मोदी-शिंजो आबे की 11 मुलाकातों से भारत को क्या मिला?

  • 28 अक्तूबर 2018
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को जापान पहुंचे. मोदी अपने जापानी समकक्ष शिंजो आबे के साथ 28 और 29 अक्तूबर को सालाना बैठक में शामिल होंगे.

वर्ष 2014 के बाद यह मोदी और आबे की 12वीं मुलाक़ात होगी और दोनों नेताओं के बीच पांचवां वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा.

दोनों देशों के बीच सालाना बैठक में भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर भी जोर दिए जाने की संभावना है.

साथ ही इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यूएवी, रोबोटिक्स समेत कई अन्य मसलों पर चर्चा होगी.

विदेश सचिव विजय गोखले के अनुसार जापान के प्रधानमंत्री राजधानी टोक्यो से करीब 110 किलोमीटर दूर यामानशी स्थित हॉलिडे होम में नरेंद्र मोदी को डिनर देंगे. मोदी के ठहरने की व्यवस्था भी यहीं की गई है.

जापान जाने से पहले नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया किया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी शिंजो आबे से यह 12वीं मुलाक़ात होगी.

उन्होंने जापान को आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में लुक ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत का सबसे भरोसेमंद साझीदार बताया.

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कितना अहम है मोदी का जापान दौरा?

शिंजो आबे पिछले ही हफ़्ते चीन से लौट कर आए हैं, लिहाजा प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे को बहुत महत्वपूर्ण बताया जा रहा है.

मलाया यूनिवर्सिटी में सीनियर लेक्चरर डॉ. राहुल मिश्रा कहते हैं, "भारत पिछले दो साल में डोकलाम विवाद के बाद से चीन को एक नए सिरे से समझने की कोशिश कर रहा है. ये दोनों देश चीन के साथ बातचीत शुरू करने के अलावा भारत-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक सहयोग पर बातचीत करेंगे."

वो कहते हैं, दोनों ही देश तेज़ी से नजदीक आ रहे हैं. चीन को एक चुनौती के तौर पर देखा जा सकता है. दोनों देश यह देख रहे हैं कि उनकी मान्यता बहुत है. दोनों यह जानते हैं कि एशिया में तीन सबसे बड़ी ताक़ते हैं- चीन, जापान और भारत. अगर विश्व व्यवस्था में अपना बड़ा किरदार चाहते हैं तो भारत और जापान को एक दूसरे के क़रीब आना होगा."

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मोदी-आबे मुलाकातों से भारत को क्या मिला?

2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद शिंज़ो आबे के साथ यह नरेंद्र मोदी की 12वीं मुलाक़ात है. मोदी की यह तीसरी जापान यात्रा है. शिंज़ो आबे भी 2014, 2015 और 2017 में भारत आ चुके हैं.

अब तक इन दोनों के बीच हुई पिछली 11 मुलाकातों में क्या कुछ निकल कर आया है?

राहुल मिश्रा कहते हैं, "स्पेशल स्ट्रैटेजिक ग्लोबल पार्टनरशिप. यह मोदी सरकार के आने के बाद हुआ. मेक इन इंडिया में भारत का बढ़ चढ़ कर साथ दिया है. समस्या भारत की तरफ़ से ज़्यादा है क्योंकि कई प्रोजेक्ट्स अमल में नहीं आ रहे हैं. जबकि जापान इन्हें लेकर बहुत उत्सुक सहयोगी रहा है."

वो कहते हैं, "15 बिलियन का जो बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट है, यदि यही सिर्फ़ कार्यान्वित हो जाता है तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी जिसका श्रेय भी मोदी सरकार को मिलेगा. दक्षिण एशियाई देशों बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका में साझा निवेश की बात चल रही है. इसे आर्थिक रणनीतिक साझीदारी के रूप में देखा जाना चाहिए. जापान भारत की सामर्थ्य में कमी को दूर करने में मदद कर रहा है. पिछले 70 वर्षों के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई दूसरा देश हिंद महासागर में अपने सॉफ़्ट इन्फ्लुएंस को बचाने के लिए भारत में निवेश करने को तैयार है."

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मोदी-आबे के बीच क्या बातचीत होगी?

दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के अलावा हिन्द प्रशांत क्षेत्र की स्थिति के बारे में भी चर्चा हो सकती है.

2019 में भारत में चुनाव होने हैं. जापान को यह मालूम है लिहाजा वो यह देखना चाहेगा कि मोदी सरकार के आने के बाद जो प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए या जिन पर बातें की गईं उनका क्या हुआ. आगे उनका भविष्य क्या है.

राहुल मिश्रा कहते हैं, "जापान देखना चाहेगा कि अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति क्या है क्योंकि ज़मीन को लेकर इसमें अभी अड़चने आ रही हैं. इस बातचीत में चीन की बढ़ती आक्रामक पर दोनों देशों के बीच गहन चर्चा होगी. एशिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर पर दोनों देशों के बीच बातचीत होगी."

अगले महीने भारतीय सेना और जापान ग्रुप सेल्फ डिफेंस फोर्स यानी जापानी सेना पहली बार संयुक्त अभ्यास करेगी. यह मिज़ोरम के वैरेंग्ते में आयोजित होगा.

राहुल मिश्रा कहते हैं, "नौसेना और जापान की सेल्फ डिफेंस फोर्स के बीच यह लॉजिस्टिक शेयरिंग और रीफ्यूलिंग समझौते की बात है जो कि एक बहुत बड़ा कदम है. आने वाले एक-दो वर्षों में यह लागू हो जाता है तो यह भारत की नौसेना के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी."

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