प्रदर्शन में पिंजराबंद 'तोता' और राहुल गांधी का दो मिनट का भाषण

  • 26 अक्तूबर 2018
कांग्रेस के प्रदर्शन में मौजूद प्रदर्शनकारी

'सीबीआई के डॉयरेक्टर को हटाया है. कांग्रेस पार्टी चौकीदार को चोरी नहीं करने देगी.'

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इशारों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चोट की और कांग्रेस के कार्यकर्ता उन्हीं नारों को दोहराने लगे जो वो सुबह से लगा रहे थे.

सीबीआई मुख्यालय से करीब तीन सौ मीटर दूर एक छोटे ट्रकनुमा वैन के ऊपरी हिस्से पर खड़े राहुल गांधी ने करीब दो मिनट का भाषण दिया.

सीबीआई डॉयरेक्टर आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के फ़ैसले के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने तकरीबन वही बातें दोहराईं जो वो बीते कुछ दिनों से लगातार कह रहे हैं.

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राहुल के आरोप

कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सीबीआई मुख्यालय के सामने तक पहुंचने से रोकने के लिए सड़क पर तीन जगह बैरिकेड लगाए गए थे. उनके करीब बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात थे.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश नहीं की. बैरिकेड्स के ठीक सामने राहुल गांधी वैन के ऊपर सवार हो गए. उनके साथ कांग्रेस महासचिव अशोक गहलौत और सीपीआई नेता डी राजा मौजूद थे.

राहुल सबसे आखिर में बोले. उन्होंने कहा, "ये सीबीआई ऑफ़िस है. इस पर लोग खड़े हैं. इस बिल्डिंग के अंदर लोग हैं और ये पुलिस वाले खड़े हैं. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि हम आप पर आक्रमण नहीं कर रहे हैं. आप पर आक्रमण प्रधानमंत्री कर रहा है. चाहे वो सीबीआई हो. चाहे वो इलेक्शन कमीशन हो. चाहे वो विधानसभा हो. लोकसभा हो. हिंदुस्तान के हर एक इंस्टीट्यूशन पर नरेंद्र मोदी आक्रामण कर रहा है."

राहुल गांधी के भाषण के दौरान और उसके पहले भी एक अलग माइक से उन कार्यकर्ताओं से नीचे उतरने की गुजारिश की जा रही थी, जो बैरिकेड्स पर बैठ गए थे.

राहुल ने कहा, कांग्रेस पार्टी देश के चौकीदार को चोरी करने नहीं देगी

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आए और चले गए

ज़्यादा से ज़्यादा लोग राहुल गांधी की गाड़ी के करीब आने की कोशिश में थे. शोर शराबा और नारेबाजी इस कदर हो रही थी कि राहुल गांधी के पहले किस नेता क्या कहा, ज़्यादातर लोग सुन ही नहीं पाए.

राहुल का भाषण भी इतना छोटा था कि उन्हें सुनने के लिए धक्के झेल रहे कुछ लोग हैरान दिखे.

सीबीआई मुख्यालय के करीब के ही एक दफ़्तर में काम करने वाले शख्स जो लंच ब्रेक में प्रदर्शन का जायजा लेने आए थे, बोले, 'बस आए और चले गए.'

प्रदर्शन और भाषण भले ही जल्दी ख़त्म हो गए हों लेकिन लोधी रोड इलाक़े में सुबह से जारी तैयारी को देखकर लग रहा था कि मानो कांग्रेस सीबीआई विवाद के बहान रफ़ाल मुद्दे को सड़क पर लाने के इरादे में हो.

प्रदर्शन के लिए सुबह 11 बजे का वक़्त तय किया गया था. उसके पहले ही दिल्ली पुलिस ने सीबीआई मुख्यालय के आसपास के इलाके को छावनी में बदल दिया था. मुख्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते पर तीन जगह बैरिकेड्स लगाए गए थे. हर जगह पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान बड़ी संख्या में तैनात थे.

कांग्रेस के कार्यकर्ता करीब एक किलोमीटर दूर दयाल सिंह कॉलेज मार्ग पर जमा थे. रास्ते में जगह-जगह होर्डिंग और बोर्ड लगाए गए थे जिनके जरिए रफ़ाल डील और सीबीआई के अधिकारियों को छुट्टी पर भेजे जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे.

ताक़त दिखाने की होड़!

दयाल सिंह कॉलेज रोड पर कांग्रेस के कुछ हज़ार कार्यकर्ता जमा थे. इनमें से कुछ कांग्रेस के तिरंगा झंडे लहरा रहे थे.

कुछ कार्यकर्ता एक पिंजरे को कंधे पर उठाए थे. इसमें एक शख्स तोते का रुप बनाए बैठा था. पिंजरे पर लिखा था सीबीआई.

कुछ कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के कटआउट थामे हुए थे और कुछ के हाथ में विमान के मॉडल थे. कटआउट और विमान के मॉडल पर वो ही आरोप लिखे थे, जो कांग्रेस पार्टी बीते कुछ महीनों से केंद्र सरकार पर लगातार लगा रही है.

इस भीड़ के बीच सुरक्षाकर्मियों ने रस्सियां थामकर एक घेरा बनाया हुआ था. इसके बीच मोतीलाल वोरा, आनंद शर्मा, शकील अहमद, प्रमोद तिवारी जैसे नेता मौजूद थे. कार्यकर्ता उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश में थे और ये नेता सुरक्षाकर्मियों को इशारों में कह रहे थे कि वो भीड़ को दूर रखें.

थोड़ी देर में समाजवादी नेता शरद यादव और सीपीआई नेता डी राजा भी वहां पहुंच गए.

इसके बाद दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन की एंट्री हुई. वो अपने समर्थकों के साथ आए और बाकी नेताओं से थोड़ी दूर खड़े हो गए.

एक कार्यकर्ता से पूछा तो वो बोले, "सब अपनी ताक़त दिखाने में लगे हैं."

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राहुल की रेस

दोपहर सवा 12 बजे के करीब राहुल गांधी दयाल सिंह कॉलेज मार्ग पर पहुंचे और मानो कोई रेस शुरू हो गई.

राहुल गांधी लगभग दौड़ते हुए सीबीआई मुख्यालय वाली सड़क पर बढ़े. उनके पीछे सुरक्षाकर्मी और कांग्रेस कार्यकर्ता दौड़े. चैनलों के कैमरामैन भी दौड़ने लगे. एक मिनी ट्रक पर कुछ फ़ोटोग्राफ़र और कैमरामैन मौजूद थे, ड्राइवर ने इस गाड़ी को तेज़ी से दौड़ाया और लगभग दौड़ते चल रहे राहुल गांधी के आगे पहुंचने में कामयाब रहा.

कांग्रेस के उम्रदराज़ नेता राहुल से पीछे छूटते गए. बामुश्किल पांच मिनट में राहुल गांधी और उनके समर्थक बैरिकेड्स तक पहुंच गए. कुछ एक कार्यकर्ताओं को छोड़कर किसी ने अवरोध हटाने की कोशिश नहीं की.

राहुल गांधी काफी देर तक मिनी ट्रकनुमा वैन पर बैठकर समर्थकों को देखकर मुस्कुराते और हाथ हिलाते रहे. थोड़ी देर में अशोक गहलौत भी उस पर सवार हो गए. बाद में राहुल ने डी राजा का हाथ पकड़कर उन्हें भी ऊपर आने में मदद की. इसी बीच कुछ उत्साही कार्यकर्ताओं ने पिंजरे में बैठे शख्स को भी ट्रक के ऊपर पहुंचाने की कोशिश की लेकिन वहां मौजूद नेताओं ने उन्हें रोक दिया.

'इनसे नहीं चलेगी सरकार'

भाषणों का सिलसिला लंबा नहीं चला लेकिन प्रदर्शन में आए कार्यकर्ता लगातार नारे लगाते रहे और अपनी बात रखने को बेताब दिखे. वो सीबीआई के अधिकारियों को छुट्टी पर भेजने के फ़ैसले पर सरकार की ओर से दिए गए तर्कों को काटते रहे.

महिला कांग्रेस की एक कार्यकर्ता निकिता चतुर्वेदी ने कहा, "आप हर बार ये कह कर नहीं बच सकते कि कांग्रेस के समय में भी तो यही हुआ था. कांग्रेस के समय अगर सीबीआई पिंजरे का तोता थी तो आपने क्या किया, आप तो बदलाव लाने आए थे. वो बदलाव ये है कि आप रातों रात दो बजे किसी को हटा देते हैं और उसके लिए आप जवाबदेह भी नहीं हैं."

पास ही खड़े कांग्रेस कार्यकर्ता अमनदीप सिंह ने आरोप लगाया, "जिस तरह से चार साल में एक के बाद एक असंवैधानिक फ़ैसले सरकार ने लिए हैं, उनसे साफ पता चलता है कि इनको न सरकार चलानी आती है और न ही इनसे चलेगी."

लेकिन, क्या इस तरह के प्रदर्शन से कांग्रेस को कोई फ़ायदा होगा, इस सवाल पर भीड़ के बीच खड़े उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि जिसे जो समझना है, वो समझे.

"संवैधानिक संस्थाओं, संवैधानिक मर्यादाओं और देश की सुरक्षा से मोदी जी खिलवाड़ कर रहे हैं. उसकी गरिमा को गिरा रहे हैं. कांग्रेस पार्टी, विपक्ष और देश की जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी. जब तक दूध का दूध पानी का पानी नहीं होता, कांग्रेस और विपक्ष सड़क से लेकर संसद तक इसकी लड़ाई लड़ेगा."

यानी कांग्रेस रफ़ाल को हथियार बनाए रखेगी.

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