नन रेप केस: बिशप फ़्रैंको मुलक्कल ने पेश किये अपने दावे

  • 12 सितंबर 2018
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पंजाब में जालंधर के बिशप फ़्रैंको मुलक्कल पर केरल की एक नन ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.

बिशप फ़्रैंको मुलक्कल जालंधर के सेक्रेड हार्ट कैथोलिक चर्च में रहते हैं और ये उनका धार्मिक अधिकार क्षेत्र भी है.

बीबीसी से ख़ास बातचीत में बिशप मुलक्कल ने दावा किया कि उनके ख़िलाफ़ लगे सभी आरोप झूठे हैं.

उन्होंने कहा, "मेरे ख़िलाफ़ जो आरोप हैं, वो सिर्फ़ झूठी कहानियाँ हैं. उनमें कोई सच्चाई नहीं है. शिकायतकर्ता एक वयस्क महिला है. ऐसा कैसे हो सकता है कि एक महिला के साथ कोई इतनी बार और इतने लंबे समय तक लगातार रेप करे."

जबकि केरल में पुलिस को जो शिकायत मिली है उसमें नन ने ये दावा किया है कि मई 2014 से लेकर सितंबर 2016 के बीच बिशप फ़्रैंको मुलक्कल ने कई बार उनका यौन शोषण किया.

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विरोध-प्रदर्शन

किसी भी चर्च के धार्मिक अधिकार क्षेत्र में एक बिशप सबसे बड़ा पदाधिकारी होता है. भारत में इस वक़्त कुल 145 बिशप हैं.

इस मामले में जालंधर के बिशप का ये भी दावा है कि नन के ख़िलाफ़ एक अलग शिकायत में उन्होंने जाँच की थी जिसके बाद नन पर कार्रवाई भी हुई थी. उसी का बदला लेने के लिए वो ऐसा कर रही है.

इस बीच, केरल में नन महिलाओं के एक समूह ने इस मामले पर पुलिस की निष्क्रियता के ख़िलाफ़ सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन आयोजित किये हैं. वहीं दूसरी ओर, जालंधर स्थित संस्था मिशनरी ऑफ़ जीसस ने कोच्चि में सभी ननों से इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल न होने का आग्रह किया है.

केरल में हुए विरोध प्रदर्शनों में कैथोलिक लैटिन चर्च के सदस्यों समेत कई स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया.

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'कुछ सबूत मिले हैं'

शिकायतकर्ता का कहना है कि 28 जून 2018 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से पहले उन्होंने चर्च के बड़े अधिकारियों से बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ बलात्कार के आरोपों की चर्चा की थी, लेकिन नन का आरोप है कि किसी ने उनकी नहीं सुनी.

शिकायतकर्ता नन का कहना है कि सार्वजनिक तौर पर विरोध प्रदर्शन करने से पहले उन्होंने जनवरी, जून और सितंबर में दिल्ली में बैठने वाले पोप के प्रतिनिधियों को भी चिट्ठी लिखी थी.

केरल कैथोलिक चर्च सुधार आंदोलन के जॉर्ज जोसेफ़ ने इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता के ख़िलाफ़ केरल के उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.

जब जोसेफ़ की याचिका पर कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई हुई तब पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि उसे नन के आरोपों के पक्ष में कुछ सबूत मिले हैं, जिसके बाद कोर्ट ने पुलिस को इस मामले में सावधानी से काम करने को कहा था.

जॉर्ज जोसेफ़ ने चार प्राथमिक बिंदुओं पर अदालत से निर्देश देने की प्रार्थना की है.

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प्रदर्शनों को मिल रहा है समर्थन

बीबीसी से बातचीत में जॉर्ज जोसेफ़ ने कहा, "हम चाहते हैं कि बिशप को जल्द से जल्द गिरफ़्तार किया जाये. इस मामले की पुलिस जाँच हाई कोर्ट की निगरानी में हो. बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के विदेश यात्रा करने पर प्रतिबंध लगे और यौन दुर्व्यवहार के पीड़ितों के लिए गवाह सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किया जाये."

वहीं अपने बचाव में बिशप फ़्रैंको मुलक्कल कहते हैं कि नन का पारिवारिक जीवन काफ़ी पेचीदा रहा है. वो एक पुरुष के साथ रिलेशन में थीं जो अब भी उनका पति है. इस मामले की जाँच की जा रही थी. लेकिन पूछताछ से ध्यान भटकाने के लिए नन ने उनके ख़िलाफ़ आधारहीन आरोप लगा दिये.

कोच्चि में हुए एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली सिस्टर अनुपमा इसका जवाब देती हैं. उनका कहना है, "यहाँ उल्टा पीड़िता के ख़िलाफ़ ही बेबुनियाद आरोप गढ़े जा रहे हैं. जब महिला ने अपना घर छोड़ दिया था तो उनका परिवार साथ कैसे हो सकता है. बिशप ने ही इस जोड़े पर दबाव बनाकर दोनों से एक पत्र पर हस्ताक्षर कराये थे."

इस बीच बिशप के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को समाज के अन्य वर्गों का भी समर्थन प्राप्त हो रहा है.

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इनके समर्थन में प्रदर्शन में शामिल केरल हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज कमाल पाशा ने बीबीसी से कहा, "पुलिस को अब तक अभियुक्त को हिरासत में लेना चाहिए. हाईकोर्ट के सामने जाँच अधिकारी ने जो एफ़िडेविट दाख़िल किया है, उसके मुताबिक़ बिशप को हिरासत में लेने के लिए पर्याप्त सबूत हैं."

"मुझे लगता है कि इस मामले में नन का साथ देना चाहिए. वे लोग अभियुक्त को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उसने अभी तक अग्रिम ज़मानत की याचिका भी दाख़िल नहीं की है."

पेशे से वकील और चर्च सुधार आंदोलन की सदस्य इंदुलेखा जोसेफ़ कहती हैं, "समस्या ये है कि ना तो सरकार और विपक्ष, दोनों में से कोई भी इस मुद्दे पर बोल नहीं रहा है क्योंकि सबको वोट बैंक की राजनीति करनी है. लोगों को लगता है कि बिशप का मतदाताओं पर प्रभाव है."

सायरो मालाबार चर्च के पूर्व प्रवक्ता फ़ादर पॉल थेलाकाठ ने बताया है, "शर्मनाक चुप्पी है, नन की शिकायत को कई महीने बीत चुके हैं. उन्होंने पुलिस के पास भी शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई."

फ़ादर थेलाकाठ ने बताया, "कोई फ़ैसला नहीं सुना रहा है कि कौन सही है और कौन ग़लत. लेकिन चुप्पी पीड़ादायक है."

(केरल से इमरान क़ुरैशी के इनपुट के साथ)

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