प्रेस रिव्यू- ज़रूरत पड़ी तो राम मंदिर के लिए 1992 की तरह आंदोलन: RSS

  • 3 नवंबर 2018
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Image caption राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैया जी जोशी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में मंदिर मुद्दे की सुनवाई टलने से करोड़ों हिंदू अपमानित महसूस कर रहे हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि ज़रूरत पड़ी तो वो मंदिर के लिए साल 1992 की तरह आंदोलन करेंगे.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक भैय्या जी जोशी ने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं और उससे हिंदुओं की भावनाएं समझने की अपील करते ,हैं लेकिन अदालत के निर्णय का वक़्त बहुत लंबा हो गया है."

उन्होंने कहा कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का मुद्दा अदालत की प्राथमिकताओं में नहीं है, यह आश्चर्यजनक है.

सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर को मंदिर मामले पर सुनवाई थी लेकिन अदालत ने सुनवाई जनवरी, 2019 तक के लिए टाल दी.

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Image caption जस्टिस चेलमेश्वर

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने हाल के दिनों में सीबीआई में मचे घमासान पर कहा है कि ये सब इसलिए हो रहा है कि क्योंकि सीबीआई का कोई निश्चित क़ानूनी ढांचा ही नहीं है.

उन्होंने कहा कि आज़ादी के 70 सालों बाद भी कोई सीबीआई के क़ानूनी ढांचे के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कह सकता.

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, "विपक्षी पार्टियां हमेशा ये आरोप लगाती हैं कि सत्तासीन पार्टी सीबीआई को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है. ये तमाशा पिछले 70 सालों से चल रहा है. लोग जब स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं करते तो सीबीआई जांच की मांग करते हैं, लेकिन सीबीआई कोई दैवीय शक्ति नहीं है.''

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस चेलमेश्वर ने ये बातें शुक्रवार को मुंबई में 'ऑल इंडिया प्रोफ़ेशनल्स कांग्रेस' में कहीं.

जस्टिस चेलमेश्वर ने ये भी कहा कि वो एक बुरे चीफ़ जस्टिस के बजाय एक अच्छे जज के तौर पर याद किया जाना पसंद करेंगे.

ये बात उन्होंने उस सवाल के जवाब में कही, जिसमें उनसे उन्हें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तौर पर देखे जाने की लोगों की उम्मीदों के बारे में पूछा गया था.

अदालतों में सालों से लंबित मामलों पर जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि नई अदालतें बनाना सभी राजनीतिक पार्टियों की प्राथमिकता में सबसे नीचे है.

उन्होंने कहा, "मैंने चुनाव से पहले नेताओं को लोगों से लैपटॉप, टीवी और भैंस देने का वादा करते देखा है, लेकिन आज तक किसी नेता को नई अदालतें बनाने का वादा करते नहीं सुना."

जस्टिस जे चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल थे जिन्होंने जनवरी में दिल्ली में प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके सुप्रीम कोर्ट को 'बचाने' की अपील की थी.

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

सेक्स वर्कर की भी 'ना' का मतलब 'ना'

नवभारत टाइम्स की एंकर स्टोरी के मुताबिक अगर कोई सेक्स वर्कर है तो भी उसे यौन संबंध बनाने से इनकार करने का अधिकार है. दिल्ली में साल 1997 में हुए गैंगरेप के मामले में चार आरोपियों को 10 साल की सजा सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की.

28 जुलाई 1997 को कटवारिया सराय इलाके में हुए एक घटना में निचली अदालत ने आरोपियों को 10 साल कैद की सजा सुनाई थी. हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने पीड़ित महिला के खिलाफ़ इस शिक़ायत को तरज़ीह दी कि वह सेक्स वर्कर थी और उसका चरित्र ठीक नहीं था.

हाई कोर्ट ने मई 2009 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और आरोपियों को सजा पूरी करने के लिए चार हफ़्ते में समर्पण करने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई सेक्स वर्कर है तब भी उसे शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करने का पूरा अधिकार है.

ट्रायल कोर्ट ने सही फैसला दिया था कि अगर महिला अनैतिक काम में लगी भी थी तो भी आरोपियों को इस बात का अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वे उस महिला की मर्जी के खिलाफ बलात्कार करें.

RBI डेप्युटी गवर्नर पर तंज़

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के अनुसार केंद्र सरकार और रिज़र्व बैंक के बीच तनाव कम होता नज़र नहीं आ रहा है.

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ट्विटर पर इशारों ही इशारों में आरबीआई के डेप्युटी गवर्नर विरल आचार्य के हालिया भाषण का मज़ाक उड़ाते नज़र आए.

उन्होंने तंज़ भरे अंदाज़ में ट्वीट किया:

''रुपया डॉलर के मुकाबले उछलकर 73 पर चला गया है, कच्चे तेल का दाम 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे है, शेयर बाज़ार में 4% का उछाल है. क्या यही बाज़ार में हाहाकार है?''

दरअसल विरल आचार्य ने पिछले हफ़्ते अपने एक भाषण में कहा था कि जो सरकारें केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करती हैं वहां के बाज़ारों में हाहाकर मच जाता है.

हिंदी में भी होंगे सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले

जनसत्ता में छपी ख़बर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि अदालत के फ़ैसलों का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराने का इंतज़ाम किया जाएगा.

हिंदी के बाद यही प्रक्रिया क्षेत्रीय भाषाओं के साथ अपनाई जाएगी.

जस्टिस गोगोई ने ये भी कहा कि अदालत के फ़ैसलों को संक्षिप्त करने एक-दो पन्नों में जारी की जाए ताकि ये आम लोगों की भी समझ में आ जाए.

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