची को बुलाने को कहा. इस दौरान उन्होंने बाकी बच्चों को वहां से भगा दिया. भागते बच्चों ने जब शोर मचाया तो भीड़ इकट्ठी हो गई.''

एसपी आदित्य कुमार ने आगे बताया, ''जब तक पुलिस पहुंची तब तक भीड़ इन तीनों की बुरी तरह से पिटाई कर चुकी थी. पुलिस के पहुंचने तक उनकी सांसें चल रही थीं. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया जहां उनकी मौत हो गई.''

पुलिस के मुताबिक स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका नीमा कुमारी से भी प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी.

गांव के ही राम उदित भी एसपी आदित्य कुमार की इस बात की तस्दीक करते हैं कि कमरे में बंद श्याम और हीरा सिंह के ललकारने के कारण भी भीड़ का गुस्सा बढ़ा.

उन्होंने बताया, "दोनों ये कह रहे थे कि बच गए तो सबको भून के रख देंगे. इसके बाद भीड़ ने पहले कमरे में घुस कर उनको मारा और फिर बाहर निकाल कर भी उनकी पिटाई की."

'प्रतिक्रिया में हुई घटना'

पुलिस के मुताबिक मारे गए तीनों विशुद्ध अपराधी थे और इन पर आर्म्स एक्ट, छीनने के अपराध से लेकर हत्या तक के आरोप थे. पुलिस का कहना है कि मृतकों में से दो को जब एक कमरे में बंद कर दिया गया था तो वे बाहर निकलने पर भीड़ को देख लेने की धमकी देते हुए ललकार रहे थे. इससे भीड़ और उग्र हो गई और फिर उन्हें कमरे से बाहर निकालकर पीटा.

वहीं बिहार के पुलिस महानिदेशक केएस त्रिवेदी का कहना है कि शुक्रवार की घटना मॉब लिंचिंग है नहीं या नहीं, यह बहस का विषय है.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''मॉब लिंचिंग में कारण पता नहीं होता है, आदमी इनोसेंट होता है. कई बार गाय मारने आदि के नाम पर लोग हल्ला मचा देते हैं और फिर घटना घट जाती है. यह ऐसी घटना नहीं है. यह घटना रिएक्शन की है. हथियारबंद अपराधियों ने एक नाबालिग लड़की को किडनैप करने की कोशिश की. इसके रिएक्शन में लोगों ने उनको पीटा जिसमें उनकी मौत हो गई. अब आप समझें इसे क्या कहना है.''

नारायण पीपड़ के ग्रामीण भी बताते हैं कि मारे गए तीनों शख्स अपराधी प्रवृति के थे. जैसा कि एक गांव वाले राम उदित राय ने बताया, "कुछ दिनों पहले रंगदारी नहीं देने के कारण मुकेश महतो गांव आकर आधी रात को एक व्यक्ति की उसी के घर में पिटाई की थी. हाल के महीनों में गांव के आस-पास मोटरसाइकिल छीनने की वारदातों के पीछे भी मुकेश के गैंग का हाथ था. इन लोगों के कारण गांव की बहू-बेटियों का दूर खेत मे जाना मुश्किल हो गया था."

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