आधार कार्ड पर SC का अंतिम फ़ैसला आने से पहले क्या-क्या हुआ?

  • 26 सितंबर 2018
AAdhar Card

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड की वैधता और उसकी अनिवार्यता के मामले में बुधवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया है.

सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की पीठ ने आधार को सुरक्षि‍त और लोगों के लिए ज़रूरी बताया है.

इस साल जनवरी से चल रही आधार मामले की सुनवाई पर शीर्ष अदालत का 10 मई को जो फ़ैसला आया था, उसे सुरक्षित रख लिया था.

केंद्र सरकार से लेकर सभी याचिकाकर्ताओं की नजरें सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले पर लगी हुई थीं.

आधार की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार के लिए काफी कम जानकारी ली जाती है. ऐसे में लोगों की निजी जानकारी सुरक्ष‍ित है.

पिछले कुछ सालों से आधार की अनिवार्यता के ख़िलाफ़ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं और इन पर सुनवाई जारी थी.

आइये एक नज़र डालते हैं आधार के अब तक के सफ़र पर, कब आधार पर विवाद हुआ और कोर्ट ने कब-कब इसपर टिप्पणी की.

2009

  • 28 जनवरी, 2009 को योजना आयोग ने UIDAI का नोटिफ़िकेशन जारी किया.
  • नंदन नीलेकणी को UIDAI का चेयरमैन बनाया गया.

2010

  • सितंबर, 2010 में महाराष्ट्र के कुछ ग्रामीण इलाक़ों में इस योजना को लॉन्च किया गया.
  • दिसंबर, 2010 में नेशनल आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया बिल, 2010 पेश किया गया. इस बिल को वित्तीय मामलों की स्टेंडिंग कमेटी के पास भेजा गया.

2011

  • सितंबर 2011 तक दस करोड़ लोगों ने आधार कार्ड बनवाया.
  • दिसंबर 2011 में नेशनल आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया बिल पर स्टेंडिंग कमेटी ने सवाल उठाये और कहा कि लोगों की निजता और संवेदनशील जानकारी का कैसे ख़्याल रखा जायेगा.

2012

  • 30 नवंबर 2012: कर्नाटक हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज के एस पुट्टास्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की. कई अन्य याचिकाकर्ताओं ने भी आधार के ख़िलाफ़ कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
  • जज के एस पुट्टास्वामी ने ये दलील दी थी कि बायोमैट्रिक डेटा लेना लोगों की निजता का हनन है.
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2013

  • सितंबर 2013 में दो जजों की बेंच ने आधार के सभी मामले की सुनवाई का आदेश दिया.
  • कोर्ट ने कहा- "कुछ विभागों ने आधार को अनिवार्य घोषित करने वाले सर्कुलर जारी किये हैं. इस तथ्य के बावजूद आधार कार्ड नहीं बनवाने वाले लोगों को इसका कोई नुक़सान नहीं होना चाहिए."
  • 26 नवंबर 2013 को बेंच ने ये आदेश दिया कि आधार केस में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पार्टी बनाया जाये.

2014

  • 24 मार्च, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि "आधार नंबर न होने की सूरत में किसी व्यक्ति को ऐसी किसी सुविधा से वंचित नहीं रखा जाएगा जिसका वो अन्य स्थिति में हक़दार होता. आधार अनिवार्य नहीं है. ये बताने के लिए सरकारी विभाग अपने फ़ॉर्म्स/सर्कुलर्स में संशोधन करें."

2015

  • 16 मार्च, 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें सितंबर, 2013 में दिये गये कोर्ट के आदेश का पालन कर रही हैं."
  • 11 अगस्त, 2015 को सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने कहा कि भारत सरकार रेडियो और टीवी सहित इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में बड़े पैमाने पर प्रचार करना चाहिए कि किसी नागरिक के लिए आधार कार्ड प्राप्त करना अनिवार्य नहीं है. साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और ख़ासतौर पर खाद्यान्न, रसोई ईंधन जैसे केरोसिन के अलावा किसी और मकसद से प्रतिवादी (केंद्र और राज्य सरकार) इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे. आधार कार्ड जारी करते वक़्त किसी व्यक्ति के बारे में यूनिक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया द्वारा प्राप्त की गई जानकारी का इस्तेमाल किसी अन्य मक़सद से नहीं किया जाएगा. आपराधिक जाँच के मामलों में कोर्ट के आदेश से ऐसा किया जा सकता है.
  • 15 अक्टूबर, 2015 को सुप्रीम कोर्ट के पाँच जजों की बेंच ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम, राष्ट्रीय सामाजिक सहयोग कार्यक्रम (वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांगता पेंशन), प्रधानमंत्री जनधन योजना और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़ी सुविधाओं को अपवादों की सूची में रखा.
  • साथ ही कोर्ट ने कहा कि हम भारत सरकार को हिदायत देते हैं कि आधार केस में 23 सितंबर, 2009 से लेकर अब तक के सभी आदेशों का सख़्ती से पालन किया जाए. हम ये भी स्पष्ट करेंगे कि आधार कार्ड योजना पूरी तरह से स्वैच्छिक है और जब तक कोर्ट इस पर कोई अंतिम आदेश नहीं दे देती है, इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता है.

2016

  • 3 मार्च को आधार बिल को लोकसभा में पेश किया गया. बाद में इसे वित्त विधेयक के रूप में पास कर दिया गया.
  • 25 मार्च को राष्ट्रपति ने आधार बिल को स्वीकृति दे दी.
  • 10 मई को कांग्रेस नेता जयराम रमेश आधार बिल को वित्त विधेयक के रूप में पास करने को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.
  • 21 अक्टूबर को एस जी वोमबात्करे ने आधार ऐक्ट की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.
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2017

  • 5 जनवरी की सुनवाई में कोर्ट ने ये माना कि आधार के लिए डेटा जमा करने की ज़िम्मेदारी किसी प्राइवेट कंपनी को देना अच्छा आइडिया नहीं है.
  • 21 मार्च को सरकार ने इनकम टैक्स ऐक्ट में सेक्शन 139-AA को शामिल किया. इसके तहत पैन कार्ड और रिटर्न फ़ाइल करने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया गया.
  • 21 अक्टूबर को आरबीआई ने ये स्पष्ट किया कि बैंक में अकाउंट खोलने और 50 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर आधार कार्ड अनिवार्य होगा.
  • 15 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आधार की डेडलाइन को बढ़ाकर 31 मार्च 2018 कर दिया.

2018

  • 17 जनवरी को पाँच जजों की बेंच ने आधार मामले की सुनवाई शुरू की.
  • 7 मार्च को इस बेंच ने कहा कि एनईईटी और बाकी परिक्षाओं के लिए आधार अनिवार्य नहीं हो सकता.
  • 21 मार्च को अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता पर केंद्र सरकार का पक्ष रखा.
  • 26 अप्रैल को पीठ ने कहा कि सिम कार्ड और मोबाइल सेवा के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं किया जा सकता.
  • 10 मई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर फ़ैसले को सुरक्षित रखा.

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