टीडीपी का साथ राहुल का मास्टरस्ट्रोक या मजबूरी

  • 1 नवंबर 2018
कांग्रेस, राहुल गांधी, तेलुगू देशम पार्टी, चंद्रबाबू नायडू इमेज कॉपीरइट Twitter/@INCIndia

चुनावों से पहले ​बीजेपी के ख़िलाफ़ विपक्ष को एकजुट करने की कवायद के बीच कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी ने और नज़दीकियां दिखाई हैं.

गुरुवार को एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुक़ अब्दुल्ला और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बीच दिल्ली में बैठक हुई.

इसमें तय किया गया है कि बीजेपी-विरोधी राजनीतिक गठबंधन के लिए एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया जाएगा और राजनीतिक दलों से शुरुआती बातचीत की ज़िम्मेदारी नायडू की होगी.

गुरुवार की इस बैठक के लिए चंद्रबाबू नायडू ख़ासतौर पर सुबह ही दिल्ली पहुंचे थे.

दोपहर बाद वो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले.

हालांकि, दोनों दल दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में राजनीतिक तौर पर एक-दूसरे के विरोधी हैं, लेकिन हाल के दिनों में ये चर्चा रही है कि अगले साल आंध्र प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी दोनों साथ जा सकते हैं.

तेलंगाना के लिए दोनों में पहले ही समझौता हो गया है.

गुरुवार की बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा, ''हमारा एक इतिहास रहा है, लेकिन हमने तय किया है कि हम उसकी तरफ़ रुख़ नहीं करेंगे और भविष्य के लिए मिलकर काम करेंगे.''

इससे समझा जा रहा है कि आंध्र प्रदेश में दोनों के बीच चुनाव को लेकर समझौता लगभग तय है. हालांकि, कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि नायडू प्रदेश में कांग्रेस को राजनीतिक ज़मीन मुहैया करवा कर बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं.

प्रदेश की 25 लोकसभा और 125 विधानसभा सीटों में फ़िलहाल कांग्रेस के पास एक भी सीट नहीं है.

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गठबंधन का चेहरा कौन?

राहुल ने 'राष्ट्रव्यापी विपक्षी दलों वाले गठबंधन का चेहरा कौन होगा,' इस सवाल का किसी तरह का सीधा जवाब देने से इंकार कर दिया और कहा कि इन सब सवालों का जवाब वक़्त के साथ मिल जाएगा.

नायडू का कहना था कि आपकी दिलचस्पी उम्मीदवार के नाम में है, हमारी देश को बचाने में.

सुबह पवार, अब्दुल्ला और नायडू ने एक साझा प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा था कि देश की संस्थाओं पर जिस तरह से केंद्रीय हुकूमत के ज़रिये एक के बाद एक हमले हो रहे हैं उसके लिए ज़रूरी है कि राजनीतिक दल लोकतंत्र की रक्षा के लिए साथ आएं.

सीबीआई, ईडी, आरबीआई का हवाला देते हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुक़ अबदुल्ला ने कहा कि देश एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा है.

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नायूड ने कहा है कि वो गठबंधन के सिलसिले में तमिलनाडु के क्षेत्रीय दल डीएमके से भी मुलाक़ात करेंगे.

एक हफ़्ते के भीतर ये दूसरी बार है कि नायडू दिल्ली आए हैं.

पिछले दौरे में उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बीएसपी प्रमुख मायावती से मुलाक़ात की थी.

तय कार्यक्रम के मुताबिक़ इस बार वो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से भी मिलने वाले हैं.

कांग्रेस-टीडीपी के साथ आने के मायने क्या हैं

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राजनीतिक विश्लेषक कल्याणी शंकर इन नेताओं के साथ आने को उन सबकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा के तौर पर देखती हैं, लेकिन उनका ये भी कहना है कि इन सभी को इस बात का आभास हो चुका है कि मोदी को हराने के लिए उनका साथ आना ज़रूरी है.

साथ ही कल्याणी शंकर ये भी जोड़ती हैं कि एनडीए विरोधी गठबंधन अभी तक एक क़दम आगे और दो क़दम पीछे वाली स्थिति से जूझ रहा है.

वो कहती हैं कि नायडू 1996-97 के यूनाइटेड फ़्रंट के समय राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा चुके हैं. एक तो वो इसे दोहराना चाहते हैं और दूसरे उनकी मंशा इस खेल के नए खिलाड़ी टीआरएस के चंद्रशेखर राव से आगे जाने की है जिन्होंने पिछले दिनों एक तीसरा फ़्रंट बनाने की शुरुआत की थी. लेकिन फ़िलहाल वो विधानसभा चुनाव में मशगूल हैं.

टीडीपी-कांग्रेस के आंध्र प्रदेश में साथ आने को लेकर वो कहती हैं कि ऐसी चर्चा है कि बीजेपी वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी के साथ मिलकर वहां का चुनाव लड़ सकती है तो राहुल के साथ आने पर नायडू को भी राजनीतिक तौर पर फ़ायदा होगा.

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