पाँच बड़ी ख़बरें: गणतंत्र दिवस पर भारत नहीं आएंगे डोनल्ड ट्रंप

  • 28 अक्तूबर 2018
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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि नहीं होंगे. भारत ने गणतंत्र दिवस के लिए ट्रंप को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था, लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति ने भारत आने में असमर्थता जताई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी अधिकारियों ने इस संदर्भ में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को पत्र के माध्यम से सूचित कर दिया है.

अमरीकी अधिकारियों ने भारत के न्योता स्वीकार नहीं करने पर खेद जताया है. पत्र में कहा गया है कि उस वक़्त ट्रंप की घरेलू व्यस्तताएं हैं, इसलिए भारत का न्योता स्वीकार करने में असमर्थ हैं. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने को लेकर ट्रंप का यह रुख़ उनके पूर्ववर्ती बराक ओबामा से बिल्कुल उलट है.

ओबामा ने 2015 में भारत का न्योता स्वीकार किया था और वो गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बने थे. ओबामा के साथ भी घरेलू व्यस्तताएं थीं, लेकिन उन्होंने भारत आने को प्राथमिकता दी थी.

हाल के दिनों में भारत और अमरीका के संबंधों में मतभेद खुलकर सामने आए हैं. अमरीका चाहता था कि भारत रूस से एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 ना ख़रीदे, लेकिन भारत ने अमरीकी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए इस डील को अंजाम तक पहुंचाया.

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सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ बोले अमित शाह

बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने शनिवार को कहा कि केरल में आपातकाल जैसे हालात हैं. अमित शाह ने सबरीमला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं का समर्थन किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को ख़त्म कर दिया था. पिछले कुछ दिनों में केरल पुलिस ने 2000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया है. प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद महिलाओं को मंदिर में नहीं आने दे रहे हैं.

केरल के कन्नूर में बीजेपी के नए ज़िला ऑफिस का उद्घाटन करने पहुंचे शाह ने कहा, ''राज्य के हालात पर बीजेपी मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती है. आज केरल में श्रद्धालु राज्य सरकार के कठोर रवैए का सामना कर रहे हैं. 2000 से ज़्यादा बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया गया है. मेरी पार्टी की सहानुभूति इन श्रद्धालुओं के साथ है और मैं चेतावनी देता हूं कि वामपंथी सरकार संभल जाए.''

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मोदी के ख़िलाफ़ विपक्षी एकता के लिए सक्रिय हुए नायडू

2019 के आम चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी के ख़िलाफ़ विपक्षी एकता को एक मंच लाने की कोशिश एक बार फिर से शुरू हो गई है. शनिवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगू देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, नेशनल कॉन्फ़्रेंस प्रमुख फ़ारूक़ अब्दुल्ला और लोकतांत्रिक जनता दल नेता शरद यादव से मुलाक़ात की.

इन नेताओं से मुलाक़ात के बाद चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र भवन में बीजेपी के पूर्व वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, सीपीआई नेता डी राजा और एस सुधाकर रेड्डी से भी मुलाक़ात की. नायडू ने मायावती से एक घंटे तक मुलाक़ात की. हाल ही में मायावती ने कांग्रेस पर हमला बोला था और कहा कि कांग्रेस उनकी पार्टी को ख़त्म करना चाहती है.

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बिहार के एनडीए में उथल-पुथल

बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि 2019 के आम चुनाव में उनकी पार्टी और नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेगी. शाह ने यह घोषणा नई दिल्ली में नीतीश कुमार की मौजूदगी में की थी.

शाह की इस घोषणा के बाद एनडीए के दो और सहयोगी दल रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी हरकत में आ गई हैं. कहा जा रहा है कि इस घोषणा से बीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि एलजेपी को चार सीट से ज़्यादा नहीं मिलेंगी.

अगर ऐसा होता है तो 2014 से तीन सीटें कम एलजेपी को मिलेंगी. रामविलास पासवान के बारे में कहा जा रहा है कि वो अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं और राज्यसभा में जाने का मूड बना चुके हैं.

द हिन्दू के मुताबिक़ बीजेपी का मानना है कि एलजेपी के बिहार में कुल छह सांसदों में से दो कांग्रेस या आरजेडी के दामन थाम सकते हैं. हालांकि आरएलएसपी को लेकर कोई साफ़ तस्वीर सामने नहीं आ रही है.

2014 में उपेंद्र कुशवाहा को कुल तीन सीटें मिली थीं और उनकी पार्टी तीनों जीतने में कामयाब रही थी. कुशवाहा के एक सांसद अरुण कुमार पार्टी से नाराज़ बताए जा रहे हैं और वो बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. दूसरी तरफ़ ये बात भी कही जा रही है कि कुशवाहा एनडीए का दामन छोड़ आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं.

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Image caption डी हिगिंस दूसरी बार बने राष्ट्रपति

डी हिगिंस दूसरी बार बने राष्ट्रपति

आयरलैंड में निवर्तमान राष्ट्रपति माइकल डी हिगिंस दूसरी बार राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं. वो सात साल का अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करेंगे. हिगिंस को 55 प्रतिशत मत प्राप्त हुए जबकि उनके सबसे क़रीबी प्रतिद्वंदी को उनसे आधे मत ही मिले.

इसके अलावा आयरलैंड की जनता ने एक और जनमत संग्रह के लिए वोट डाला, जिसमें पूछा गया कि क्या ईशनिंदा पर लगी संवैधानिक रोक को हटा लेना चाहिए. लोगों ने इसके पक्ष में मतदान किया. आयरलैंड में फ़िलहाल ईशनिंदा करना आपराध की श्रेणी में आता है.

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