छत्तीसगढ़ चुनाव: रमन सिंह और करुणा शुक्ला में से किसे चुनेंगे अटल के दीवाने

  • 6 नवंबर 2018
करुणा शुक्ला

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी किसके हैं? छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के लिए ये एक बड़ा सवाल है.

इसकी वजह ये है कि राजनांदगांव की चुनावी जंग में उतरे दो क़द्दावर नेताओं की अटल बिहारी वाजपेयी पर अपनी-अपनी दावेदारी है.

इस सीट पर मुख्यमंत्री रमन सिंह का मुक़ाबला भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं करुणा शुक्ला के साथ है.

करुणा शुक्ला अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी हैं तो रमन सिंह अटल बिहारी वाजपेयी के मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री रह चुके हैं.

अटल आख़िर किसके हैं

चुनावों की घोषणा से ठीक पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने नए रायपुर शहर का नाम अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में 'अटल नगर' रखने की घोषणा कर दी है.

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने 'नवा छत्तीसगढ़' यानी भविष्य के छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर जारी किया है.

इस संकल्प पत्र का नाम 'अटल दृष्टि पत्र' रखा गया है जिसमे 2025 का छत्तीसगढ़ कैसा होगा इसकी परिकल्पना की गई है.

राजनंदगांव में टक्कर बेशक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच है.

लेकिन, दोनों ही उम्मीदवार बीच अटल बिहारी वाजपेयी के लिए सहानुभूति को भुनाने की होड़ में लगे हुए हैं.

दूसरी तरफ कांग्रेस का आरोप है कि जीते जी, भारतीय जनता पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी को तरजीह ही नहीं दी.

वाजपेयी की विरासत पर दावेदारी

राजनांदगांव में मेरी मुलाक़ात करुणा शुक्ला से तब हुई, जब वो एक चुनावी सभा को संबोधित करने जा रही थीं.

अपने भाषणों में वो कई बार अटल बिहारी वाजपेयी का नाम लेती हैं.

सिर्फ शुक्ला ही नहीं, चुनावी सभा में बोलने वाले कांग्रेस के स्थानीय नेता भी अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए नज़र आते हैं.

सभा के बाद बीबीसी से बात करते हुए करुणा शुक्ला कहती हैं, "अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने का सपना साकार हुआ. लेकिन राज्य की वर्षगाँठ पर कभी भारतीय जनता पार्टी ने वाजपेयी जी को ना याद किया ना कभी किसी पोस्टर पर उनकी तस्वीर ही लगाई."

शुक्ला कहती हैं कि राजोत्सव के दौरान बॉलीवुड के अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को बुलाकर सम्मान दिया जाता रहा है, लेकिन कभी भी अटल बिहारी वाजपेयी का ना तो नाम लिया गया और ना ही उनके कभी पोस्टर ही लगाए गए.

क्या वाजपेयी का नाम दिलाएंगे वोट?

करुणा शुक्ला कहतीं हैं कि पांच राज्यों में चुनाव हैं इसलिए अब भारतीय जनता पार्टी अटल वाजपेयी वाजपेयी का नाम लेकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है.

भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा से उनके रहे हैं. इस बार राजनांदगांव में चुनावी पोस्टरों पर भी उनकी तस्वीर है.

मोतीपुर गांव से शुक्रवार को अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए रमन सिंह ने कहा कि सबकी निगाहें राजनंदगांव की सीट पर लगीं हुईं हैं. लोग उत्सुक हैं ये देखने के लिए कि राजनांदगांव उन्हें चौथी बार विजयी बनाता है या नहीं.

कैसी हैं रमन सिंह की तैयारियां

राजनांदगांव मुख्यमंत्री का चुनावी क्षेत्र है इसलिए पिछले 15 सालों में सड़कों और पुलों के निर्माण के अलावा विकास की कई और भी बड़ी परियोजनाएं यहाँ लाई गईं. इस बार मुख्यमंत्री राजनांदगांव को 'स्मार्ट सिटी' बनाने का वादा भी कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री पर पूरे प्रदेश में पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार का ज़िम्मा है इसलिए उनके सांसद पुत्र अभिषेक सिंह ने राजनांदगांव में अपने पिता के लिए प्रचार की कमान संभाल रखी है.

कांग्रेस के नेता रमन सिंह को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं जिनमे से एक पनामा पेपर वाला मामला भी है.

लेकिन अभिषेक सिंह इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि इसका जवाब जनता ही देगी.

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बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं कि राजनांदगांव का मतदाता उनके पिता को जिताकर आरोप लगाने वालों की बोलती बंद कर देगा.

पिछले 15 सालों का हवाला देते हुए वो बताते हैं कि किस तरह राजनांदगांव में विकास हुआ है.

करुणा शुक्ला पर बाहरी होने का ठप्पा

उनका आरोप है कि करुणा शुक्ला बाहर से आईं हैं और उनका राजनांदगांव से कोई नाता नहीं रहा है. वो ये भी कहते हैं कि राजनांदगांव में करुणा शुक्ला को कोई जानता भी नहीं है.

इन आरोपों पर पलटवार करते हुए शुक्ला कहती हैं कि रमन सिंह भी बाहर से ही आए हैं क्योंकि वो कवर्धा के रहने वाले हैं.

करुणा शुक्ला 14वीं संसद की सदस्य रह चुकीं हैं. उन्होंने छत्तीसगढ़ के जांजगीर से लोक सभा का चुनाव जीता था.

लेकिन वर्ष 2009 में वो कांग्रेस के चरणदास माहंत से चुनाव हार गईं थीं.

उन्होंने 2013 में भाजपा से इस्तीफ़ा दे दिया था. करुणा शुक्ला कहती हैं कि जबसे अटल बिहारी वाजपेयी ने सक्रीय राजनीति से खुद को अलग कर लिया था, तभी से भारतीय जनता पार्टी ने उनको यानी करुणा शुक्ला को किनारे लगाने की कोशिश शुरू कर दी थी.

ऐश्वर्य की कहानी

आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह, लेकिन रमन सिंह और करुणा शुक्ला के बीच एक समानता है. दोनों ही अरबपति हैं.

चुनाव के पर्चे भरते हुए दोनों ने अपनी अपनी संपत्ति का जो ब्योरा साझा किया है उसके हिसाब से रमन सिंह के बैंक खातों में 20, 86,885 रूपए जमा हैं जबकि करुणा शुक्ला के खातों में 27, 91, 600 रूपए.

इसके अलावा रमन सिंह के पास 22.6 एकड़ ज़मीन भी है जबकि करुणा शुक्ला के पास मौजूद ज़ेवरात की क़ीमत 7, 70,000 रूपए बताई गई है.

कांग्रेस छोड़कर अलग हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने भी राजनांदगांव से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी.

उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई है जिसका नाम जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ रखा गया है. लेकिन बाद में जोगी ने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी.

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यही वजह है कि राजनांदगांव में लड़ाई मज़ेदार होती नज़र आ रही है.

शायद ये पहली बार है जब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस- दोनों ही अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर लोगों से वोट मांग रहे हैं.

अब तो वक़्त ही बताएगा कि अटल बिहारी वाजपेयी आख़िर हैं किसके?

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