गुजरात में प्रवासियों के पलायन पर क्या है बीजेपी-कांग्रेस की राजनीति

  • 11 अक्तूबर 2018
गुजरात इमेज कॉपीरइट JULIE RUPALI

गुजरात में लोगों के घरों से लेकर कारखानों में मजदूरों की भारी कमी देखी जा रही है. लेकिन क्यों?

कुछ दिन पहले उत्तर गुजरात के एक कस्बे में एक 14 महीने की बच्ची के साथ एक प्रवासी मजदूर के बलात्कार करने की बात सामने आई. इसके बाद स्थानीय लोगों में प्रवासी मजदूरों के ख़िलाफ़ आक्रोश देखा गया.

लेकिन इस मामले पर टीका-टिप्पणी करके राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने इसे जब प्रवासियों के गुजरात छोड़ने की घटना में बदलना शुरू किया तब से यह स्थानीय आक्रोश एक संकट के रूप में बदल गया है.

कैसे शुरू हुआ ये बवाल?

ये साफ़ है कि इस मामले पर प्रतिक्रिया देने से पहले राजनीतिक पार्टियों के रणनीतिज्ञों के दिमाग़ में गुजरात के पड़ोसी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव और यूपी-बिहार पर पड़ने वाले प्रभाव की बात ज़रूर चल रही होगी.

लेकिन इस मामले के इतना बड़ा रूप लेने के बाद दो राजनीतिक दावेदार इससे किनारा करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन सबसे पहले तथ्यों की बात करते हैं.

बीते 28 सितंबर को उत्तर गुजरात के साबरकांठा ज़िले में एक 14 महीने की बच्ची के साथ एक मजदूर ने कथित रूप से बलात्कार किया. पीड़िता गुजरात के ओबीसी ठाकोर समाज से जुड़ी थी और अभियुक्त पड़ोसी प्रदेश से गुजरात में काम करने के लिए आया हुआ एक मजदूर था.

इमेज कॉपीरइट SHAILESH CHAUHAN

इस घटना के कुछ घंटों बाद ही अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया गया. लेकिन इससे पैदा होने वाले गुस्से की प्रतिक्रिया आस पास रह रहे प्रवासी मजदूरों पर दिखाई दी.

एक सिरेमिक कारखाने में काम कर रहे मजदूरों पर हमला बोला गया. जबकि, इस फैक्ट्री में प्रवासी मजदूरों की संख्या नाममात्र की है.

गुजरात के मजदूरों का चुनाव कनेक्शन?

6 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने पांच राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिज़ोरम में चुनाव की तारीख़ों की घोषणा की.

इसी दिन हिंदी भाषी प्रदेशों से आने वाले प्रवासियों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं उत्तर गुजरात से लेकर मध्य गुजरात तक फैल गईं.

इससे पहले सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चलाया गया जिसमें स्थानीय लोगों से प्रवासियों से छुटकारा पाने की अपील की गई.

इसी दिन एक नेशनल हिंदी न्यूज़ चैनल ने एक प्री-पोल सर्वे जारी किया जिसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बढ़त मिलने की संभावना जताई गई.

इसके बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी, गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा और गुजरात में बीजेपी उपाध्यक्ष आई के जडेजा ने इस पूरे मामले के लिए कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराने में देर नहीं लगाई.

इन नेताओं के बयान देने के बाद कांग्रेस की ओर से गुजरात प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस हिंसा के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार ठहराया.

इमेज कॉपीरइट SHAILESH CHAUHAN

चावड़ा कहते हैं, "गुजरात के उत्तर में स्थित साबरकांठा ज़िले में एक बच्ची के साथ रेप होने के बाद स्थानीय लोगों में भावनात्मक आक्रोश पैदा हुआ लेकिन इसके बाद बीजेपी ने इसे हवा दी क्योंकि बीजेपी को पता है कि वह मध्यप्रदेश और राजस्थान में हारने वाली है. लोगों के बीच क्षेत्रवाद की भावना पैदा करके राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश की जा रही है."

अल्पेश ठाकोर की राजनीति?

राधनपुर विधानसभा से आने वाले कांग्रेस विधायक और गुजरात क्षत्रिय सेना के प्रमुख अल्पेश ठाकोर को बीजेपी सीधे-सीधे निशाना बना रही है. ठाकुर ने इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व भी किया है.

उन्होंने ये भी कहा है कि गुजरात में बढ़ती बेरोज़गारी की वजह से स्थानीय लोगों और प्रवासियों के बीच संघर्ष पैदा हो रहा है.

अल्पेश ठाकोर कहते हैं, "मैंने हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अपील की है और कभी भी हिंसा का समर्थन नहीं किया है."

अल्पेश गुजरात में बीजेपी की नाक में दम करने वाले उन तीन युवा नेताओं हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी में से एक है जो हमेशा बीजेपी के निशाने पर रहते हैं और हाल ही में राहुल गांधी ने अल्पेश को बिहार कांग्रेस का जॉइंट इंचार्ज बनाया है.

इमेज कॉपीरइट SHAILESH CHAUHAN

गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी कहते हैं, "बीजेपी केंद्र सरकार के साथ-साथ राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश और गुजरात में सरकार चला रही है. लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस पर आरोप लगाया जा रहा है. ये सब नरेंद्र मोदी की गिरती हुई लोकप्रियता से ध्यान हटाने के लिए है."

दोषी ये भी जानना चाहते हैं कि कांग्रेस पर आरोप लगाने वाले मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को इस मामले पर कार्रवाई करने से कौन रोक रहा है.

वहीं, कभी नीतीश कुमार के सहयोगी रहे शरद यादव पूछते हैं कि बीजेपी की सरकार वाले राज्यों में ही ऐसी चीज़ें क्यों हो रही हैं.

वे कहते हैं, "बीजेपी में लोगों का भरोसा ख़त्म हो गया है."

बनारस पहुंची गुजरात कीआग

गुजरात से उठा ये मामला एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल चुका है. पांच राज्यों में चुनाव सिर पर हैं और ये अब गुजरात से बनारस तक पहुंच चुका है.

इसकी सबसे ताज़ा घटना ये है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट बनारस में 'गुजराती नरेंद्र मोदी, बनारस छोड़ो' के पोस्टर लगाए गए हैं.

इमेज कॉपीरइट SHAILESH CHAUHAN

ये पोस्टर यूपी-बिहार एकता मंच से जुड़े हैं जिसने सभी गुजराती और महाराष्ट्र के लोगों को एक हफ़्ते के अंदर बनारस छोड़ने की चेतावनी दी गई है. सोशल मीडिया पर भी इस बारे में चर्चा चल रही है.

गुजरात सीएम रूपाणी की सार्वजनिक अपील और पुलिस कार्रवाई के बाद भी ये मामला दक्षिण गुजरात तक पहुंच चुका है. ऐसा बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण गुजरात तक इस मामले की आग पहुंचने के बाद विजय रूपाणी से इस बारे में बात की है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

टीम गुजरात भेजी गई

पीएम मोदी ने गुजरात में इस मामले पर नज़र रखने के लिए दो लोगों की टीम को गुजरात भेजा है.

गृह मंत्रालय ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है. बिहार और यूपी के मुख्यमंत्रियों ने विजय रूपाणी से बात की है.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने गृह राज्य यानी गुजरात में दो दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं.

गुजरात पुलिस प्रमुख शिवानंद झा ने कहा है कि इस मामले में 500 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और स्टेट रिज़र्व पुलिस को तैनात कर दिया ताकि स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके.

हालांकि, झा ने कहा है कि अगर लोग त्योहारों की वजह से अपने घर जा रहे हैं तो इसे दूसरी तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

वे कहते हैं, "मैंने अपने अधिकारियों से कहा है कि प्रवासी मजदूरों के संपर्क में रहें और अगर कहीं किसी तरह का डर पैदा हो तो उसे दूर किया जाए."

लेकिन इस सबके बावजूद भी प्रवासियों के गुजरात छोड़कर जाने का सिलसिला जारी है.

उत्तर भारतीय विकास परिषद के श्याम सिंह ठाकुर के मुताबिक़, हिंदी भाषी लगभग एक लाख प्रवासी मजदूर अब तक गुजरात छोड़ चुके हैं.

सूत्रों के मुताबिक़, गुजरात छोड़कर जाने वालों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा है क्योंकि इस मामले की वजह से गैर-हिंदी भाषी राज्यों से आने वाले मजदूर भी परेशान हो रहे हैं. इस समय गुजरात में प्रवासी मजदूर ट्रेन, रोड, बस और ट्रकों से गुजरात से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं.

गुजरात चेंबर ऑफ़ कॉमर्स और इंडस्ट्री के प्रमुख जैमिन वासा ने एक पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री ने उनसे निवेदन किया है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाए क्योंकि गुजरात के तमाम उद्योगों में काम करने वाले लोग यही हैं.

वह कहते हैं, "कई उद्योग दिन रात काम कर रहे हैं ताकि त्योहारों वाले सीज़न में मांग की पूर्ति की जा सके. माइक्रो-स्मॉल और मीडियम इंटरप्राइज़ेज के लिए ये लोग बेहद अहम हैं और इसमें कोई भी नुकसान बेहद विनाशकारी होगा."

जानकार मानते हैं कि गुजरात में हैवी फ़िज़िकल लेबर से लेकर स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड उद्योगों में 50 से 75 प्रतिशत प्रवासी मजदूर काम करते हैं.

गुजरात में कारखाने खाली पड़े हैं तो बस स्टेशनों पर लोगों की भीड़ लगी हुई है.

प्रवासी मजदूर सामान्य रूप से एक लंबी छुट्टी लेते हैं क्योंकि गुजरात दिवाली के दौरान बंद रहता है. लेकिन इस बार मजदूरों की छुट्टियां थोड़ा पहले शुरू हो गई हैं जिससे गुजरात को नुकसान हो रहा है.

इससे होने वाले नुकसान का आकलन करना अभी काफी जल्दबाजी होगी लेकिन इसके प्रभाव अच्छे नहीं होंगे और राजनीतिक रूप से बांटने वाले होंगे.

ये भी पढ़ें:

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए