रफ़ाल सौदे को लेकर पीएम मोदी पर नए आरोप

  • 2 नवंबर 2018
इमेज कॉपीरइट Rahul Gandhi

फ्रांस की दासो कंपनी के साथ हुए रफ़ाल लड़ाकू विमानों की ख़रीद के समझौते पर लगातार सवाल उठा रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को नए आरोप लगाए.

राहुल गांधी ने कहा कि रफ़ाल सौदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति अनिल अंबानी की साझेदारी है.

गांधी ने दासो कंपनी के सीईओ पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि दासो ने नुक़सान में चल रही अनिल अंबानी की कंपनी को 284 करोड़ रुपए दिए थे.

राहुल गांधी के आरोपों को नकारते हुए रिलायंस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अनिल अंबानी की अन्य कंपनियों के रफ़ाल सौदे से कोई संबंध नहीं है.

रिलायंस के बयान में कहा गया, "कांग्रेस पार्टी के लगातार बोले जा रहे झूठ इस सच को नहीं बदल सकते हैं कि अनिल अंबानी ने दासो के साथ कोई व्यक्तिगत लेनदेन नहीं किया है ना ही उन्होंने किसी तरह के लेनदेन से कोई व्यक्तिगत फ़ायदा उठाया है."

रिलायंस ने अपने बयान में कहा है कि प्रांतीय और आम चुनावों के मद्देनज़र चल रही राजनीतिक लड़ाई में अनिल अंबानी को घसीटा जाना अफ़सोसनाक़ है.

भारत सरकार भी इस समझौते में भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को नकारती रही है. बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को नकारते हुए कहा है कि ये रक्षा सौदा करने के लिए उनकी सरकार की प्रशंसा होनी चाहिए.

रिलायंस डिफ़ेंस पर आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कहा, "आठ लाख तीस हज़ार रुपए की कंपनी जो कुछ नहीं कर रही थी, नुक़सान में चल रही थी, उसमें दासो ने 284 करोड़ रुपए क्यों डाले. इसी को किकबैक कहते हैं, ये अनिल अंबानी को दासो की ओर से दिए गए किकबैक की पहली किश्त थी."

इमेज कॉपीरइट Getty Images

उन्होंने कहा, "हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को ठेका न देने की वजह बताते हुए दासो के सीईओ ने कहा था कि एचएएल को ठेका इसलिए नहीं दिया गया था क्योंकि अनिल अंबानी के पास ज़मीन थी. अब ये बात सामने आई है कि जो ज़मीन अंबानी के पास थी वो दासो से मिले पैसे से ही ख़रीदी गई थी."

बीते सप्ताह दिए एक बयान में दासो एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कहा था कि उनकी कंपनी भारत के साथ हुए रफ़ाल विमान समझौते की जांच के लिए तैयार है.

उन्होंने इस सौदे में किसी तरह के भ्रष्टाचार के सभी आरोपों को नकारते हुए कहा था अंबानी के साथ कंपनी के रिश्ते 2012 से हैं. उन्होने ये भी कहा कि अंबानी के रिलायंस समूह के साथ कंपनी 850 करोड़ रुपए का कारोबार करेगी न कि तीस हज़ार करोड़ रुपए का.

समझौते का बचाव करते हुए ट्रैपियर ने कहा था, "हम फ्रांस क़ानूनों, भारत के क़ानूनों और समझौते की शर्तों का सम्मान करते हैं. हम पूरी तरह भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हैं और अगर फ़्रांस या भारत में कोई जांच होती है तो हम उसमें सहयोग करेंगे."

इमेज कॉपीरइट DASSAULT RAFALE

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, "ये स्पष्ट भ्रष्टाचार का मामला है. दो ही लोग हैं जिन्हें बचाया जा रहा है. अनिल अंबानी और नरेंद्र मोदी. रफ़ाल सौदे में मोदी और अंबानी की हिस्सेदारी है."

उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी की रातों की नींद ग़ायब है क्योंकि उन्हें रफ़ाल मामले में जांच का डर है. अगर जांच शुरू हो गई तो मोदी बच नहीं पाएंगे. क्योंकि ये भ्रष्टाचार का मामला है और सब जानते हैं कि फ़ैसला किसने लिया है. ये सौदा नरेंद्र मोदी ने अंबानी को तीस हज़ार करोड़ रुपए देने के लिए किया था."

राहुल ने फिर दोहराया कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा को इसलिए ही हटाया गया है क्योंकि वो रफ़ाल सौदे की जांच करना चाहते थे.

बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में तीन जजों की एक बैंच ने सरकार से रफ़ाल विमानों की क़ीमत के बारे में सीलबंद लिफ़ाफ़े में जानकारी देने के लिए कहा है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि रणनीतिक रूप से अहम और गुप्त जानकारियों को साझा करना ज़रूरी नहीं है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार