राहुल ने मांगा पीएम का इस्तीफ़ा, बीजेपी ने कहा भ्रष्ट परिवार उठा रहा है उंगलियां

  • 11 अक्तूबर 2018
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रफ़ाल मामले में फ्रांस की मीडिया के दावे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि एक-एक कर सौदे के पीछे की कहानी सामने आ रही है और प्रधानमंत्री इस पर कुछ भी नहीं बोल पा रहे हैं और ऐसे में उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

राहुल गांधी ने कहा, "अगर वो कुछ नहीं बोल पा रहे हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए. मुख्य मुद्दा यह है कि जिस भ्रष्टाचार को रोकने का जिक्र वो बार-बार करते थे, वो खुद मामले में आरोप बन रहे हैं."

राहुल गांधी को जवाब देते हुए बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि जिनका पूरा परिवार ही भ्रष्ट है वो आज दूसरों पर उंगली उठा रहे हैं.

संबित पात्रा ने ये भी कहा कि जिस डील को एयर चीफ़ मार्शल ने गेम चेंजर बताया है उसे ही राहुल गांधी ग़लत बता रहे हैं.

उन्होंने ट्वीट किया, "एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने राफेल डील को 'game changer' डील बताया है, वही दूसरी ओर राहुल गांधी इसके विपरीत कह रहें है। अब देश की जनता तय करे कि वो किस पर विश्वास करेगी एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ पर या राहुल गांधी पर? "

रक्षा मंत्री फ़्रांस में

भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन फ्रांस की यात्रा पर हैं. तीन दिनों की इस यात्रा में वो वहां फ्रांस की मंत्री फ्लोरेंस पार्ली से मुलाक़ात करेंगी.

राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री की इस यात्रा पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, "भारतीय की रक्षा मंत्री फ्रांस जा रही हैं, इससे अधिक स्पष्ट संदेश क्या हो सकता है?"

"एक बात याद रखें, दासौ कंपनी को एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल हुआ है और वो वही बोलेगा जो भारत सरकार उसे बोलने के लिए कहेगी."

रफ़ाल मामले पर पत्रकारों से क्या कहा राहुल गांधी ने:

  • दासो के आंतरिक दस्तावेज़ यह बताते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री ने कहा था कि बिना लेन-देन के डील नहीं की जा सकती है.
  • अब भारत के प्रधानमंत्री फ्रांसीसी कंपनी दासौ पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं. सच्चाई एक-एक कर बाहर आ रही है.
  • एक बात स्पष्ट है और देश को धीरे-धीरे यह बात समझ आ जाएगी कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री भ्रष्ट हैं.
  • हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री ने रफ़ाल मामले में अनिल अंबानी को 30 हज़ार करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट दिलवाए हैं. और ये कोई अकेला कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, अभी और कॉन्ट्रैक्ट बाकी हैं.
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में हैं और उन्हें इसकी जांच करनी चाहिए.
  • रफ़ाल मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार किया है और इस मामले में भी जांच होनी चाहिए.
  • मैंने अरुण जेटली से ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बनाने को कहा था और वो मेरी इस बात को सुन कर चले गए.
  • नरेंद्र मोदी ने अनिल अंबानी की चौकीदारी की है. अनिल अंबानी को कर्ज़ से उबारने के लिए नरेंद्र मोदी ने सेना का पैसा उन्हें दे दिया.

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फ्रांसीसी मीडिया ने क्या दावा किया है?

फ्रांसीसी मीडिया 'मीडियापार्ट' ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया है कि रफ़ाल सौदे के लिए इसे बनाने वाली कंपनी दासौ को भारतीय कंपनी रिलायंस से गठजोड़ करना ज़रूरी था.

मीडियापार्ट ने कंपनी के कुछ आंतरिक दस्तावेज़ों के हवाले से कहा है कि दासौ के नंबर दो अधिकारी लोइक सेगलन ने अपने 11 मई 2017 के प्रेजेंटेशन में अपने कर्मियों से कहा था कि रिलायंस के साथ उनका ज्वाइंट वेंचर सौदे के लिए "अनिवार्य और बाध्यकारी" था.

हालांकि दासौ ने इन रिपोर्टों पर अपनी सफाई पेश की है. कंपनी का कहना है कि उसने रिलयांस का चयन "स्वतंत्र" रूप से किया है.

दोनों कंपनी ने मिल कर दासौ-रिलायंस एरोस्पेस लिमिटेड बनाया है, जिसके तहत भारत में रफ़ाल विमान तैयार किए जाएंगे.

भारत सरकार ने फ्रांस से कुल 36 रफ़ाल खरीदने के लिए सौदा किया है, जिस पर फिलहाल विवाद छिड़ा है. विपक्षी कांग्रेस पार्टी का कहना है कि ये सौदा नियमों को नजरअंदाज कर रिलायंस को फायदा पहुंचाने के मकसद से किया गया है.

कांग्रेस का यह भी आरोप है कि भाजपा सरकार ने फ्रांस के साथ ज़रूरत से कहीं ज्यादा महंगा सौदा किया है.

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Image caption फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इससे पहले फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का एक बयान सामने आया था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि रफ़ाल विमान बनाने के लिए 58 हज़ार करोड़ रुपए के समझौते के लिए भारत सरकार ने ही रिलायंस डिफेंस का नाम सुझाया था.

उनके इस बयान के बाद फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि "फ्रांस की सरकार किसी भी तरह से भारतीय औद्योगिक साझेदारों के चयन में शामिल नहीं है. उनका चयन फ्रांस की कंपनियों को करना है. भारतीय अधिग्रहण प्रक्रिया के मुताबिक़ यह करने की फ्रांस की कंपनियों को पूरी आज़ादी है."

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से रफ़ाल डील की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह जानकारी बंद लिफाफे में 29 अक्टूबर तक उपलब्ध कराने को कहा है.

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कितनी विश्वसनीय है रिपोर्ट

फ्रांसीसी पत्रकार वैजू नरावाने मीडियापार्ट को एक विश्वसनीय मीडिया संस्थान मानती हैं. उन्होंने कहा कि मीडियापार्ट इस तरह की रिपोर्ट करता रहता है.

बीबीसी हिंदी से बातचीत में उन्होंने कहा, "मीडियापार्ट पहले से फ्रांस सरकार के गोपनीय दस्तावेजों को सामने लाता रहा है और उसकी विश्वसनीयता काफी अधिक है. उसने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो यह दिखाते हैं कि सौदे के लिए रिलायंस से उनकी साझेदारी बाध्यकारी थी."

वैजू बताती हैं कि "रिपोर्ट में "अदले-बदले" की बात की गई है. इसका मतलब यह है कि आप कुछ दीजिए, बदले में आपको कुछ मिलेगा. ये सौदे की बात थी."

वो बताती हैं कि फ्रांस की मीडिया में रफ़ाल पर बहुत चर्चा नहीं है क्योंकि वहां की मीडिया ऐसे मामलों में बहुत ज्यादा नहीं बोलती है. हालांकि मीडियापार्ट खोजी पत्रकारिता करता है और वो ऐसी रिपोर्ट करता रहता है.

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