सीबीआई ने कहा, उसके पास राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ पर्याप्त संदिग्ध दस्तावेज़ हैं

  • 1 नवंबर 2018
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Image caption राकेश अस्थाना

सीबीआई में चल रहे विवादों के बीच केंद्रीय जांच एजेंसी ने छुट्टी पर भेजे गए विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की एफआईआर रद्द करने की याचिका का विरोध किया है.

अस्थाना ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपने ख़िलाफ़ दायर एफआईआर रद्द करने की मांग की थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीबीआई ने गुरुवार को कोर्ट में कहा कि राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ लगे आरोप संज्ञेय अपराध हैं. उसके पास इस मामले में अस्थाना और अन्य के ख़िलाफ़ पर्याप्त संदिग्ध दस्तावेज़ हैं.

सीबीआई ने कोर्ट को ये भी बताया कि जांच में उसके हाथ बंधे हुए हैं क्योंकि कुछ फाइलें केंद्रीय सतर्कता आयोग की निगरानी में हैं.

बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ कार्यवाही के मामले में 14 नवंबर तक यथास्थि​ति बनाए रखने का आदेश दिया.

इससे पहले 29 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने सीबीआई को याचिका पर जवाब न देने के लिए डांट लगाई थी.

राकेश अस्थाना पर मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के मामले में कार्रवाई न करने के लिए तीन करोड़ रुपये रिश्तव लेने का आरोप है.

अस्थाना ने आईपीसी की 15 धाराओं और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत अपने और तीन अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर रद्द करने की मांग की थी.

अस्थाना ने आरोप लगाया कि ये एफआईआर दिखाती है कि, ''देश की प्रमुख जांच एजेंसी के उच्च अधिकारी कैसे अपने आपराधिक कार्यों को छुपाने के लिए एजेंसी के दूसरे वरिष्ठ अधिकारी को झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं.''

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गिरफ्तारी से राहत

राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ सीबीआई ने हैदराबाद के बिज़नेसमैन सतीश बाबू सना की शिकायत पर एफ़आईआर दर्ज की थी.

सतीश बाबू का आरोप है कि उन्होंने अपने ख़िलाफ़ जांच रोकने के लिए तीन करोड़ रुपयों की रिश्वत दी. एफ़आईआर में अस्थाना के ख़िलाफ़ साज़िश और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है.

पिछले हफ़्ते दर्ज एफ़आईआर में कहा गया है कि सतीश बाबू ने दुबई में रहने वाले एक व्यक्ति मनोज प्रसाद की मदद से रिश्वत देने की बात कही है.

एफ़आईआर के मुताबिक, मनोज प्रसाद का दावा था कि वो सीबीआई में लोगों को जानते हैं और जांच को रुकवा सकते हैं. सतीश बाबू के ख़िलाफ़ जो जांच चल रही थी उसकी अगुआई राकेश अस्थाना कर रहे थे.

सीबीआई ने राकेश अस्थाना के अलावा मोइन क़ुरैशी मामले में जांच अधिकारी देवेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया था.

सीबीआई का कहना है कि डीएसपी देवेंद्र कुमार ने मोइन क़ुरैशी मामले में भ्रष्टाचार में राकेश अस्थाना का साथ दिया था.

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Image caption आलोक वर्मा

वर्मा और अस्थाना का टकराव

इस मामले की शुरुआत सीबीआई के छुट्टी पर भेजे गए निदेशक आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच टकराव से हुई थी. आलोक वर्मा ने अस्थाना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था और जांच के आदेश दिए थे.

वहीं, राकेश अस्थाना ने भी आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ करोड़ों रुपये की रिश्वत की शिकायत कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजी थी.

उन्होंने वर्मा के ख़िलाफ़ आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कोयला और 2जी घोटाले में शामिल दो लोगों को सेंट किट्स की नागरिकता लेने से रोकने के लिए कुछ नहीं किया.

अस्थाना ने वर्मा के ख़िलाफ़ हरियाणा में एक ज़मीन के सौदे में गड़बड़ी करने और भ्रष्टाचार के दूसरे कथित मामलों का भी ज़िक्र किया है.

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आलोक वर्मा सीबीआई के निदेशक हैं जबकि राकेश अस्थाना विशेष निदेशक.

सीबीआई निदेशक बनने से पहले वर्मा दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, दिल्ली में जेलों के डीजीपी, मिज़ोरम के डीजीपी, पुडुचेरी के डीजीपी और अंडमान-निकोबार के आईजी थे. आलोक वर्मा सीबीआई के पहले निदेशक हैं जिनके पास इस जांच एजेंसी का कोई अनुभव नहीं रहा है.

राकेश अस्थाना वर्ष 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और विशेष निदेशक बनने से पहले सीबीआई में कई भूमिकाओं में काम कर चुके हैं.

अस्थाना ने कई अहम मुक़दमों की जांच की है, जिनमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का चारा घोटाला भी शामिल है. गोधरा में ट्रेन जलाने की एसआईटी जांच भी अस्थाना ने की थी.

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