आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 15 ख़ास बातें

  • 26 सितंबर 2018
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सुप्रीम कोर्ट ने आधार नंबर की अनिवार्यता और इससे निजता के उल्लंघन पर अहम फ़ैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों वाली संवैधानिक बेंच ने बहुमत से बुधवार को कहा कि आधार नंबर संवैधानिक रूप से वैध है.

जानिए, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आधार एक्ट के किस प्रावधान को हटाया और किसे संवैधानिक क़रार दिया.

  • आधार अधिनियम के तहत डेमोग्राफिक और बायोमेट्रिक जानकारी देना गोपनीयता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है.
  • आधार अधिनियम के प्रावधानों के मुताबिक, किसी व्यक्ति से डेमोग्राफिक और बायोमेट्रिक जानकारी के तीन टेस्ट से गुज़रना होता है जैसे कि पुट्टास्वामी (सुपरा) मामले में बताए गए थे, इसलिए इसे असंवैधानिक नहीं कहा जा सकता है.
  • डेटा का संग्रह, इसे अपने पास रखना और इस्तेमाल गोपनीयता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करते.
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  • आधार क़ानून व्यापक निगरानी का काम नहीं करता है.
  • आधार एक्ट और रेगुलेशन व्यक्तियों से प्राप्त डेटा को सुरक्षा प्रदान करता है.
  • आधार की धारा 7 संवैधानिक है. इस सेक्शन के मुताबिक कुछ सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के लिए आधार नंबर ज़रूरी है. इस प्रावधान को सिर्फ इसलिए नहीं हटाया जा सकता क्योंकि कुछ मामलों में लोगों की जानकारी मेल नहीं खाई और सत्यापन नहीं हो पाया.
  • राज्य अनुच्छेद 21 के तहत भोजन के अधिकार या आश्रय आदि के लिए लाभार्थियों की गोपनीयता के अधिकार का अतिक्रमण नहीं कर सकते और ना ही अनुच्छेद 21 के ऊपर राज्य को प्राथमिकता दी जा सकती है.
  • आधार के सेक्शन 29 के मुताबिक इस क़ानून के तहत ली की गई जानकारी सिर्फ आधार नंबर बनाने और सत्यापन के लिए ही इस्तेमाल हो सकती है. ये सेक्शन संवैधानिक है और इसे हटाने की ज़रूरत नहीं है.

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  • सेक्शन 33 के मुताबिक अगर कोर्ट आदेश देता है तो आधार की जानकारी देनी होगी. इस आदेश के बाद भी पहले अथॉरिटी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस सेक्शन को संवैधानिक ठहराया है क्योंकि आधार का डेटा पुलिस जांच के लिए इस्तेमाल होगा और ये संविधान के अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन भी नहीं करता है.
  • आधार अधिनियम का सेक्शन 47 असंवैधानिक नहीं है. इस सेक्शन में आधार डेटा की चोरी के मामले में सिर्फ सरकार को शिकायत करने की अनुमति दी गई है. लेकिन कोर्ट का कहना है कि इसमें व्यक्ति के शिकायत करने के अधिकार का प्रावधान भी जोड़ा जाना चाहिए.
  • आधार एक्ट की धारा 57 निरस्त कर दी गई. आधार एक्ट के इस सेक्शन में यह कहा गया था कि निजी कंपनियां पहचान के मक़सद से उपभोक्ताओं से आधार विवरण मांग सकती हैं. अदालत के फैसले का मतलब है कि दूरसंचार कंपनियां, ई-कॉमर्स फर्म, निजी बैंक और अन्य ऐसी कंपनियां उपभोक्ताओं से बायोमेट्रिक और अन्य डेटा मांगने के लिए नहीं पूछ सकते हैं.

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  • धारा 59 के मुताबिक, दिनांक 28.01.2009 और 12.09.2009 की अधिसूचनाओं के तहत केंद्र सरकार की कार्रवाई और आधार एक्ट के तहत उठाए गए क़दम प्रमाणित हैं.
  • 5 से 18 साल के बच्चों के आधार के लिए विनियमन 3 के तहत बायोमेट्रिक और विनियमन 4 के तहत डेमोग्राफिक जानकारी माता-पिता की सहमति से ली जाएगी.
  • आधार बिल को मनी बिल की तरह पारित करना सही था.
  • सेक्शन 139-AA भी गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है जैसा कि पुट्टास्वामी प्राइवेसी केस में फैसला आया था.
  • आधार अधिनियम का सेक्शन 33 (2) निरस्त कर दिया गया. आधार एक्ट के इस प्रावधान ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ डेटा साझा करने की अनुमति दी थी.

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