बिहार: क्या ये गर्भवती महिलाएं नहीं पहन पाएंगी पुलिस की वर्दी

  • 27 अक्तूबर 2018
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29 सितंबर का बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग का ये फ़ैसला अनु सिंह के लिए सब-इंस्पेक्टर बनने की राह में सबसे बड़ी बाधा बन गया है.

अनु सिंह ने 15 सितंबर को आयोग को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने अपनी शारीरिक स्थिति के बारे में आयोग को सूचित किया था.

अनु सिंह ने लिखा था, "मैं गर्भवती होने के कारण दारोगा भर्ती के लिए हो रही शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं हो सकती. मेरी डिलीवरी की डेट जनवरी 2019 की है. मुझे विश्वास है कि मार्च 2019 तक मैं ये परीक्षा देने के लिए समर्थ हो जाउंगी."

अनु सिंह ने आयोग से अनुरोध किया था कि "उन्हें शारीरिक परीक्षा में शामिल होने के लिए कुछ समय दिया जाये."

लेकिन उस वक़्त तक बिहार दारोगा बहाली के लिए होने वाली इस शारीरिक परीक्षा की अधिसूचना आयोग ने जारी कर दी थी.

बहरहाल हुआ वही जिसका महिला अभ्यर्थियों को डर था. केवल अनु सिंह ही नहीं, बल्कि उनके जैसी क़रीब 400 अन्य गर्भवती महिला अभ्यर्थियों को भी आयोग ने फ़िटनेट टेस्ट में शामिल नहीं होने दिया.

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आयोग ने नहीं दिया था कोई कैलेंडर

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने पिछले साल नवंबर में एक अधिसूचना जारी कर दारोगा के 1,717 पदों के लिए नौकरी निकाली थी.

इसी साल 11 मार्च को इस भर्ती के लिए प्रारंभिक लिखित परीक्षा हुई थी और 22 जुलाई को मुख्य लिखित परीक्षा थी.

जिस वक़्त इस सरकारी नौकरी की अधिसूचना जारी हुई थी, उस समय भर्ती प्रक्रिया का कोई कैलेंडर जारी नहीं किया गया था.

आयोग के लोग मानते हैं कि इस बार भर्ती की प्रक्रिया काफ़ी तेज़ रही है. इसलिए अगस्त में मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद सितंबर में ही अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुला लिया गया.

अनु सिंह कहती हैं, "फ़िटनेस टेस्ट पहले से फ़िक्स नहीं था. हमें कोई कैलेंडर नहीं मिला था. ज़्यादातर लोगों ने फ़ॉर्म ऑनलाइन भरा था. जहाँ तक मेरी बात है तो मैं प्रारंभिक परीक्षा के पहले ही प्रेगनेंट हो चुकी थी. हम लोगों को आइडिया नहीं था."

महिला अभ्यर्थियों ने बताया कि 12 दिन में ही मेन परिक्षा का रिज़ल्ट निकाल दिया गया और फिर दस दिन बाद ही फ़िटनेस टेस्ट के लिए बुला लिया गया.

ज़्यादातर अभ्यर्थियों का दावा है कि ऐसा अब से पहले कभी नहीं हुआ.

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'सपनों' पर संकट

बिहार पुलिस में दारोगा की भर्ती के लिए हुई मुख्य लिखित परीक्षा को पास करने वाली सभी 10,761 अभ्यर्थियों का फ़िटनेस टेस्ट को गया है.

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग अब भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम निकालने की तैयारी में है.

लेकिन इनमें क़रीब 400 गर्भवती महिलाएं ऐसी हैं जिनके 'सपने' पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. ज़्यादातर महिलाओं की डिलीवरी की डेट जनवरी से मार्च के बीच है.

इनमें से ज़्यादातर महिलाओं के आवेदन और प्रार्थना-पत्र आयोग के बेली रोड स्थित कार्यालय में जमा हैं.

ये गर्भवती महिलाएं फ़िटनेस टेस्ट में शामिल होने के लिए पहुँची तो ज़रूर थीं, लेकिन उन्हें गर्भवती होने के कारण अनफ़िट घोषित करके वापस लौटा दिया गया.

इन अभ्यर्थियों में से एक जहानाबाद की प्रियंका कुमारी से बीबीसी ने बात की.

प्रियंका कहती हैं, "हम 29 सितंबर को फ़िटनेस टेस्ट में शामिल होने के लिए पहुँचे थे. मगर ये कहकर हमें लौटा दिया गया कि हम लोग प्रेगनेंट हैं, इसलिए दौड़ नहीं सकते."

प्रियंका कहती हैं कि आयोग की तरफ से उन्हें अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है.

वो कहती हैं, "शादी के बाद हम लोग नए घर में आये. नई जिम्मेदारियाँ मिलीं. घर को आगे आकर संभालना तो था ही, साथ में अपने सपने को साकार भी करना था."

प्रियंका की जब शादी नहीं हुई थी तभी से वो दारोगा बहाली का इंतजार कर रही थीं. जब अधिसूचना आई तो उनकी शादी हो चुकी थी.

उन्होंने बताया, "आज की तारीख़ में मेन एग्ज़ाम पास करना कितना मुश्किल है. लेकिन उसके बाद ये सब हो जाये तो मानिए आप अपने सपने हार गए."

प्रियंका कहती हैं कि आयोग को लड़कियों पर शक है कि वो बहाना बना रही हैं. लेकिन वो सवाल करती हैं कि कोई लड़की इस मामले में ऐसा बहाना क्यों बनाएगी?

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Image caption अनु सिंह

गर्भपात की कोशिश

29 सितंबर को जब पटना के गर्दनीबाग हाई स्कूल में फ़िटनेस टेस्ट चल रहा था, तो वक़्त प्रियंका के अलावा रांची की लकी कुमारी, पटना की रोज़ी, अनु सिंह और नग़मा जैसी कई अभ्यर्थियों ने आयोग के अधिकारियों से गुहार लगाई थी.

मगर अधिकारियों ने उन्हें ये कहकर लौटा दिया था कि उनके वश में कुछ नहीं है और वो कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं.

प्रियंका कहती हैं कि किसी भी अधिकारी ने उनके आवेदन-पत्र पर कोई रिसिविंग नहीं दी.

30 सितंबर को प्रभात ख़बर अख़बार के पटना संस्करण में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार एक महिला अभ्यर्थी ने दारोगा बनने के अपने सपने के लिए गर्भपात तक कराने का फ़ैसला कर लिया था. मगर ससुराल वालों ने उन्हें गर्भपात कराने से मना कर दिया.

अनु सिंह भी उस दिन की घटना का ज़िक्र करते हुए कहती हैं कि फ़िटनेस टेस्ट वाले दिन भी वो महिला अभ्यर्थी पटना हाई स्कूल के कैंपस में आई थी. वो रो रही थी. अनफ़िट घोषित करने और लौटा दिए जाने के बाद वहाँ मौजूद मीडिया वालों ने जब पूछा तो उसने अपनी सारी कहानी बताई थी कि कैसे अपने सपने को पूरा करने के लिए वो गर्भपात कराने के लिए अस्पताल तक चली गई. फिर पति उसे वहाँ से वापस लाया.

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Image caption पूजा भारती

'सास को कैसे मना करें'

गर्भवती महिला अभ्यर्थियों ने पटना हाई कोर्ट में आयोग के ख़िलाफ़ याचिका दायर की है.

इसमें मांग की गई है कि गर्भवती महिलाओं को शारीरिक तौर पर फ़िट होने के लिए मार्च तक का समय दिया जाये.

इस बारे में बात करते हुए ख़ुशबू कहती हैं, "हमने आयोग से मार्च तक का समय मांगा था. कोर्ट के सामने भी हमने यही माँग रखी है. लेकिन आयोग ने हमें बोला कि जो समझाना है कोर्ट को समझाइये."

"फ़िटनेस टेस्ट करा रहे एक ओएसडी अशोक प्रसाद ने कहा कि आप अपनी बातें कोर्ट में बताइयेगा, भर्ती प्रक्रिया नियम के तहत हो रही है."

कई अन्य अभ्यर्थियों ने बीबीसी को बताया कि ज़्यादातर गर्भवती महिलाओं ने आयोग को प्रार्थना भेज दी थी. लेकिन आयोग ने कहा कि नौकरी लेने के लिए फ़िटनेस टेस्ट में तो आना ही होगा.

अनु सिंह मूल रूप से आरा ज़िले की रहने वाली हैं. उन्होंने दानापुर में रहकर दारोगा परीक्षा की तैयारी की.

फिलहाल वो आरा के जैन कॉलेज से एमएससी फ़िजिक्स ऑनर्स कर रही हैं. साल 2015 में उनकी शादी हुई थी. वो पहली बार गर्भवती हुई हैं.

वो कहती हैं, "शादी नहीं हुई होती तो कोई प्रॉब्लम नहीं होती. हम लोग फ़िट थे. ये नैचुरल है आप इसको रोक नहीं सकते. आप अपनी माँ को मना कर सकते हैं. मगर सास को मना नहीं कर सकते हैं. शादी हो गई है तो आपकी ज़िम्मेदारी बनती है."

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कोर्ट तय करेगा अंतिम परिणाम!

महिला अभ्यर्थियों का ये मामला अब पटना हाई कोर्ट में चला गया है. इसलिए सारी निगाहें कोर्ट की सुनवाई पर हैं.

गर्भवती महिला अभ्यर्थियों ने भी हाई कोर्ट में अपनी माँग के साथ याचिका दायर की है.

वहीं दूसरी तरफ पटना हाई कोर्ट में दारोगा भर्ती परीक्षा में दूसरी अन्य गड़बड़ियों को लेकर रमेश कुमार एवं अन्य 195 अभ्यर्थियों ने भी याचिका दायर की है.

इन लोगों ने कोर्ट में ये दावा किया है कि लिखित परीक्षा में कई अनियमितताएं थीं.

इस पर सुनवाई करते हुए पिछले सप्ताह गुरुवार को जस्टिस शिवाजी पांडेय की एकल पीठ ने अदालत के पिछले फ़ैसले को बदलने से इनकार कर दिया था. इस आदेश में कोर्ट ने परिणाम नहीं घोषित करना को कहा था.

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में ये भी कहा है कि प्रारंभिक और मुख्य लिखित परीक्षा के परिणाम घोषित करने से पहले आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा में पिछड़ी जाति महिला वर्ग से एक भी अभ्यर्थी पास नहीं हुई थी. लेकिन जब मुख्य परीक्षा का परिणाम आया, तो उसमें पिछड़ी जाति की 291 महिला अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे.

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इतना ही नहीं, प्रारंभिक परीक्षा में अति पिछड़ा वर्ग की 222 महिलाएं पास हुई थीं, लेकिन मुख्य परीक्षा में 222 की जगह 616 महिलाओं को अति पिछड़ा वर्ग से पास दिखाया गया है.

इस साल हुई बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा को लेकर इसी तरह के तमाम सवाल पहले से उठ रहे हैं.

कभी परीक्षा में गड़बड़ी की बात सामने आई तो कभी मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर सवाल उठाया गया.

हालांकि बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग के ओएसडी अशोक प्रसाद तमाम तरह के आरोपों से इनकार करते हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "भर्ती प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है. सभी सफल उम्मीदवारों को फ़िटनेस टेस्ट के लिए बुलाया जा चुका है. अब आयोग जल्दी ही अंतिम परिणाम घोषित करने की तैयारी में है."

अशोक प्रसाद कहते हैं, "परिणामों को लेकर हाई कोर्ट ने जो रोक लगाई है वो बहुत जल्द हट जाएगी. हमने अपनी ओर से तमाम तर्क और डॉक्युमेंट जुटा लिया है जो अगली सुनवाई में कोर्ट में पेश की जाएगी. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट की भी गाइडलाइन है कि एक साल के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरी करा लेनी है. हमने पिछले साल नवंबर में इसकी अधिसूचना जारी की थी. इसलिए अब अंत पर पहुंच गए हैं."

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महिला अभ्यर्थियों को वक़्त मिलेगा?

इस सवाल पर कि क्या गर्भवती महिलाओं की मांगे मानी जाएंगी और उन्हें शारीरिक तौर पर फ़िट होने के लिए कुछ वक्त दिया जाएगा?

अशोक प्रसाद कहते हैं, "अभी तक सारी भर्ती प्रक्रिया आयोग के नियमों और प्रावधानों के अनुसार हुई है. ये सही है कि हमने कैलेंडर नहीं जारी किया था. मगर हम सुप्रीम कोर्ट की नीति से बंधे हुए थे. हमें एक साल के अंदर भर्ती प्रक्रिया पूरी कर लेनी थी."

"आयोग के दफ़्तर में भी ऐसे सैकड़ों आवेदन आए हैं जिसमें महिला अभ्यर्थियों के गर्भवती होने का ज़िक्र है. मगर इसके लिए हम कुछ नहीं कर सकते. कितने आवेदनों के ऊपर विचार किया जाए. क्योंकि सबकुछ समय से और अभ्यर्थियों को पहले से बताकर किया गया. दोबारा फ़िटनेस टेस्ट संभव नहीं है. बाकी देखिए जैसा अदालत का आदेश होगा वैसे ही आयोग अपना काम करेगा."

हालांकि बिहारशरीफ़ में रहने वाली एक महिला अभ्यर्थी कुमारी पूजा भारती को अब भी उम्मीद है कि उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जाएगा.

वो कहती हैं, "इस नौकरी के लिए हमने बहुत सपना संजोए थे. साल 2013 से तैयारी कर रही थी. शादी 2017 में हुई. पापा से बोलते थे पहले शादी मत करिए. मगर कर दिए. अब क्या करें! अच्छे वक़्त की उम्मीद ही कर सकते हैं."

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