पीएम मोदी को रफ़ाल डील में पकड़े जाने का डर: राहुल गांधी

  • 25 अक्तूबर 2018
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई के डायरेक्टर को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले पर प्रधानमंत्री मोदी पर सीधे-सीधे आरोप लगाए.

उन्होंने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर को हटाना क़ानूनन ग़लत है. उन्होंने कहा कि सीबीआई डायरेक्टर को हटाने या नियुक्त करने का काम तीन लोगों की कमेटी करती है, प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश.

ये उन्हें नियुक्त करने वाली कमेटी के अन्य सदस्यों को अपमान है. पीएम मोदी ने संविधान का अपमान किया है. कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि सीबीआई डायरेक्टर को जो कमेटी नियुक्त कर सकती है, वही हटाने का अधिकार भी रखती है.

राहुल गांधी ने पूछा सीबीआई डायरेक्टर को प्रधानमंत्री ने रात के दो बजे क्यों हटाया. सवाल उठता है कि रात के दो बजे ही क्यों किया.

राहुल गांधी ने कहा कि इसकी मुख्य वजह है कि सीबीआई डायरेक्टर रफ़ाल मामले पर जाँच शुरू करने जा रहे थी. अगर सीबीआई जाँच होती तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता.

उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई डायरेक्टर के कमरे को सील किया गया जो महत्वपूर्ण कागजात उनके पास थे, उन्हें कब्जे में लिया गया. ये सिर्फ़ अफ़सरों को हटाने की बात नहीं है, बल्कि सबूतों को नष्ट किया जा रहा है.

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पत्रकारों के यह पूछे जाने पर कि उन्हें कैसे पता कि सीबीआई रफ़ाल मामले की जाँच शुरू कर रही थी, राहुल ने कहा, "जैसे आपको पता है, लोगों को पता है, वैसे ही मुझे भी पता है."

राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 30 हज़ार करोड़ रुपये अनिल अंबानी की जेब में डाला है. ये पैसा आम आदमी का है.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि वो देश के चौकीदार हैं, लेकिन अब वो भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने घबराकर और डर कर ये फ़ैसला लिया है. मोदी को डर है कि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है और अब वो पकड़े जा रहे हैं.

राहुल ने कहा, "एक विपक्षी दल के रूप में हमारी ज़िम्मेदारी है कि जनता के बीच सच लेकर आएं और लोगों को जानकारी दें."

बीजेपी की दलील

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेजे जाने को सही करार देते हुए कहा कि सरकार ने सीवीसी की सिफारिश पर इन दोनों को छुट्टी पर भेजा है. जेटली ने कहा कि दोनों अफसरों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं इसलिए निष्पक्ष जांच के लिेए दोनों का हटाने का अंतरिम कदम उठाया गया है.

अस्थाना के ख़िलाफ़ सीबीआई ने एक जांच में घूस लेने का केस दर्ज किया है. अस्थाना ने इसके बाद सरकार को भेजे एक नोट में कहा था कि डायरेक्टर आलोक वर्मा ने भी उसी मामले में घूस ली थी, जिसमें उन पर घूस लेने का आरोप लग रहा है.

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