भारत की कारोबार सुगमता रैंकिंग में सुधार क्या मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है

  • 31 अक्तूबर 2018
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कारोबार करने की सहूलियत यानी 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस' के मामले में भारत की वैश्विक रैंकिंग में बड़ा सुधार हुआ है.

विश्व बैंक ने साल 2019 के लिए 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस' का सर्वे जारी किया है जिसमें भारत 23 पायदान चढ़कर 77वें नंबर पर आ गया है.

इस सर्वे में 190 देशों को शामिल किया गया था.

पिछले साल भी भारत का प्रदर्शन सकारात्मक रहा था और यह 30 पायदान चढ़कर 100वें नंबर पर आया था.

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कहा-कहां सुधार हुआ

  • विश्व बैंक ने अपने सर्वे में कहा है कि भारत ने कई आर्थिक मोर्चों पर सुधार किया है. मसलन निर्माण के क्षेत्र में भारत की रैंकिंग अविश्वसनीय रूप से सुधरी है और यह पिछले साल की 181वीं रैंकिंग से उछलकर 52वें नंबर पर आ गया है.
  • विश्व बैंक ने ये भी कहा कि भारत ने अपने टैक्स सिस्टम में सुधार किया है और बैंकों से कर्ज़ लेने की प्रक्रिया आसान की है. कर्ज़ लेने के मामले में भारत 29वें से 22वें नंबर पर आ गया है. सर्वे में जीएसटी का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि इससे टैक्स का भुगतान और अलग-अलग हिस्सों में कारोबार करना आसान हुआ है. कारोबार शुरू करने के मामले में भारत पिछले साल के मुकाबले 156 से 137वें नंबर पर आ गया है.
  • बिजली का कनेक्शन लेना सस्ता और आसान हुआ है. बिजली के मामले में भारत की रैंकिंग सुधरकर 29वें से 24वें नंबर पर आ गई है.
  • भारत ने सीमा पार यानी दूसरे देशों में कारोबार और व्यापार में भी सुधार किया है. विदेश व्यापार के लिहाज़ से भारत 180 से 46वें नंबर पर आ गया है.
  • इस मामले में भारत पिछले साल 140वें नंबर पर था और अब 80वें नंबर पर आ गया है. सर्वे में भारत के 'नेशनल ट्रेड फ़ेसिलिटेशन ऐक्शन प्लान 2017-2020' का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि देश में आयात-निर्यात में लगने वाले वक़्त और होने वाली परेशानियों को काफ़ी हद तक कम किया गया है.
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विश्व बैंक की यह रिपोर्ट दिल्ली और मुंबई में कंपनी के एग्ज़ीक्यूटिव्स और कारोबार की समझ रखने वाले वकीलों से इंटरव्यू के बाद तैयार की गई है.

क्या है ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस?

आर्थिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा बताते हैं कि किसी भी देश में अगर निवेश की बात होती है तो उसके लिए कई पैमानों को देखा जाता है.

इनमें से एक है 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस' या कारोबारी सुगमता का पैमाना. कारोबारी सुगमता यानी ये जानना कि किसी देश में कारोबार शुरू करना कितना आसान या मुश्किल है.

मसलन, कारोबार शुरू करने में कितना समय लगता है, कोई बिल्डिंग बनानी है तो उसकी इजाज़त लेने में कितना वक़्त लगता है, बिजली का कनेक्शन लेना कितना आसान है...वगैरह-वगैरह.

रैंकिंग सुधरने के क्या फ़ायदे होंगे?

आर्थिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार शिशिर सिन्हा कहते हैं कि कोई भी विदेशी निवेशक अगर किसी दूसरे देश में निवेश के बारे में सोचता है तो वो सबसे पहले यही देखता है कि वहां कारोबार करना आसान है या नहीं.

ऐसे में अगर भारत के पास ऐसी रैंकिंग है जिसे ख़ुद विश्व बैंकिंग ने तैयार की है तो निवेशक को एक भरोसा मिलेगा कि यहां कारोबार करने का फ़ैसला सही होगा.

अगर एफ़डीआई की बात करें तो पिछले कुछ सालों में भारत के प्रदर्शन में सुधार हुआ है. रैंकिंग सुधरने के बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और बढ़ने की उम्मीद ज़रूर है. हालांकि ऐसा होगा ही, ऐसा पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता.

निवेश के अलावा फ़ायदों की बात करें तो ऐसी रिपोर्टें हमें ख़ुद को परखने का मौका देती हैं कि हम कहां मज़बूत स्थिति में हैं और कहां सुधार की गुंजाइश है.

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क्या ये मोदी सरकार की नीतियों का नतीजा है?

शिशिर सिन्हा कहते हैं कि पहले हमारी रैंकिंग दो, तीन या चार अंकों तक ही सुधरती थी लेकिन पिछले दो साल से रैंकिंग में ज़बरदस्त सुधार हुआ है.

सिन्हा कहते हैं कि अगर पिछले कुछ सालों का प्रदर्शन देखा जाए तो इसका श्रेय काफ़ी हद तक केंद्र की मोदी सरकार को दिया जाना चाहिए.

हालांकि वो ये भी मानते हैं कि सुधार एक सतत प्रक्रिया है और यह कहना अतिशयोक्ति होगी कि रैंकिंग में सुधार में सिर्फ़ केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से हुआ.

कितना सही है विश्व बैंक का आकलन?

शिशिर सिन्हा मानते हैं कि वर्ल्ड बैंक के सर्वे की कमियों की बात करें तो इसकी सबसे बड़ी कमी है इसका सैंपल साइज़ बहुत छोटा होना. यह रिपोर्ट सिर्फ़ दिल्ली और मुंबई के कारोबारियों से बात करके तैयार की गई है. ऐसे में देश के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व कहीं न कहीं छूट जाता है.

दूसरी तरफ़ अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ रखने वाले और वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने बीबीसी से कहा कि अगर आप दूसरे देशों से तुलना करेंगे तो भारत आगे बढ़ गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी है.

विश्व बैंक की इस रिपोर्ट की सोशल मीडिया पर भी खासी चर्चा है. ट्विटर पर #EaseOfDoingBusiness और World Bank सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहे हैं.

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट करके कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के सुधारवादी फ़ैसले लगातार बेहतरीन नतीजे दे रहे हैं. चार साल में हमारी रैंकिंग 142 से 77वें नंबर पर आ गई है. भारत अपने सुधार के एजेंडे को जारी रखे हुए है.

बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी इस बात की जानकारी दी गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में विदेशी निवेश और कारोबार की सहूलियत का प्रमुखता से ज़िक्र करते रहे हैं.

ऐसे में रोजगार, महंगाई, रुपये की गिरती क़ीमत, एनपीए और बैंकों के घोटाले से जूझ रही मोदी सरकार के लिए विश्व बैंक की इस रिपोर्ट को एक राहत की तरह देखा जा रहा है.

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