आधार से जुड़े उन हर सवालों के जवाब, जो आप जानना चाहते हैं

  • 27 सितंबर 2018
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सुप्रीम कोर्ट ने आधार की अनिवार्यता पर अपना फ़ैसला बुधवार को सुनाया. आधार से जुड़ी 27 याचिकाओं पर रिकॉर्ड 38 दिनों तक सुनवाई चली जिसमें इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी.

सभी याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आधार से निजता का उल्लंघन हो रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद क्या कुछ बदला? फ़ैसले के मायने क्या हैं?

कोर्ट ने क्या कहा, कहां-कहां आधार की ज़रूरत होगी या कहां नहीं, ऐसे सवाल आपके मन में उठ रहे होंगे.

ये रहे इन सारे सवालों के जवाब, जो आप जानना चाहते हैं.

आधार पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला क्या है?

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सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों वाली संवैधानिक बेंच में से तीन जजों ने बुधवार को कहा कि आधार नंबर संवैधानिक रूप से वैध है.

हालांकि पांच जजों वाली बेंच ने आधार पर सर्वसम्मति से फ़ैसला नहीं सुनाया है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आधार नंबर को पूरी तरह से असंवैधानिक करार दिया. उन्होंने अपने फ़ैसले में कहा कि आधार क़ानून को धन विधेयक की तरह पास करना संविधान के साथ धोखा है.

आधार कहां ज़रूरी है?

  • पैन कार्ड बनाने के लिए आधार अनिवार्य है.
  • आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए आधार नंबर ज़रूरी होगा.
  • सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ पाने के लिए भी आधार कार्ड ज़रूरी है.
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आधार की ज़रूरत कहां-कहां नहीं होगी?

  • मोबाइल सिम लेने के लिए अब आधार की ज़रूरत नहीं होगी.
  • बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए आधार नंबर की ज़रूरत नहीं होगी.
  • सीबीएसई, यूजीसी, निफ़्ट और कॉलेज आधार नंबर की मांग नहीं कर सकते हैं.
  • स्कूल में दाखिले के लिए आधार नंबर की मांग नहीं की जा सकती है.
  • किसी भी बच्चे को आधार नहीं होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता है.
  • बाक़ी पहचान पत्र को दरकिनार नहीं किया जा सकता है.
  • निजी कंपनियां आधार नंबर की मांग नहीं कर सकती हैं.

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क्या अब अंगूठा लगाए बिना राशन मिल सकेगा?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं है. कोई भी वैकल्पिक पहचान पत्र दिखा कर राशन लिया जा सकता है.

अगर अंगूठा मेल नहीं खा रहा है या फिर नेटवर्क ख़राब होने की स्थिति में लाभार्थी दूसरे वैकल्पिक पहचान पत्र दिखा सकते हैं. राशन देने वाले अब उन्हें अंगूठा मेल नहीं खाने पर राशन देने से मना नहीं कर सकते हैं.

स्कूल या कॉलेज में आधार की ज़रूरत को नकार क्यों दिया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आधार संख्या नागरिकता की पहचान नहीं है. आधार कार्ड पर भी यह साफ़ लिखा होता है कि यह नागरिकता पहचान पत्र नहीं है.

छात्रवृति या सब्सिडी जैसी सुविधाएं नागरिकों का अधिकार है और आधार नहीं होने पर इन सुविधाओं से सरकार लोगों को वंचित नहीं कर सकती है.

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Image caption यूआईडीएआई की तरफ से 12 दिसंबर, 2017 को जारी किया गया डेटा

जिन्होंने अभी तक आधार नहीं बनवाया है, उन्हें क्या करना होगा?

जिन लोगों ने आधार नहीं बनवाया है या फिर जो लोग इसका बहिष्कार कर रहे थे, उन्हें इस फ़ैसले से बल मिलेगा. क्योंकि ये फ़ैसला उनकी चिंताओं पर मुहर लगाता है.

लेकिन कार्ट के फ़ैसले के मुताबिक उन्हें पैन कार्ड, इनकम टैक्स और सब्सिडी जैसी योजनाओं के लिए इसे बनवाना ही होगा.

जो लोग अपना आधार नंबर मोबाइल कंपनियों, बैंकों या फिर दूसरी निजी कंपनियों को उपलब्ध करा चुके हैं, उस डेटा का क्या होगा?

जिन लोगों ने मोबाइल कंपनियों, बैंकों या फिर दूसरी निजी कंपनियों को अपना आधार नंबर दिया है, वो कंपनियां अब क़ानूनी रूप से उनके डेटा का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं.

अगर वो इस्तेमाल करती हुई पाई गईं, तो उन पर कार्रवाई की जा सकेगी.

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अगर आपके आधार का ग़लत इस्तेमाल होता है तो क्या करना होगा?

अगर किसी व्यक्ति के आधार का ग़लत इस्तेमाल होता है तो वो खुद थाने में जा कर इसकी शिकायत कर सकता है. ग़लत इस्तेमाल करने वाले पर मुक़दमा दर्ज किया जाएगा.

धन विधेयक का मामला क्या है, जिसे जस्टिस चंद्रचूड़ ने असंवैधानिक बताया है?

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आधार क़ानून को धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पारित कराए जाने पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि आधार क़ानून को राज्यसभा से बचने के लिए धन विधेयक की तरह पास करना संविधान से धोखा है, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 110 का उल्लंघन है.

अनुच्छेद 110 ख़ास तौर पर धन विधेयक के संबंध में ही है और आधार क़ानून को भी इसी तर्ज़ पर पास किया गया था.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वर्तमान रूप में आधार क़ानून संवैधानिक नहीं हो सकता.

धन विधेयक को राज्यसभा में पास कराने की ज़रूरत नहीं होती है. इसे लोकसभा में पारित कर क़ानून का रूप दिया जा सकता है.

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आधार जैसी योजना दूसरे देशों में कितनी कामयाब है?

जिन देशों में नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता अधिक हैं या फिर जहां लोग निजता को लेकर चिंतित है, वहां इस तरह की योजनाएं रोक दी गई हैं.

ब्रिटेन, चीन, ऑस्ट्रेलिया, फ़्रांस, फिलिपिंस जैसे देशों ने आधार जैसी परियोजना पर रोक लगा दी है. हैरत की बात ये है कि जब आधार परियोजना को प्रस्तावित किया गया था, उस समय ब्रिटेन का उदाहरण दिया गया था.

लेकिन बाद में एक अध्ययन के बाद साल 2016 में ब्रिटेन ने लोगों के बायोमेट्रिक जानकारी के आधार पर बनी राष्ट्रीय बायोमेट्रिक पहचान पत्र योजना को छोड़ दिया था, लेकिन भारत सरकार ने इसे अनदेखा करते हुए यहां इस योजना को जारी रखा.

यहां तक कि अमरीका भी इस तरह की किसी योजना पर अमल नहीं करता. यहां केवल कोलोरैडो और कैलिफोर्निया दो ऐसे राज्य हैं जहां ड्राइविंग लाइसेंस के लिए फिंगरप्रिंट लिए जाते हैं.

अधिकतर देशों में पर्यटकों के संबंध में जानकारी इकट्ठा की जाती है लेकिन नागरिकों के बारे में जानकारी इकट्ठा नहीं की जाती.

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