प्रेस रिव्यू : मोदी सरकार की नमामि गंगे योजना बेअसर क्यों है?

  • 13 अक्तूबर 2018
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गंगा की सफ़ाई के लिए शुरू किए गए 'नमामि गंगे' की डेडलाइन 2020 है, लेकिन अब तक इसके 10 फ़ीसदी प्रोजेक्ट भी पूरे नहीं हुए.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट है कि मोदी सरकार का कहना है कि उन्होंने गंगा की सफ़ाई के लिए 21,000 करोड़ का नमामि गंगे अभियान शुरू किया है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि 2020 तक गंगा की 70-80 फ़ीसदी सफ़ाई पूरी हो जाएगी.

लेकिन ज़मीन पर इसकी हक़ीक़त ये है कि सीवेज का पानी रोकने के 10 फ़ीसदी प्रोजेक्ट ही पूरे हुए हैं. इसके लिए 11 हज़ार करोड़ रूपए दिए गए थे.

सरकार के पास अपने दावे पूरे करने के लिए एक साल का वक़्त बचा है. 151 नए घाट बनाये जाने थे, लेकिन अभी तक 36 ही बने हैं.

एनजीटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 2017 तक इस प्रोजेक्ट पर 7304.64 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें गंगा की सेहत नहीं सुधार सके.

गंगा में ऑक्सिजन की मात्रा लगातार घट रही है. पिछले चार साल में गंगा का बैक्टिरिया 58 फ़ीसदी बढ़ा है.

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किसानों को पुआल जलाने के लिए जुर्माना देना सस्ता लगता है

इंडियन एक्सप्रेस ने पंजाब और हरियाणा के किसानों से बात कर रिपोर्ट तैयार की है जिसमें वे कह रहे हैं कि पुआल को हटाने की जो मशीनें हैं, वे काफ़ी महंगी हैं.

पुरानी फसल के कटने के बाद बाक़ी बची पुआल को किसान जला देते हैं जो राजधानी दिल्ली और आस-पास के क्षेत्रों में प्रदूषण के स्तर को ख़तरनाक स्तर पर पहुंचा देते हैं.

सरकार ने इससे निपटने के लिए किसानों पर जुर्माना भी तय किया है. लेकिन किसान कहते हैं कि अगर वे पुआल हटाने के दूसरे तरीके अपनाते हैं तो कम से कम 5 हज़ार रूपए प्रति एकड़ का खर्चा आता है.

इसलिए सरकार को पुआल जलाने के लिए जुर्माना देना उन्हें ज़्यादा सस्ता लगता है.

वहीं, सरकार का कहना है कि मशीनें ख़रीदने के लिए वह सब्सिडी भी देती है, लेकिन या तो किसान इन योजनाओं को जानते नहीं या इन्हें अपर्याप्त मानते हैं.

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Image caption जस्टिस मदन बी लोकुर

'क्या आपको शाकाहारियों का देश चाहिए'?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस लोकुर और दीपक गुप्ता की एक बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें मांग की गई है कि सभी प्रकार के मांस(बीफ़, मछली, पोर्क और मुर्गे) और उनसे संबंधित उत्पादों के निर्यात पर बैन लगा दिया जाए, चाहे सरकारी आयात हो या प्राइवेट कंपनियों का आयात हो.

याचिका में दलील दी गई है कि मांस और चमड़े का व्यापार समाज विरोधी और बर्बर है और विदेशी मुद्रा के लिए देश बहुत बड़ी कीमत चुकाता है.

जस्टिस लोकुर ने पूछा कि क्या आप पूरे देश को शाकाहारियों से भर देना चाहते हैं?

द हिंदू में छपी इस ख़बर के मुताबिक़ हालांकि बेंच ने सुनवाई के लिए याचिका स्वीकार कर ली.

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क्रिमिनल केसों में पीड़ित भी कर सकेंगे अपील

नवभारत टाइम्स की ख़बर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फ़ैसले में कहा है कि आपराधिक मामलों में आरोपी को बरी करने के फ़ैसले को पीड़ित भी चुनौती दे सकेंगे.

इसके लिए उन्हें अपील वाली अदालत से इजाज़त भी नहीं लेनी होगी.

अभी तक ऐसे मामलों पर सिर्फ़ सरकार को ही अपील करने का अधिकार था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 372 की वास्तविक, उदार और सुधारवादी व्याख्या करने की ज़रूरत है ताकि अपराध के पीड़ित लोगों को इसका फ़ायदा मिल सके.

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ई-कचरा 85 हज़ार मीट्रिक टन, दो फ़ीसदी ही रिसाइकिल

अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस पर दैनिक जागरण की रिपोर्ट है कि मौजूदा समय में ख़तरनाक वायु प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली के लिए भविष्य में ई-कचरा बड़ी समस्या बनने जा रहा है.

एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में सबसे ज़्यादा ई-कचरा तकरीबन 68 फीसदी कंप्यूटर से जुड़ा है. इसके अलावा 12 फ़ीसदी फ़ोन से उतप्नन कचरा है.

दिल्ली में हर साल 86 हज़ार मीट्रिक टन ई-कचरा पैदा होता है जिसका सिर्फ़ दो फ़ीसदी ही रिसाइकल हो पाता है.

ई-कचरे में एक हज़ार से भी ज़्यादा ज़हरीले पदार्थ होते हैं जो मिट्टी और पानी को प्रदूषित करते हैं.

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