छत्तीसगढ़ चुनाव: गंगाजल हाथ में लेकर क्यों खाई जा रही हैं कसमें

  • 17 नवंबर 2018
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वाराणसी से लोकसभा का चुनाव लड़ने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार ख़ुद को मां गंगा का बेटा कहते थे. जनसभाओं में बार-बार वो कहते कि मां गंगा ने उन्हें बुलाया है.

लेकिन छत्तीसगढ़ में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अब कांग्रेस पार्टी भी 'गंगा मैया की सौगंध' खा रही है.

असल में कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में सरकार बनने पर 10 दिनों के भीतर किसानों का कर्ज़ माफ़ करने का वादा किया है. पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी हरेक सभा में इस वादे को ज़रूर दोहरा रहे हैं. लेकिन पार्टी के दूसरे नेता इससे एक क़दम आगे बढ़ गए हैं.

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कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह रायपुर पहुंचे तो थे किसानों की बात करने लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वह गंगा जल हाथ में लेकर सौगंध खाने लगे.

"मैं आपके सामने गंगा जल की सौगंध खाता हूं कि दस दिनों के अंदर किसान का ऋण माफ़ करने का काम कांग्रेस पार्टी करेगी. गंगा मैया की कसम खा कर..."

आरपीएन सिंह के साथ उपस्थित दूसरे नेताओं ने भी किसानों की कर्ज़ माफ़ी को लेकर कसम खाई.

लेकिन किसानों की कर्ज़ माफ़ी पर 'गंगा मैया की सौगंध' को भारतीय जनता पार्टी हास्यास्पद और सियासी ड्रामा बता रही है.

राज्य के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बीबीसी से कहा,"कांग्रेस को पता है कि जनता को उस पर विश्वास नहीं है, कांग्रेस के घोषणापत्र पर विश्वास नहीं है. 60 साल में उन्होंने किसानों के लिये कुछ नहीं किया. इसलिए उन्हें गंगा मैया की सौगंध लेनी पड़ रही है. हमने किसानों के लिये जो कुछ किया है, वह सारी योजनाएं जनता के सामने हैं."

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भगवान राम और गंगा मया

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में राज्य की 90 में से बची हुई 72 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होने हैं.

इससे पहले माओवाद प्रभावित विधानसभा की 18 सीटों पर 12 नंवबर को मतदान हो चुके हैं. इन सीटों पर भाजपा ने जहां माओवाद और कांग्रेसी सरकारों के 60 साल को मुद्दा बनाने की कोशिश की थी, वहीं कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री रमन सिंह के सांसद बेटे अभिषेक सिंह का पनामा पेपर्स में कथित नाम आने, नोटबंदी, काला धन, जीएसटी और दस दिन में किसानों की कर्ज़ माफ़ी को मुद्दा बनाया था.

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लेकिन जैसे ही इन सीटों के चुनाव ख़त्म हुए, मुद्दे बदल गए.

कांग्रेस तो उन्हीं मुद्दों पर बनी रही लेकिन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार तक कई बार छत्तीसगढ़ का दौरा कर चुके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम और राम मंदिर को अपने भाषणों में मुख्य मुद्दा बनाया.

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राजनीतिक मामलों के जानकार ब्रजेंद्र शुक्ला कहते हैं, "भाजपा ने भगवान राम को चुनाव में चार साल बाद याद किया तो कांग्रेस की मजबूरी थी कि वह भी कोई ऐसा ही धार्मिक प्रतीक ले कर सामने आती. गंगा मइया की सौगंध को इसी तरीक़े से देखे जाने की ज़रुरत है. असली मामला तो किसान और उसका कर्ज़ है, जिसके वोट बैंक पर दोनों ही पार्टियां कब्ज़ा जमाने की कोशिश में हैं."

लेकिन मामला केवल कांग्रेस पार्टी का नहीं है.

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने बाक़ायदा स्टांप पेपर पर किसानों की कर्ज़ माफ़ी का शपथ पत्र दिया है. वहीं छत्तीसगढ़ में राजनीतिक ज़मीन तलाश रही समाजवादी पार्टी भी इसमें पीछे नहीं है.

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समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कहते हैं, "छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बनी तो हम चार घंटे में किसानों का कर्ज़ माफ़ कर देंगे."

किसान, धान और कर्ज़ माफ़ी

हालांकि अखिलेश यादव को यह पता है कि न नौ मन तेल होगा और ना ही राधा नाचेगी. ऐसे में उनके कहे को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जा सकता. लेकिन धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में धान का समर्थन मूल्य तो बरसों से एक बड़ा मुद्दा रहा ही है, अब किसानों की कर्ज़ माफ़ी का मुद्दा भी इसमें जुड़ गया है.

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छत्तीसगढ़ की लगभग पौने तीन करोड़ की आबादी में 43 लाख की जनसंख्या किसान परिवारों की है और चुनाव के इस माहौल में कोई भी राजनीतिक दल किसानों के वोट को लुभाने की कोई भी कोशिश नहीं छोड़ना चाहता.

राज्य की भाजपा सरकार ने 2013 में किसानों को 2100 रुपये का समर्थन मूल्य देने का वादा किया था. लेकिन जब चुनावी साल आया तब कहीं जा कर समर्थन मूल्य में दस सालों में पहली बार 200 रुपये की बढोतरी की गई और समर्थन मूल्य 1750 रुपये पहुंचा.

यह अभी भी 2100 रुपये नहीं हुआ है, जिसका वादा पांच साल पहले भाजपा सरकार ने किया था.

किसान नेता आनंद मिश्रा का कहना है कि देश भर में किसानों का 11 लाख करोड़ रुपये का कर्ज़ है लेकिन केंद्र सरकार ने पिछले चार सालों में कुछ औद्योगिक घरानों का 3 लाख 70 हज़ार करोड़ रुपया माफ़ किया है. अगर भाजपा किसानों के साथ होती तो वह करोड़ों किसानों के बारे में सोचती.

आनंद मिश्रा कहते हैं, "छत्तीसगढ़ में 12.50 लाख किसानों का लगभग 3400 करोड़ रुपये का कर्ज़ बकाया है. अकेले सरकार लगभग 5000 करोड़ से अधिक का राजस्व शराब से पाती है. सरकार के लिये कर्ज़ माफ़ी बड़ी बात नहीं है. मामला केवल नीयत का है."

लेकिन राज्य के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के पास इससे अलग आंकड़े हैं.

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अग्रवाल का दावा है कि पिछले 15 साल में राज्य की भाजपा सरकार ने धान का समर्थन मूल्य और बोनस मिला कर 76 हज़ार करोड़ रुपयों का भुगतान किसानों को किया है. इस साल भाजपा ने 60 साल से अधिक उम्र के लघु व सीमांत किसान और भूमिहीन कृषि मज़दूर को एक हज़ार रुपये पेंशन देने की भी घोषणा की है.

बृजमोहन अग्रवाल कहते हैं, "नीति और नीयत के सवाल तो कांग्रेस से पूछे जाने चाहिए, जिसने इतने वर्षों में किसानों के लिये कुछ नहीं किया और अब गंगा मइया की सौगंध खा रही है."

हालांकि कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी का वादा है कि कांग्रेस पार्टी गंगा मैया का सम्मान भी रखेगी और सरकार बनते ही 10 दिनों में कर्ज़ माफ़ी भी करेगी.

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त्रिवेदी कहते हैं, " गंगाजल की सौगंध लेने पर भाजपा को आपत्ति कहां हैं- गंगा जल पर या किसानों की कर्ज़ माफ़ी पर? असल में भाजपा की आस्था न तो गंगा जल में है और ना ही किसानों के कल्याण में. बनारस जा कर जिस पार्टी के नेता ने गंगा की कसम खायी और फिर भी स्वच्छ गंगा की दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया, जिस छत्तीसगढ़ में 1344 किसानों की आत्महत्या राज्य की भाजपा सरकार को विचलित नहीं करती, वहां भाजपा से कोई उम्मीद करना ही बेमानी है."

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