एम नागेश्वर राव कैसे बन गए सीबीआई के अंतरिम निदेशक?

  • टीम बीबीसी हिंदी
  • नई दिल्ली
एम नागेश्वर राव

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केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच होने तक अवकाश पर भेजे जाने के बाद एम नागेश्वर राव को जाँच एजेंसी की कमान सौंपी गई है.

बुधवार को जारी एक सरकारी बयान में कहा गया है कि नागेश्वर राव को आरोपों की जाँच पूरी होने तक सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया है.

एम नागेश्वर राव मूल रूप से तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली ज़िले के रहने वाले हैं. राव ने 1981 में ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की. इसके अलावा वह आईआईटी मद्रास के भी छात्र रह चुके हैं.

नागेश्वर राव 1986 में भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के लिए चुने गए. अपने सेवा कार्यकाल के दौरान वो अधिकतर समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र में रहे. उन्होंने ओडिशा पुलिस में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की ज़िम्मेदारी संभाली और बाद में चेन्नई क्षेत्र के सीबीआई के प्रमुख रहे. राव को राष्ट्रपति पदक, विशिष्ट सेवा पदक और ओडिशा सरकार के पदक से सम्मानित किया गया है.

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इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक अंतरिम रूप से सीबीआई चीफ़ की ज़िम्मेदारी संभाल रहे एम नागेश्वर राव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अहम नेताओं के करीबी हैं. उन्हें बीफ़ निर्यात के सख्त ख़िलाफ़ माना जाता है. साथ ही उन्हें हिंदुओं के सांस्कृतिक दबदबे का हिमायती भी माना जाता है.

अख़बार के मुताबिक राव को करीब से जानने वालों ने बताया कि मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से बाहर करने, अल्पसंख्यकों को पक्ष लेने वाले और हिंदुओं से भेदभाव करने वाले क़ानूनों को रद्द कराने और बीफ़ एक्सपोर्ट पर रोक लगाने पर ज़ोर देने वाले संगठनों के साथ राव काम करते रहे हैं.

नागेश्वर राव ओडिशा के ऐसे पहले पुलिस अधिकारी थे, जिन्होंने बलात्कार मामले का पता लगाने के लिए जांच में डीएनए फिंगर प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया था. साल 1996 में जगतसिंहपुर जिले में हुआ यह मामला 7 साल तक चला था और आखिरकार वो आरोपी को सजा दिलाने में सफल रहे थे.

एम नागेश्वर राव को तेज-तर्रार और शख्त अधिकारी के रुप में जाना जाता है. राव ने ओडिशा में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान ही अवैध खनन के लिए बदनाम तलचर में अपराध पर लगाम लगाकर खास पहचान बनाई थी. इसके अलावा उन्होंने मणिपुर में विद्रोही गतिविधियों पर भी लगाम लगाई थी. यहां वो सीआरपीएफ के डीआईजी (ऑपरेशंस) के रूप में तैनात थे.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक ओडिशा पुलिस में राव को क्राइसिस मैनेजर के रूप में याद किया जाता है. वो ओडिशा कैडर के दूसरे पुलिस अधिकारी हैं, जिन्हें सीबीआई चीफ़ की जिम्मेदारी मिली है. इससे पहले, उमाशंकर मिश्रा ने सीबीआई डायरेक्टर के रूप में काम किया था.

राव ओडिशा में अग्निशमन सेवा और होम गार्ड के अतिरिक्त महानिदेशक भी रहे. 2013 में समुद्री तूफ़ान फिलिन और 2014 में हुदहुद के दौरान उन्होंने आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई थी.

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नागेश्वर राव के साथ कुछ विवाद भी जुड़े हुए हैं. ओडिशा में अग्निशमन विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक पद पर रहते हुए विवादास्पद यूनिफॉर्म घोटाला सामने आया था. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की इस ख़बर के मुताबिक ये घोटाला 2014 में हुआ था और इस दौरान पीले रंग की वर्दी ख़रीदने में तीन करोड़ रुपये के फंड में गड़बड़ी के आरोप लगे थे.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी ट्वीट कर कहा कि नागेश्वर राव के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति की कई गंभीर शिकायतें हैं.

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