बच्ची पालती ड्यूटी पर तैनात पुलिस वाली की पूरी कहानी

  • 29 अक्तूबर 2018
कामकाजी महिला
Image caption सोशल मीडिया पर वायरल अर्चना की तस्वीर

तीन महीने से एक काम जो अर्चना नहीं करवा पाईं, वो एक झटके में उनकी एक तस्वीर ने कर दिया.

कहानी झांसी में रहने वाली अर्चना की है. अर्चना वहां पुलिस कांस्टेबल के पोस्ट पर तैनात हैं.

अर्चना पिछले तीन महीने से अपना तबादला आगरा करवाना चाहती थीं, लेकिन लखनऊ जाकर सीनियर से मिलने के बाद भी उनका तबादला आगरा नहीं हो पाया.

एक दिन अर्चना अपने छह महीने की बेटी के साथ थाने में ड्यूटी पर तैनात थीं. बेटी को वहीं नींद आ गई. अंदर कमरे में जहां बिस्तर की व्यवस्था थी, वहां एसी चल रहा था और ठंड ज़्यादा थी. इसलिए अर्चना बेटी को बाहर ले आई और मेज़ पर लिटाकर सुला दिया.

जब अर्चना अपने काम में मशरूफ थीं, तब वहां पहुंचे किसी पत्रकार ने उनकी बेटी की साथ तस्वीर खींच ली.

Image caption सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर

तस्वीर पर क्या थी प्रतिक्रिया

ये घटना 26 अक्टूबर की है. तस्वीर कुछ ही घंटों में वायरल हो गई.

फ़ोटो कब खींची गई, किसने खींची अर्चना को ये नहीं मालूम. बीबीसी हिंदी से बातचीत में अर्चना ने बताया, ''पहली बार वायरल फ़ोटो का पता तब चला जब पुलिस वालों के लिए बने WhatsApp ग्रुप में मैंने बिटिया और अपनी तस्वीर देखी.''

अर्चना को पहले तो लगा कि पुलिस ग्रुप में उनकी ये तस्वीर चल रही है. लेकिन अगले दिन 27 अक्टूबर को जब उन्होंने तस्वीर के साथ अख़बार में पूरी कहानी पढ़ी, तब उन्हें एहसास हुआ कि तस्वीर वायरल हो चुकी थी.

मीडिया में तस्वीर देख कर क्या तनाव में आ गईं अर्चना?

इस सवाल के जवाब में अर्चना कहती हैं, ''मैंने कोई चोरी तो की नहीं थी, न ही ड्यूटी में कोताही. मुझे भला क्यों डर लगता. लेकिन इतना ज़रूर है कि तस्वीर जैसे ही छपी मेरे सीनियर का फ़ोन आया. रविवार को सुबह डीजीपी सर का फ़ोन आया, उन्होंने पूछा क्या करें तो आपको सहूलियत होगी? मैंने आगार ट्रांसफ़र की बात कही. उन्होंने तुरंत मेरी अर्ज़ी स्वीकार कर ली.''

Image caption सोशल मीडिया पर वायरल होती तस्वीर

अर्चना की पूरी कहानी

अर्चना की शादी 2006 में हुई थी. अर्चना के पति गुरुग्राम में प्राइवेट नौकरी करते हैं. 2008 में उनकी बड़ी बेटी पैदा हुई, नाम रखा कनक.

अर्चना को शादी से पहले से ही सरकारी नौकरी करने का शौक था. उन्होंने पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई की है और साथ ही बी.एड भी किया है. वो पहले टीचर बनना चाहती थीं. लेकिन जब टीचर की नौकरी नहीं मिली तो सब इंस्पेक्टर के पोस्ट के लिए आवेदन किया.

वहां लिखित परीक्षा भी पास कर ली, लेकिन आगे बात नहीं बनी. फिर 2016 में कांस्टेबल की भर्ती निकली.

अर्चना ने घरवालों के कहने पर इस परीक्षा का फ़ॉर्म भर दिया और पास भी कर लिया.

डेढ़ साल नौकरी करने के बाद अर्चना दोबारा प्रेग्नेंट हुईं. लेकिन इस बार मामला पूरा अलग था.

बड़ी बेटी कनक के समय अर्चना नौकरी नहीं कर रही थीं. लेकिन छोटी बेटी के समय हालात बदल गए थे.

उसी साल अप्रैल में उन्हें बिटिया हुई है.

प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में ही अर्चना छुट्टी पर चली गई थीं. बिटिया पांच महीने की हुई तो अर्चना को वापस ड्यूटी जॉइन करनी पड़ी.

लेकिन अर्चना के सामने बड़ी समस्या थी.

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Image caption अर्चना की बेटी अनिका

पांच महीने की छोटी-सी बच्ची का ध्यान कौन रखेगा?

2016 में ही अर्चना ने पुलिस की नौकरी जॉइन की थी. नौकरी ज्वाइंन करते ही अर्चना को पहली पोस्टिंग झांसी मिली.

सरकारी नौकरी करना अर्चना का सालों पुराना सपना था.

नौकरी के लिए अर्चना ने अपने आठ साल की बड़ी बेटी को दादी के पास कानपुर छोड़ा और पति को गुरुग्राम में अकेले छोड़, खुद झांसी चली गई.

छोटी बेटी को घर पर अकेले नहीं छोड़ सकती थी. इसलिए अर्चना बच्ची को साथ ड्यूटी पर ले जाने लगीं.

उसी दौरान उनकी तस्वीर खींच कर किसी ने सोशल मीडिया पर डाल दी और इस तरह देखते ही देखते उनकी तस्वीर वायरल भी हो गई.

लेकिन ये सब इतना आसान नहीं है.

अपने सुबह से शाम तक के रूटीन के बारे में अर्चना कहती हैं, ''वैसे तो नौ घंटे की ड्यूटी होती है, लेकिन काम पड़े तो रात-दिन कभी भी बुलाया जा सकता है. हफ्ते में एक दिन नाइट भी लगती है. वो मुश्किल घड़ी होती है.''

अर्चना कहती हैं, "पिछले एक महीने में एक बार ऐसा मौका आया जब मुझे नाइट ड्यूटी करनी पड़ी. उस दिन मैं दफ्तर में ही बिटिया के साथ रही. लेकिन बाकी मौके पर मैं ड्यूटी दूसरों के साथ एक्सचेंज कर लेती थी. जिसकी दिन की होती थी उनकी जगह मैं कर लेती और मेरी जगह वो कर लेते थे."

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Image caption ड्यूटी पर अर्चना के साथ अनिका

नौकरी और परिवार - एक साथ कितनी बड़ी चुनौती?

अर्चना ने छोटी बेटी का नाम अनिका रखा है. इस नाम के पीछे भी एक कहानी है. अनिका नाम में उनके परिवार के तीनों सदस्यों का अंश है. से अर्चना, से नीलेश (अर्चना के पति) और से कनक (अर्चना की बड़ी बेटी).

तो क्या अनिका का नाम जन्म से पहले ही सोच लिया था? इस सवाल के जवाब में अर्चना बस मुस्कुरा देती हैं. फिर ख़ुद कहना शुरू करती हैं,'' मेरे पूरे बिखरे परिवार को अनिका ने एक झटके में मिला दिया. मेरे सास-ससुर कानपुर में रहते हैं, मेरे माता पिता आगरा में और पति गुरुग्राम में. मुझे डीजीपी सर ने यक़ीन दिया है कि मेरा तबादला आगरा हो जाएगा. वहां मेरे माता पिता भी होंगे और पति भी आते-जाते रहेंगे. अब अपनी बड़ी बेटी के भी साथ रह पाऊंगी.''

छह महीने की अनिका ने न केवल अर्चना की जिंदगी आसान कर दी है बल्कि पुलिस में काम करने वाले बाकी मांओं के लिए एक रास्ता खोल दिया है.

अर्चना की कहानी अख़बारों में पढ़ कर उत्तर प्रदेश के डीजीपी ने ट्वीटर पर लिखा, "कामकाजी मांओं के लिए हर पुलिस लाइन में एक क्रेच का विकल्प हो, इस पर हम विचार कर रहे हैं."

2017 में ही केन्द्र सरकार ने नया मैटरनिटी बेनिफ़िट बिल पास किया है.

इस बिल में मातृत्व अवकाश 12 हफ्तों की जगह 26 हफ्तों का कर दिया गया, वो भी वेतन के साथ.

इस नए प्रावधान का फ़ायदा अर्चना को भी मिला. लेकिन इसी नए क़ानून में किसी भी संस्था जहां 50 से ज्यादा महिलाएं काम करती हैं वहां क्रेच की सुविधा अनिवार्य की गई थी. अर्चना को इस नए प्रावधान का फ़ायदा नहीं मिला था क्योंकि उनके थाने में इतनी महिलाएं नहीं थीं. पर अनिका और अर्चना के वायरल फ़ोटो ने इसकी भी शुरुआत कर दी है.

फ़िलहाल अर्चना को आगरा तबादले की सूचना सिर्फ फ़ोन पर मिली है. कागजी कार्रवाई का उन्हें इंतज़ार है.

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