भारत में वेब शो लेस्बियन या फिर सेक्स जैसे मुद्दे पर क्यों बन रहे हैं

  • 2 अक्तूबर 2018
वेब शो इमेज कॉपीरइट JioCinema/Loneranger Productions
Image caption दो लेस्बियन की प्रेम कहानी पर आधारित है वेब शो 'माया 2'

भारत में जिस तेज़ी से स्मार्ट फोन और इंटरनेट की खपत बढ़ रही है, उसने लोगों के जीने का तरीका ही बदल डाला है.

छोटे स्क्रीन पर अब लगभग हर काम हो रहे हैं. बैंकिंग, शॉपिंग, डेटिंग, टिकट बुकिंग और भी बहुत कुछ.

इस बदलाव से इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी अछूती नहीं रही है. भारत में देसी यूट्यूबर की बाढ़ आ गई है. ये खासा लोकप्रिय भी हो रहे हैं.

अब बॉलीवुड के बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस छोटे स्क्रीन पर अपनी बादशाहत कायम करने की कोशिश में हैं.

ऑल्ट बालाजी, झी फाइव, वूट, सोनी लिव, नेट फ़िलिक्स जैसी कंपनियां मोबाइल के दर्शकों के लिए ख़ास शो बना रही हैं.

ये शो और उनकी कहानियां वास्तविक रूप में फ़िल्माए जा रही हैं. उन्हें उसी रूप में पेश किया जा रहा है, जैसे समाज में दिखता है. मसलन गाली-गलौच, बातचीत की मिश्रित भाषा, पहनावा, वास्तविक लोकेशन आदि.

वेब शो ने दी नई आज़ादी

फ़िल्म निदेशक कृष्णा भट्ट कहती हैं, "इंटरनेट ने बॉलीवुड को वो कहने की आज़ादी दी है जो वो कहना चाहती है."

कृष्णा ने दो वेब शो बनाए हैं, उनमें से एक है 'माया 2'. यह वेब शो लेस्बियन की प्रेम कहानियों पर आधारित है.

इस तरह के विषय पर भारत में सिनेमा और टीवी शो बनाना बहुत मुश्किल है.

कृष्णा कहती हैं, "सिनेमा में किसी लव सीन को दिखाने के लिए उसे सेंसर के कई नियमों से गुजारना पड़ता है. यहां तक की किस सीन को भी मूर्ख बता कर काट दिया जाता है. टीवी पर भी ऐसे सीन को नहीं दिखाया जा सकता है."

Image caption निर्देशक कृष्णा भट्ट कहती हैं कि वेब सीरीज़ ने उन्हें रचनात्मक आज़ादी दी है.

भारत में टीवी और सिनेमा पर सेंसरशिप है. लेकिन वेब शो पर अभी तक इस तरह के कोई ख़ास नियम लागू नहीं होते हैं.

कृष्णा कहती हैं, "आप जो कुछ भी दिखाना चाहते हैं, उसे पूरी आज़ादी से दिखा सकते हैं. यह एक तरह की नई स्वतंत्रता है जो हमें मिली है."

भारतीय टीवी पर प्राइम टाइम के दौरान पारिवारिक शो दिखाए जाते रहे हैं और यह संस्कृति दशकों पुरानी है.

इन शो के लिए सीन लिखने से पहले लेखकों और निर्देशकों को बहुत कुछ ध्यान में रखना होता है. वो कहानियों का चुनाव भी सतर्कता से करते हैं.

इसलिए अब एक्टर, लेखक, निर्देशक और निर्माता एक नई तरह की आज़ादी को महसूस कर रहे हैं.

नए मौकों की भरमार

उत्तरी मुंबई के चांदिवली स्टूडियो में एक हिंदी शो 'अपहरण' की शूटिंग हो रही है. इसकी शूटिंग सुबह शुरू होती है और देर रात तक चलती है.

इसके 11 एपिसोड की शूंटिंग जल्द से जल्द पूरी करने की कोशिश की जा रही है, जिसे नवंबर में ऑल्ट बालाजी पर स्ट्रीम किया जाएगा.

ऑल्ट बालाजी एक वीडियो ऑन डिमांड एप्प और वेबसाइट है, जो 96 देशों में उपलब्ध है.

इस शो में अरुणोदय सिंह एक पूर्व पुलिसकर्मी की भूमिका में हैं. वो कई बॉलीवुड फिल्मों में भी नज़र आ चुके हैं.

वो कहते हैं, "बॉलीवुड फ़िल्मों में मुझे बहुत लोकप्रियता नहीं मिली, न मैं स्टार बन पाया. कास्टिंग डायरेक्टर को लगा कि मैं एक बेहतर कलाकार हूं और उन्होंने बिना ऑडिशन के मुझे चुना."

Image caption अरुणोदय सिंह

वेब शो ने अरुणोदय को नए मौके दिए हैं और एक उम्मीद भी कि वो उन लोगों तक अपनी पहुंच बना सके जिसके लिए मोबाइल का छोटा स्क्रीन उनके मनोरंजन का साधन है.

'अपहरण' उन दर्जनों वेब शो में से एक है, जो भारत में विशेषकर मोबाइल के लिए बनाए जा रहे हैं.

अरुणोदय कहते हैं, "एक्टर, राइटर के लिए अब मौकों की भरमार है. और ये अच्छी बात है क्योंकि यहां प्रतिस्पर्धा बढ़ने वाली है."

भारत में इसके बढ़ते बाज़ार को देखते हुए विदेशी कंपनियां भी यहां अपनी सक्रियता बढ़ा रही है.

नेटफ्लिक्स, अमेज़न जैसी कंपनियां भारत में निवेश कर रही है. हाल ही में नेटफ्लिक्स की सीरिज 'सेक्रेड गेम्स' ने भारतीय मनोरंजन बाज़ार में कामयाबी की एक मिसाल पेश की है.

कमाई का मॉडल

भारत में लगभग 30 करोड़ लोगों के हाथों में स्मार्ट फोन है और ये ही इनके संभावित ग्राहक हैं.

वेब शो चलाने वाले अधिकतर एप्प और वेबसाइट सब्सक्रिप्शन के जरिए कमाई करना चाहते हैं. यही वजह है कि कई वेबसाइट और एप्प पहले महीने की मुफ़्त सेवा दे रहे हैं और कई तो महज 50 रुपए से भी कम पर मनोरंजन उपलब्ध करा रहे हैं.

ऑल्ट बालाजी के चीफ एक्ज़ीक्यूटिव नचिकेता पंतवैद्य कहते हैं, "टीवी की तरह मोबाइल इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एक ओवर-द-टॉप या फिर ओटीटी बिजनेस है. इसका मतलब यह है कि यह चैनल और कंज्यूमर के बीच बिचौलिए को खत्म कर देगा, जिसे हम डिस्ट्रीब्यूटर भी कहते हैं."

ऑल्ट बालाजी का लक्ष्य 20 करोड़ दर्शकों तक पहुंचने की है, लेकिन यह आसान नहीं है क्योंकि बाज़ार में प्रतिस्पर्धा काफी है.

नचिकेता कहती हैं कि यही कारण है कि सब्सक्रिप्शन शुल्क एक रुपए प्रतिदिन से भी कम रखा जा रहा है.

वो कहते हैं कि 95 फ़ीसदी भारतीय घरों में केबल एक टीवी है. ऐसे में हर कोई अपना पसंदीदा शो नहीं देख पाता है. मोबाइल इसकी आज़ादी देता है.

मोबाइल यह भी आज़ादी देता है कि जब वो अकेले हों तो वो अपने पसंद का कंटेंट देख सके यानी वो ऐसे विषयों पर आधारित शो देखना चाहते हैं जो वो अपने परिवार के साथ नहीं देख पाते.

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Image caption ऑल्ट बालाजी

यह इंडस्ट्री सीधे तौर पर मोबाइल और इंटरनेट डेटा पर आधारित है. टेलिकॉम कंपनियों के बीच डेटा वॉर का फ़ायदा न सिर्फ लोगों को हुआ है बल्कि ऑनलाइन इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को भी पहुंचा है.

लेकिन चिंता का विषय यह भी है कि सस्ता डेटा आख़िर कब तक भारत में उपलब्ध कराए जाएंगे. जिस तरह से मोबाइल ऑपरेटर की संख्या घट रही है और कई कंपनियां बंद हो चुकी है, ऐसे में कुछ कंपनियां ही बाज़ार में रह जाएंगी.

हालांकि ऑनलाइन इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को यह उम्मीद है कि ये सफर अब रुकने वाला नहीं है.

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