दिल्ली में विपक्षी दलों ने किया अलग अलग प्रदर्शन

  • 10 सितंबर 2018
दिल्ली में बंद

डीज़ल-पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों और रुपए के घटते मूल्य के खिलाफ विपक्षी दलों के भारत बंद के दौरान कांग्रेस और वाम दलों ने सोमवार को दिल्ली में अलग अलग स्थानों पर प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया.

कांग्रेस ने राजघाट से लेकर रामलीला मैदान तक रैली निकाली जिसका नेतृत्व पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी कर रहे थे.

कांग्रेस के प्रदर्शन में कई और विपक्षी दल शामिल हुए जिनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और लोकतांत्रिक जनता दल के अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा और झारखंड विकास मोर्चा के प्रतिनिधि शामिल थे.

पहले आम आदमी पार्टी ने खुद को कांग्रेस के प्रदर्शन से अलग रखने की बात कही थी. मगर आम आदमी पार्टी के राज्य सभा के सदस्य संजय सिंह भी कांग्रेस के प्रदर्शन में शामिल हुए.

आम आदमी पार्टी ने संसद मार्ग पर वाम दलों के प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया.

सीताराम येचुरी, डी राजा, नीलोत्पल बसु और आम आदमी पार्टी की आतिशी ने कई कार्यकर्ताओं के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन जाकर गिरफ्तारियां दीं. बाद में सबको रिहा कर दिया गया.

नज़र नहीं आए सपा-बसपा नेता

कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पूर्व प्रधनमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के अलावा शरद यादव, शरद पवार, हेमंत सोरेन, बाबूलाल मरांडी भी शामिल थे. मगर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के नेता कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से नदारद रहे.

हांलाकि वाम दलों ने अपने प्रदर्शन के दौरान भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस-दोनों को अपने निशाने पर लिया. सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ़ इंडिया के रमेश शर्मा ने प्रदर्शन के दौरान बीबीसी से कहा कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. उनका कहना था कि दोनों ही दलों ने अपने कार्यकाल के दौरान विरोध में उठने वाले स्वरों को कुचलने का काम किया है.

वहीं प्रदर्शन के दौरान ही पत्रकारों से बात करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी का कहना था कि आम लोगों को आर्थिक मार के साथ-साथ साम्प्रदायिकता का दंश भी झेलना पड़ रहा है. उनका कहना था कि लोगों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

'सब कुछ वैश्विक परिस्थितियों की वजह से'

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बीबीसी से कहा कि यह अप्रत्याशित है जब रुपया डॉलर के मुक़ाबले लुढककर 72 के पार हो गया, पेट्रोल 83 रूपए प्रति लीटर के पार हो गया, डीज़ल 73 रूपए प्रति लीटर के पार हो गया जबकि रसोई गैस का सिलिंडर 800 रूपए के पार हो गया.

हालांकि कांग्रेस के शासनकाल में भी डॉलर के मुक़ाबले रुपया लुढ़का था और पेट्रोलियम उत्पाद भी महंगे हुए थे. उस वक़्त कांग्रेस पार्टी की सरकार ने इसका बचाव करते हुए कहा था कि यह सब कुछ वैश्विक परिस्थितियों की वजह से हो रहा है.

आज भारतीय जनता पार्टी भी यही कहकर अपना बचाव कर रही है.

वैसे तो दिल्ली में बंद का ख़ास असर नहीं हुआ और जन जीवन सामान्य रूप से चलता रहा, देश के कई हिस्सों में बंद का ख़ासा प्रभाव देखा गया. वाम दलों के नेता रमेश शर्मा का कहना था कि दिल्ली में उनका प्रदर्शन सांकेतिक था. प्रदर्शन का मक़सद था लोगों को जागरूक करना.

वहीँ दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में भी बंद का ज़्यादा असर नहीं देखा गया. हालांकी पूर्वी राज्य ओडिशा में कुछ स्थानों पर कांग्रेस के कार्यकर्ता जबरन बंद कराते नज़र आए.

भारतीय जनता पार्टी के नेता और क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पत्रकारों से बात करते हुए विपक्षी दलों के भारत बंद को विफल बताया और कहा कि देश के स्थानों पर बंद के दौरान जो हिंसक घटनाएं हुईं हैं वो निंदनीय हैं.

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