रफ़ाल: HAL से क़ाबिल कैसे बने अनिल अंबानी

  • 13 अक्तूबर 2018
रफ़ाल इमेज कॉपीरइट DASSAULT RAFALE

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के लगभग 3,000 कामगारों को अपने काम से हाथ धोना पड़ सकता है. वजह है रफ़ाल का कांट्रेक्ट केंद्र सरकार ने रिलायंस कंपनी को देने का फैसला.

रोज़गार खोने वालों की संख्या के बारे में अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं. एक आंकड़ा वे बता रहे हैं जो कंपनी में फ़िलहाल काम कर रहे हैं और एक आंकड़ा वे बता रहे हैं जो ट्रेड यूनियन के नेता रहे हैं.

आनंद पद्मनभा एचएएल कंपनी में काम करते थे और वर्कर यूनियन के सचिव भी रहे हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "कंपनी बंद नहीं होगी. अगर ऐसा हुआ तो भारतीय वायु सेना की रीढ़ ही टूट जाएगी. अगर कांट्रैक्ट कंपनी को मिल जाता तो इसके भविष्य के लिए बेहतर होता."

फ़िलहाल जो कंपनियों में काम कर रहे हैं वो कंपनी के सर्कुलर की वजह से पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बोल रहे हैं.

कंपनी ने सर्कुलर जारी किया है कि कोई भी कर्मचारी कंपनी के बारे में सार्वजनिक बयान देगा तो वो कर्मचारी आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption फ़्रांस के रक्षा मंत्री के साथ तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की कंपनी के कर्मचारियों के साथ निर्धारित बातचीत से 48 घंटे पहले ही इस सर्कुलर को जारी किया गया है.

कर्मचारियों की क्या हैं दलीलें

एक और पूर्व ट्रेड यूनियन नेता मीनाक्षी सुंदरम ने कहा, "एक निजी कंपनी को रफ़ाल का कॉन्ट्रैक्ट देना, जिसका विमानन क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं है, ऐसा करना दशकों में विकसित हुए स्वदेशी कौशल को नुकसान पहुंचाएगा. यह कंपनी के कारोबार और क्षमता को प्रभावित करेगा."

पहचान ना उजागर करने की शर्त पर एक कर्मचारी ने कहा, "जो प्रतिभा इस क्षेत्र में मौजूद है, उस पर ग्रहण ही लगेगा."

पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों के दलीलें कुछ वैसी ही हैं जैसा कि कंपनी के पूर्व चेयरमैन टी सुवर्णा राजू ने कहा था जो सितंबर में ही रिटायर हुए थे.

तीन हफ्ते पहले हिंदुस्तान टाइम्स को दिए गए एकमात्र साक्षात्कार में राजू ने कहा: "जब एचएएल 25 टन सुखोई -30 का निर्माण कर सकता है जो एक चौथी पीढ़ी वाला लड़ाकू जेट है, जिसे बिल्कुल कच्चे माल की स्टेज से हम बनाते हैं तो फिर हम किस बारे में बात कर रहे हैं? हम निश्चित रूप से इसे कर सकते थे."

इमेज कॉपीरइट DASSAULT RAFALE

बीबीसी की कई कोशिशों के बाद भी टी सुवर्णा राजू ने बात नहीं की. अख़बार को दिए साक्षात्कार के बाद से ही वो बातचीत नहीं कर रहे हैं लेकिन उन्होंने साक्षात्कार से इनकार भी नहीं किया.

रफ़ाल सौदे को लेकर बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार को कांग्रेस और बाकियों से काफ़ी आलोचना झेलनी पड़ रही है. यूपीए सरकार के वक़्त एचएएल कंपनी को 108 विमानों का निर्माण करना था, जबकि बाक़ी 18 विमान सीधे डसॉ एविएशन को डिलीवर करने थे.

राजू ने इस साक्षात्कार में यह भी कहा था: "डसॉ और एचएएल ने आपसी अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे और इसे सरकार को दिया था. आप सरकार से फाइलें सार्वजनिक करने को क्यों नहीं कहते हैं? फाइलें आपको सबकुछ बताएंगी. अगर मैं विमान बनाऊंगा, तो मैं उन्हें गारंटी दूंगा."

एक अन्य कार्यकर्ता ने नाम ना लेने की शर्त पर बताया, ''पूरा मुद्दा विवादास्पद हो गया है और कई सवाल उठाए जा रहे हैं. आप कह सकते हैं कि यह राजनीतिक हो गया है लेकिन, यह हमारे स्वयं की रक्षा मंत्री (निर्मला सीतारमण) का अनुचित क़दम था, ये कहना कि एचएएल रफ़ाल बनाने में असमर्थ थी.''

इमेज कॉपीरइट DASSAULT RAFALE

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) के कार्यकारी अध्यक्ष एच महादेवन ने कहा, "रफ़ाल विमान बनाने में एचएएल की क्षमता पर सवाल उठाने को लेकर कोई भी कर्मचारी उनके बयान को बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं है."

इस विवाद ने एचएएल के बनाए तेजस लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में देरी के बारे में भी सवाल उठाए हैं. सेवानिवृत्त भारतीय वायु सेना के अधिकारी देरी को लेकर आलोचना करते हैं और कहते हैं कि भारतीय वायु सेना पुराने पड़ चुके लड़ाकू विमानों की समस्या से जूझ रहा है.

एचएएल से बेहतर क्षमता किसी के पास नहीं

लेकिन, एचएएल के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर सीजी कृष्णदास नायर के पास लड़ाकू विमानों के निर्माण के मुद्दे पर एक अलग राय है.

उन्होंने बीबीसी हिंदी को बताया, "भारत में ऐसी कोई अन्य कंपनी नहीं है जिसमें एचएएल जैसी लड़ाकू विमान के निर्माण की क्षमता है. एचएएल के लिए अब आगे बढ़ने का रास्ता पब्लिक-प्राइवेट मॉडल है."

"चाहे वह एचएएल हो या कोई अन्य पब्लिक सेक्टर कंपनी हो, रास्ता निजी क्षेत्र के साथ-साथ मध्यम और छोटे सेक्टर के साथ काम करना है. जब भी कोई बड़ा ऑर्डर मिला है तो एचएएल ने इसी तरह सहयोग लिया है, निजी क्षेत्र के साथ साझा किया गया है."

डॉक्टर नायर कहते हैं कि ये कहना बेवकूफ़ी की बात है कि इसे कोई नहीं कर सकता.

इमेज कॉपीरइट DASSAULT RAFALE

सरल शब्दों में, डॉ नायर के बयान से अनुमान लगाया जा सकता है कि चूंकि रिलायंस के पास केवल निर्माण क्षमता वाला अनुबंध नहीं है तो वह एचएएल के साथ निर्माण के लिए समझौता कर सकता है.

और साथ ही उन विमानों का रख-रखाव करे जैसा कि मिराज 2000 के साथ किया गया है. ये विमान उसी डसॉ एविएशन ने ही बनाया है जो रफ़ाल बना रही है.

भारत अमेरिका, रूस, फ़्रांस और चीन के बाद लड़ाकू विमानों का निर्माण करने वाला दुनिया का पांचवां देश है और यह क्षमता एचएएल कंपनी के पास ही है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे