#MeToo से लेकर कठुआ-उन्नाव तक, 'बेटी बचाओ...' का नारा देने वाले पीएम मोदी चुप क्यों हैं

  • 16 अक्तूबर 2018
प्रधानमंत्री मोदी, महिलाएं, मीटू, उत्पीड़न इमेज कॉपीरइट Reuters

अमरीका में साल 2017 में शुरू हुए #MeToo अभियान को भारतीय महिलाएं एक साल बाद आगे बढ़ा रही हैं. तनुश्री दत्ता और नाना पाटेकर विवाद के बाद अब अभिनेता, राजनेता, लेखक, फ़िल्ममेकर, पत्रकार और कॉमेडियन के नाम सामने आए हैं जिन पर महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.

ऐसा ही एक नाम है भारत सरकार में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर का. एमजे अकबर पर मीडिया समूहों के संपादक रहते हुए महिलाओं के साथ "प्रिडेटरी बिहेवियर" के आरोप लगे हैं. 10 से अधिक महिलाएं उन पर उत्पीड़न के आरोप लगा चुकी हैं. लेकिन एमजे अकबर ने इस सभी आरोपों को 'वायरल फ़ीवर' बताया.

ट्विटर पर जारी अपने बयान में उन्होंने पत्रकार प्रिया रमानी का ख़ासतौर पर ज़िक्र किया और उन पर झूठी कहानी बुनने का आरोप लगाया.

इस सिलसिले में एमजे अकबर ने दिल्ली के पटियाला हाऊस कोर्ट में प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ मानहानि का मुकदमा भी किया है.

Image caption पीएम मोदी

हालांकि इन सबके बीच जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है वो ये है कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और महिला सशक्तिकरण के पक्षधर होने का दावा करने वाले मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आख़ि इस मुद्दे पर कब बोलेंगे?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी #MeToo और महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा पर पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं.

मध्यप्रदेश में चुनावी रैली कर रहे राहुल गांधी ने कहा, "पीएम मोदी अपने हर भाषण में 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का ज़िक्र करते हैं. मुझे ये नारा पसंद है. मैंने पीएम मोदी से कहा कि वो महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा पर भी कुछ बोलें लेकिन वो ख़ामोश रहे."

इसी मुद्दे पर बीबीसी हिंदी ने 'कहासुनी' के ज़रिए सोशल मीडिया पर पाठकों से पूछा कि पीएम मोदी की चुप्पी पर वो क्या कहते हैं. इसके जवाब में लोगों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आईं.

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कमल कुमार ने लिखा है, "हर मुद्दे पर प्रधानमंत्री बोलें, यह ज़रूरी नहीं. सरकार और पार्टी अगर बयान दे रही है उस मुद्दे पर तो वह भी काफ़ी है."

विवेक आर्यन ने लिखा, "ये पहले भी कई मुद्दों पर चुप रहे हैं. कुछ बोलना मतलब किसी के पक्ष में और किसी के ख़िलाफ़ बोलना होता है. किसी को नाराज़ नहीं करना है तो चुप रहें. मोदी जी ने यह सीख लिया है."

राम कुमार इंस्टाग्राम पर लिखते हैं, "आप मीडिया वाले भी न कभी किसी को चैन से रहने नहीं देते हैं. प्रधानमंत्री बोलें, तो बहुत बोलते हैं. नहीं बोलें तो, कुछ तो बोलिये जनाब."

आठ अक्तूबर को प्रिया रमानी ने पहली बार एमजे अक़बर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एक ट्वीट किया था. इस ट्वीट में उन्होंने पिछले साल वोग़ में अपने लेख का लिंक भी साझा किया.

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ऐसा नहीं है कि इन सात दिनों में प्रधानमंत्री मोदी ने किसी मुद्दे पर ट्वीट नहीं किया है. प्रधानमंत्री मोदी के ट्विटर टाइमलाइन को आठ अक्टूबर से लेकर अब तक देखें तो कई ट्वीट किए गए हैं -

आठ अक्तूबर- एयर फ़ोर्स डे की बधाई (जिस दिन एमजो अक़बर के खिलाफ आरोप सामने आए)

नौ अक्तूबर- रोहतक में रैली, उत्तराखंड सम्मिट, कनाडाई विपक्षी नेता से मुलाकात

10 अक्तूबर - नवरात्रि की बधाई, कार्यकर्ता संवाद के वीडियोज़

11 अक्तूबर- नवरात्रि की बधाई, लोकनायक जेपी जयंती से जुड़ा ट्वीट, नाना जी देशमुख जयंती, अभिनेता अमिताभ बच्चन को जन्मदिन की बधाई, जीडी अग्रवाल की मौत पर शोक संदेश, ओडिशा में तूफ़ान तितली से जुड़ा ट्वीट.

12 अक्तूबर- दुर्गा नवरात्रि की बधाई, राजमाता विजया राजे सिंधिया की जयंति, मानावधिकार आयोग की 25वीं वर्षगांठ.

13 अक्तूबर- नवरात्रि श्लोक, तमिलनाडु की महिला राजलक्ष्मी मंडा से जुड़ा ट्वीट.

14 अक्तूबर- नवरात्रि श्लोक.

15 अक्तूबर- मुख़्तार अब्बास नक़वी को जन्मदिन की बधाई, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को बधाई, स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी से जुड़ा ट्वीट, पूर्व राष्ट्रपति कलाम की जयंती पर ट्विट.

इन कई ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने एक भी ट्वीट महिलाओं की उत्पीड़न के ख़िलाफ़ उठती आवाज़ों पर नहीं किया है. प्रधानमंत्री के बयान का इंतज़ार इसलिए भी बेसब्री से किया जा रहा है क्योंकि सभी आरोपों में सबसे चर्चित आरोप सरकार में मंत्री एमजे अक़बर पर लगा है. हालांकि अकबर ने इसे 'सियासी' और '2019 चुनाव के मद्देनज़र' लगाए गए आरोप बताया है.

ये पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी ऐसे मुद्दे पर चुप्पी साधी हो. इससे पहले भी बीजेपी नेताओं के नाम महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए अपराधों के आरोपों में फंस चुके हैं और उस वक़्त भी प्रधानमंत्री मोदी के बयानों का देश ने सिर्फ़ इंतज़ार किया है.

कठुआ-उन्नाव पर पीएम की चुप्पी

इस साल अप्रैल में जम्मू के कठुआ में आठ साल की बच्ची से सामूहिक बालात्कार का मामला सामना आया. इस अपराध को हिंदू और मुसलमान का रंग देने की कोशिश की गई.

इतना ही नहीं अपराधियों के समर्थन में रैली भी निकाली गई जिसमें बीजेपी विधायक लाल सिंह भी शामिल रहे. इस घटना के बाद पार्टी पर कई सवाल उठे. साथ ही महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहे अपराधों पर बीजेपी की गंभीरता पर भी सवाल उठाए गए.

प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर बयान तो दिया लेकिन बीजेपी विधायक का इस तरह अपराधियों के समर्थन पर वो चुप्पी साधे रहे.

प्रधानमंत्री ने इस मामले को संबोधित तो किया, लेकिन जिन नेताओं के नाम सामने आए थे उन्हें लेकर कोई कड़ा संदेश नहीं दिया. ऐसी घटनाओं पर प्रधानमंत्री ने दुखः प्रकट तो किया लेकिन इन नेताओं पर जो आरोप लगे उसका कोई ज़िक्र नहीं था.

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