GROUND REPORT: मणिपुर में भीड़ ने फ़ारुक़ ख़ान को क्यों मार डाला?

  • 21 सितंबर 2018
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कौन था फारूक़ ख़ान?

मां का दुलारा, कामयाबी की तरफ़ कदम बढ़ाता 26-साल का नौजवान, 'बाईक चोर', या फिर मणिपुर के लिंचिंग के लंबे इतिहास में एक और नाम!

फ़ारूक़ ख़ान को पुलिस के मुताबिक़ पहले किसी बंद जगह में यातना दी गई, फिर भीड़ ने-जो उनपर स्कूटर चोरी का इलज़ाम लगा रही थी, गांव के फ़ुटबॉल मैदान में ले जाकर पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी.

अदालत के सामने बुधवार को पांच अभियुक्तों की न्यायिक हिरासत के लिए दी गई अर्ज़ी में पुलिस ने पत्थर के उस टुकड़े और लाठियों को भी बरामद करने का दावा किया है जिनसे किए गए हमले से फ़ारूक़ की मौत हो गई थी.

थौरोइजम गांव से, जहां लिंचिंग हुई, पुलिस ने बुरी तरह से जला दी गई पश्चिम बंगाल के नंबर प्लेट की एक कार भी बरामद की है जिसमें अभियुक्तों के मुताबिक़ फ़ारूक़ और उनके दो साथी गांव में हो-हल्ला मच जाने के बाद भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन गांव वाले फ़ारूक़ को धरने में कामयाब हो गए.

केस के जांच दल प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एस हेमंता ने बीबीसी से कहा कि मणिपुर पुलिस पश्चिम बंगाल पुलिस की मदद से बरामद कार की निशानदेही की कोशिश कर रही है.

फ़ारूक़ के पास कार नहीं थी

फ़ारूक़ के चाचा मुजिबुर्रहमान कहते हैं, "फ़ारूक़ ने हाल में ही तो रेस्तरां शुरु किया था, साथ ही उन्होंने फुड पैकेजिंग का बिज़नेस भी शुरु किया था, मगर उनके पास कोई कार नहीं थी."

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Image caption फ़ारुक़ की मां बेटे की याद में रह रहकर सिसकने लगती हैं

"वो बाहर रहना चाहता था लेकिन मैंने मना कर दिया कि बाप बहुत बीमार हैं .., ये कहते-कहते मां रहमजान के होंठ कांपने लगते हैं, हथेली चेहरे को जा लगते हैं और अधूरा वाक्य सिसकियों में पूरा होता है.

रेस्तरां चलाने वाले फ़ारूक़ के लिए देर रात घर आना कोई नई बात नहीं थी, 12 सितंबर को भी ऐसा ही हुआ, बीमार-बूढ़े मां-बाप सो गए लेकिन फिर सुबह से ही व्हाट्सएप पर भीड़ और फ़ारूक़ वाली अलग-अलग वीडियो व्हाट्सएप पर सर्कुलेट होने लगीं.

भाई फ़रहान घबराकर फ़ारूक़ और उसके दोस्तों को फोन करने लगे, पर इसी बीच फ़ारूक़ के फ़ोन से पुलिस ने उन्हें बताया कि उनके भाई का एक्सीडेंट हो गया है और वो इम्फ़ाल मेडिकल कॉलेज पहुंचें.

"मैं जब वहां पहुंचा तो मेरा कल तक ज़िंदा भाई मुर्दाघर में पड़ा था." कृषि विभाग में काम करने वाले फ़रहान अहमद कहते हैं.

पुलिस ने जब फ़ारूक़ के शरीर को क़ब्ज़े में लिया था तो उनके जिस्म पर गहरी चोटों के निशान थे और सर में फ्रैक्चर था. हालांकि पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट अभी नहीं आई है.

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Image caption फ़ारुक़ के बीमार पिता कहते हैं सबकुछ बेचकर बेटे को पढ़ाया था

दिल की बीमारी के मरीज़ बाप नसीब अली को हादसे का इल्म तब हुआ जब उन्होंने घर में जारी गहमागहमी को नोटिस किया.

वो कहते हैं, "मैंने उसकी पढ़ाई के लिए अपने खेत बेच दिए, कर्ज़ लिया, पेंशन गिरवी रख दी, वही मेरी आख़िरी उम्मीद था." चश्मा भी उनकी सूजी सुर्ख़ आंखों को छुपा नहीं पाता.

वो ऐसा नहीं कर सकता था

इम्फ़ाल पश्चिम के पुलिस अधीक्षक योगेशचंद्र हाओबिजाम ने बीबीसी को बताया कि जिन पांच लोगों को अबतक गिरफ्तार किया गया है उनके अलावा पुलिस ने लिंचिंग में शामिल छह अन्य की पहचान कर ली है और वो जल्द ही पुलिस की गिरफ़्त में होंगे.

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मणिपुर में फ़ारूक़ ख़ान को भीड़ ने क्यों मार डाला?

पुलिस जांच दल दोनों मामले: स्कूटर चोरी के आरोप और लिंचिंग की छानबीन साथ-साथ कर रही है, हालांकि उसका कहना है कि हत्या की जांच उसकी प्राथमिकता है क्योंकि किसी को क़ानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं.

दूसरी तरफ़ थौरोइजम में 50-60 औरतें धरने पर बैठी हैं और मांग कर रही हैं कि गिरफ्तार किए गए लोगों को छोड़ा जाए "क्योंकि वो निर्दोष हैं."

ईशांगथेम रोमा कहती हैं, "चोरी करने पर कोई किसी को ईनाम नहीं देता बल्कि उसे पीटा जाता है, हर जगह यही होता है चाहे वो अमरीका हो या पाकिस्तान. वो यहां तीन बजे सुबह में क्या कर रहा था?"

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फिर वो चिल्ला-चिल्लाकर कहने लगती हैं, "कह दो सबको कि अगर तुम्हारे घर में चोर आए तो तुम्हें अपनी हिफ़ाज़त करनी है और अगर ज़रूरत पड़े तो .....," ये कहते-कहते वो थोड़ा थम जाती हैं और आगे बोलती हैं "तो उसे कम से कम थप्पड़ तो रसीद करना ज़रूरी है."

भीड़ उनके ये कहने पर हां-हां का नारा बुलंद करती है.

"हम चार साल एक ही घर में रहे, एक ही टेबल पर साथ खाना खाया, घूमे-फिरे, पार्टी की; मुझे नहीं लगता कि उसका किरदार ऐसा था कि वो इस तरह का कोई काम कर सकता था." बैंगलुरू में ग्रैजुएशन के दिनों के फ़ारूक़ के दोस्त बुद्धि ज्ञान चोरी के इल्ज़ाम पर कहते हैं.

उनके साथ बेनहर एस भी हैं जो कहते हैं कि "चाहे कितनी मुश्किलें हो वो उनका सामना करता था, इस तरह के शॉर्टकट में उसका यक़ीन नहीं था."

बेनहर फ़ारूक़ ख़ान के गहरे दोस्तों में से थे जो उसके कुछ महीनों पहले शुरु हुए रेस्तरां भी जा चुके हैं और फ़ारूक़ ने उन्हें अपना नया पैकेज्ड प्रोडक्ट भी दिखाया था.

लिंचिग की वजह सांप्रदायिक?

पुलिस जांच की प्रक्रिया जारी है लेकिन फ़ारूक़ के अपने गांव हौरइबी से दूर आधी रात के बाद थौरोइजम में होने को लेकर कई तरह की बातें जारी है: कहा जा रहा कि उनका या उनके साथ उस रात मौजूद दो लोगों में से एक का थौरोइजम में किसी से पैसे का लेन-देन था.

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ये बातें सिर्फ़ कुछ-कुछ सेंकंड के उन वीडियोज़ के आधार पर कही जा रही हैं जिसमें वो पूछे जाने पर दो लोगों का नाम ले रहे हैं. इन वीडियोज में फ़ारूक़ के बदन पर ज़ख्म के निशान दिख रहे.

फ़िलहाल उनके साथ 13 सितंबर की भोर में मौजूद दोनों लोग फ़रार बताये जा रहे हैं.

फ़ारूक़ के मोबाइल फ़ोन रिकॉर्ड्स की जांच हो रही है, साथ ही पुलिस शायद ये भी तय करने की कोशिश करेगी कि जब गांववाले फ़ारूक़ को कथित तौर पर 3.30 से 4 बजे भोर में पकड़ने का दावा कर रहे हैं तो पुलिस स्टेशन प्रमुख को मामले की जानकारी सुबह 7.15 पर किस तरह मिली?

प्रशासन ने एक सब-इंस्पेक्टर और विलेज डिफेंस फोर्स के तीन लोगों को सस्पेंड कर दिया है जिनके ख़िलाफ़ आरोप है कि मौक़े पर पहुंचने के बावजूद उन्होंने पीड़ित को भीड़ से बचाने की कोशिश नहीं की.

प्रदर्शन और कैंडल लाइट रैलियां

लिंचिंग की इस ताज़ा घटना के बाद पूरे सूबे में मॉब-जस्टिस और लिंचिंग के ख़िलाफ़ प्रदर्शन और कैंडल लाइट रैलियां निकाली जा रही हैं.

प्रशासन और पुलिस ने ख़ुद भी हर ज़िले में ऐसी रैलियों का आयोजन किया है.

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Image caption मानवधिकार कार्यकर्ता खेतरीमयुम ओनिल के मुताबिक इस घटना की तुलना देश के दूसरे हिस्सों से नहीं की जा सकती

मानवधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मणिपुर में बाल यौन शोषण और बलात्कार से लेकर चोरी के नाम पर मॉब-जस्टिस और लिंचिंग के मामले सामने आते रहे हैं लेकिन प्रशासन द्वारा इस तरह की पहल पहली बार नज़र आई है.

मणिपुर ह्यमून राईट्स अलर्ट के एक कार्यकर्ता का कहना है कि ये बहुसंख्यक मैतई जनजाति के भीतर पंगलों की बार-बार हो रही लिंचिंग पर अपराध-बोध की अभिव्यक्ति हो सकती है.

दिल्ली मणिपुरी मुस्लिम छात्र संगठन ने आरोप लगाया है कि हाल के चंद सालों में सूबे में कम से कम सात पंगलों (मुस्लिमों) की लिंचिंग का मामला सामने आया है.

संगठन के अज़ीमुद्दीन शेख का दावा है कि पंगलों की हत्या मज़हबी नफ़रत का नतीजा है.

मगर मानवधिकार कार्यकर्ता खेतरीमयुम ओनिल का कहना है कि मणिपुर की लिंचिंग की घटनाओं को भारत के दूसरे हिस्से में हो रही इसी तरह की घटनाओं की तरह नहीं देखा जा सकता.

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वो कहते हैं, "सांप्रदायिकता के रंग को यहां ढ़ूंढ़ना उत्तर भारत में जारी ट्रेंड को मणिपुर में फिट करने की कोशिश जैसा है, हमारे यहां ये नस्ली तनाव का नतीजा है जोकि बिल्कुल अलग है."

अंग्रेज़ी अख़बार इम्फ़ाल फ्री प्रेस के प्रदीप पंजौबम भी फ़ारूक़ की लिचिंग में सांप्रदायिकता के पुट से इंकार करते हैं लेकिन वो कहते हैं, "पंगल समुदाय के कुछ लोगों पर छोटी-मोटी चोरियों में शामिल होने के मामले सामने आते रहे हैं, साथ ही उनकी ख़ास तरह की छवि भी तैयार की गई है ..."

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Image caption अंग्रेज़ी अख़बार इम्फ़ाल फ्री प्रेस के प्रदीप पंजौबम के मुताबिक पंगल समुदाय की छवि की भी हादसे में भूमिका

"...मेरा ख़्याल है कि ये भी एक वजह थी कि उस युवक की इतनी अधिक पिटाई हुई." वो आगे कहते हैं.

हालांकि बुद्ध ज्ञान कहते हैं कि वो मामले को सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहते, "मगर इस बात से इंकार करना सही नहीं होगा कि अल्पसंख्यकों के प्रति उस तरह की भावना मौजूद नहीं. बहुसंख्यकों में अपनी श्रेष्ठता की भावना और नफ़रत है ... हमें लोगों को ख़ास छवि में देखने की आदत के बारे में सोचना होगा."

बुद्ध ज्ञान कहते हैं कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में थौरोइजम के लोगों से सवाल किया था कि अगर मैं फ़ारूक़ की जगह होता तो क्या वो मेरे साथ भी वही करते जो उन्होंने मेरे दोस्त के साथ किया?

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